maithilisahitya, मैथिली कव, मैथिली गजल, मैथिली गीत, मैथिली कथा, मैथिली साहित्य MAITHILISAHITYA: कथा

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मैथिली साहित्य, मैथिली गजल, मैथिली कथा , मैथिली कविता, मैथिली गीत , कहमुकरी, चारपातिया

सामाचार

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 काल्पनिक कथा 

प्रेमक त्याग



बात दुई दशक अगाडीके अछि। पहाडी भेकस' अर्जुन प्रसाद आ कृष्ण प्रसाद उपैटके तराई मधेशक सुनसरीके तितिरवन आयल छेलै । अर्जुन प्रसाद आ कृष्ण प्रसाद घरदुवार बनाके अपन अपन परिवारके सँगे सुखी जीवन बितावेए लागल छलैए । अर्जुन प्रसादके परिवारमे दू-प्राणी आ संगमे एकटा बेटा छल जकर नाम जयप्रकाश छलैए । तहिनती कृष्ण प्रसादके परिवारमे भी दू-प्राणी आ संगमे एकटा बेटी छल  जकर नाम संगीता रहैत छै ।जयप्रकाश आ संगीता एकदोसरसँ एकदम मिलैत छेलैए , यी कहूँ जे दुनू बचपनमे एकदोसरके पसंद करैत छलैए । अर्जुन प्रसादके परिवारके देह भारी रहै छै । साउन भादोके महिना बर्खाके समय , दैवके लिला भी अपरम्पार होई छै । लगातार बर्खाके कारणे बाईढक पाईन जतैततैए बहेए लाग्लैए । एतेक तककी घरमे भी बाईढक पाईन ढुकी गेलैए ।ऊ साल जेनातेना काटैत छै आ अगहन चढिते अर्जुन प्रसाद अपन परिवारके संगे तितिवन छोडिके झापा जिल्ला आ किछ महिनाबाद कृष्ण प्रसाद सेहो तितिरवन छोडिक' अपन स-परिवार संगे मोरङ्गके बिराटनगर उपैटके चलि जायत छै ।अई तरह दुई परिवार एकदोसरसँ बिछैड जायत छै । समरण करैक' लेल दू-परिवार एकठाममे रहिक खिचायल फोटो मात्र रहैत छै एकदोसरके परिवारके संगमे । फेरसँ दू-परिवार दुई अलग अलग जगहमे रहिक' खुशीके साथ अपन अपन जीवन यापन करेए लागै छै । समयके उतारचढाबके संगे अर्जुन प्रसादपर फेरस' एकटा कहर टुटि पडैत छै । अर्जुन प्रसादके पत्नी दोसर पुत्रके जन्म दैत अई मायारुपी संसारसँ अपन नाता तोडि लैत छै । तकराबाद अर्जुन प्रसादके छोट बच्चाके पालन पोषण केनाई संगहि सरकारी कर्मचारी भेलाके कारणे समयमे कार्यालय पँहुचनाई बहुतोरास दु:खके सामना कर' पडैत छै ।मुदा जे-जेना अर्जुन प्रसाद अपन दुनू बेट जयप्रकाश आ ओमप्रकाशके निक परवरिशके साथ पालनपोषण करैत छै । एम्हर कृष्ण प्रसाद सेहो विराटनगरमे अपन परिवारके संगमे सुखी जीवन बितावैत रहैत छै । कृष्ण प्रसादके बेटी संगीता बहुत याद करैत रहै छै जयप्रकाशके त' ओम्हर जयप्रकाशके भी तेहनें हालत रहै छै । जयप्रकाश सेहो संगीताके फोटो देख देखके अपन मनके तसल्ली दैय रहै छै । दुई परिवार दुई जगह भेलाके कारणे भेट होब नैई सकै छै । समयके संगसगें जयप्रकाश स्कुल स्तरके पढाई खतम क'के क्लेज पढबाक लेल विराटनगर महेन्द्र मोरङ्ग क्लेजमे अपन नाम लिखावैत छै आ ओतही होस्टलमे रहेए लागै छै । एम्हर संगीता सेहो अपन स्कुलके पढाई सकाएके क्लेजके पढाई महेन्द्र मोरङ्ग क्लेजस' शुरू करैत छै । एत' तकमे दुनू सिआन भ'गेल रहै छै । माने एक दोसरके चिन्हेए नैई सकैत छै ।दोसर बात जयप्रकाश स्कुलमे अपन नाम बदैलक' आलोक क'लेनें रहै छै । संगीता जयप्रकाशके अतापत्ता लगावैत लगावैत थाकी जायत छै । जयप्रकाशके कोनो पत्ता नैई भेटलापर संगीता अपनें क्लेजमे पढिरहल कोनो दोसर लडकाके पसंद कर' लागैत छै । मुदा जयप्रकाशके मन आ मस्तिष्कमे संगीताके नाम गुन्जैत रहैत छै । जयप्रकाश कोनो दोसर लडकी दिस पलैटके नैई देखैत छै । एके क्लेजमे पढाई केलासँ दुनू गोटेमे दोस्ती भ'जायत छै  । मुदा जयप्रकाश संगीताके ईहे हमर बचपनके प्रेमीका छियै आ संगीता जयप्रकाशके ईहे हमर बचपनके प्रेमी छियै से दू गोटेंमेसँ किओ नैई एक दोसरके पैहचानैत रहै छै । एकदिन संगीता टिफिनके समयमे नस्ता खाके क्यान्टीनमे पैसा बुझाब लेल गायल रहै छै संगमे जही लडकके संगीत पसंद करैत रहै छै सेहो रहै छै । ओही बखत जयप्रकाश सेहो पैसा बुझाब क्यान्टीन गायल रहै छै । जहिनती संगीता अपन बटुवा निकालीके खोलैत छै तहिनती जयप्रकाशके नजर बटुव मे लहल फोटोपर पडैत छै ।संगीता अपन बटुवामे बचपनमे जयप्रकाश आ ओकर परिवार एकठाममे रहिक' खिचायल फोटो रख्ने रहैत छै से फोटोके जयप्रकाश देख लैत छै आ चिन्हियो जायत छै मुदा किछ कह' नैई सकैत छै । कारण संगीताके संगमे दोसर लडका रहैत छै जकरा संगीता पसंद करैत रहै छै । जे-जेना संगीता जयप्रकाशके आलोक नामसँ बहुत नजदीकके दोस्त बना लेनें रहै छै । एम्हर जयप्रकाशके संगीताके संगमहक बचपनके यादसब भित्तरेभितर खायत रहै छै । जयप्रकाश अपन घरमे पिता आ भाईके बचपनके संगीता कृष्ण प्रसाद काकाके बेटी अपने संगे एके क्लेजमे पढैत छै से बात बता देनें रहै छै। एकदिन एहेन समय आबैत छै जे संगीताके पिता कृष्ण प्रसाद संगीताके शादीके बात निकालैए छै  आ संगीताके मजबूर भ'के अपन नव प्रेमीके संगमे बियाह करबाक निर्णयमे पुगि जायत छै । जयप्रकाशके कोनो दोसर दोस्तके मादे संगीताके बियाहक निमन्त्रण कार्ड मिलैत छै । बियाहक निमन्त्रण कार्ड देखिक' जयप्रकाशके आँगु संसार शुन्य नजर आब लाग्लैय । तकराबाद जयप्रकाश अपनाआपके सम्हारैत होईस्टलसे  घर चलि जायत छै । एम्हर बियाहक नव खुशीमे संगीता अपन बचपनके प्रेमके त' छोडू क्लेजके सबसँ लगके दोस्त अपन बियाहमे आयल अछि की नैई सेहो देखैल' बिसरी जायत छै । बियाहक किछ दिनबाद संगीत फेरसँ क्लेज जाई लागै छै ।संगीता क्लेजमे एम्हर ओम्हर अपन नजर पसारैत छै आलोक कत्तौ नैई नजर आवै छै  । तकराबाद आलोकके होघस्टलके दोस्तसँ पत्ता लगावैत छै त' आलोकके दोस्त बंतावै छै जे आलोक त' अहाँके बियाहसे दू दिन पहिने ऊ अपन गाम चलिगेल आ किछदिन भ'गेल नैई आयल अछि ।तकराबाद संगीता आलोकके घरके ठेगाना पता लगाके चलिदैत छै आलोकसँ भेट' लेल जे आलोक हमरा बियाहमे किय नैई आयल । एम्हर जयप्रकाशके घरमे ओकर पिताजी दुनू भाईके घरमे छोडिके अपने पहाड गायल रहैत छै किछ काजसँ ।संगीता पत्ता लगावैत लगावैत अन्त्यमे आलोकके घर पहुँची जायत छै । समय दूपहरके बारह बजैत रहै छै । दुवारपर जयप्रकाशके छोट भाई ओमप्रकाश कुर्सी लगाके बैस रहै छै ।संगीता लगमे जाके ओमप्रकाशसँ पुछैत छै  । आलोकके घर ईहे छियै ? ओमप्रकाश जवाफ दैत छै हँ ईहे छियै आलोकके घर । अहाँ के छी ? हम अहाँके नैई चिन्हलौं ? संगीता जवाफ दैत छै : हम आलोकके क्लेजके दोस्त छियै , हुन्कासँ भेट कर' लेल आयल छी । तकराबाद ओमप्रकाश संगीताके अपन भैयाके रुममे ल'जाके अराम करैल' कहै छै आ अपना जायत छै नास्तापानी बनाब लेल । एम्हर संगीता आलोकके रुममे कुर्सीपर बैसके एम्हर ओम्हर नजर पसारैत छै त' घरक भित्तामे देखै  छै जयप्रकाशके स-परिवार आ ओकर स-परिवार मिलके बचपनमे खिचायल फोटो टाँगल । संगीता फोटो पैहचानी लैत छै आ ओमप्रकाशके बजावैत छै । ओमप्रकाश दौडिक' आवैत छै  । संगीता ओमप्रकाशसँ पुछैत छै फोटोके बारैमे ।  ओमप्रकाश फोटो महक सबकिओके बारैमे परिचय करावैत छै : यी हमर पिताजी , यी हमर माय , यी हमर भैया ,   आ यी कृष्णप्रसाद काका काकी संगमे ओकर बेटी हमर भैयाके बचपनके प्रेमिका संगीता अछि । जकर आशामे अखनधरि हमर भैया कुमारे अछि ।दोसर लडकीसँ बियाह कर' लेल नैई मानैत छै । फोटोके परिचय सुनिक' एकाएक संगीताके आँईखसँ नोर बहेए लागैत छै । संगीताके किछु नैई फुरैत छै । संगीताके जेना लागैत छै ओकर गोडक' निचाके जमिन हेरा गेलै । अपन मनके मजबुत बनाके फेर संगीता ओमप्रकाशसँ पुछैत छै  माय , बाबुजी आ अहाँके भैयाके नैई देखै छी ? कत' गायल य ? ओमप्रकाश जवाफ दैत छै : बाबुजी किछ काजसँ पहाड गायल छथिन आ भैया खेतदिस गायल छै । फेर संगीता पुछैत छै : आ माय ? ओमप्रकाश काँनैत कहै छै : माय त' हमरा जन्म दैतेए यी संसारके छोडिक' चलि गेल्खिन । एतेक बात सुनिक' संगीताके आँईखसँ जोर जोरसँ नोर बहए लाग्लैय । जकरासँ बचपनमे अपन माय बराबरके ममता भेटैत छेलै । आखिर होनिके किओ नैई रोक सकैत छै । संगीता अपन मनके मजगुत बनाके आलोकके विषयमे पुछैत छै ।  ओमप्रकाश अहाँके भैया  किय बिया  करैल' नैई मानैय ? ओमप्रकाश कहै छै  भैया बजै छथिन जे हम बियाह करब त' बचपनके अपन प्रेमिकाके संगे नहि त नैई करब । जकर हम पत्ता लगा लेनें छी । संगीता फेर पुछैत छै : अहाँके भैयाके प्रेमिकाके नाम की अछि आ ओ कखन कत' रहैत छै ? ओमप्रकाश बतावै छै । भैयाके प्रेमिका भैयाके संगेसंग एके क्लेजमे पढैत छै आ ओकर नाम संगीता छियै ।एतेक बात ओमप्रकाश बतावैत छै की ताहि बिचमे खेतक काज खतम क'के जयप्रकाश(आलोक) घर पहुँचि जायत छै आ अपन रुममे जायत छै त' देखै छै अपन भाई संगे संगीताके बतिआवैत । दुनू हाथमे भैरभैर हाथ चुडी पहिरनें , लाल साडीमे भरि मांग सिनुर लगेनेंए । जयप्रकाशके त' आत्मा कानेंए लागैत छै मुदा यी सब दृष्यके जयप्रकाश(आलोक) अपन आँईखट भित्तरे नुकाके संगीताके बियाहक बधाई दैत छै । मुदा जयप्रकाश संगीताके नजरसँ नजर नैई मिलाब सकै छै । बियाहक ढेररास बधाई अछि संगीता अहाँके गृहस्थी जीवन शुखमय हो से हम भगवानसँ प्रर्थना करै छी आ हमरा माफ करब जे हम अहाँके बियाहमे आब नैई सकलौं । संगीता पुछैत छै आलोक (जयप्रकाश)सँ आलोक अहाँ अपना लेल भगवानसँ कथी कथीके कामना केलौं , कीसब मागलौं ? एना हमरासँ नजर चोराएके किय बात करै छी ? नजरसँ नजर मिलाके बात करैवाला जयप्रकाश उर्फ आलोकके हिम्मत के चोराएके ल'गेलै   कत' हेरा गेलै ओ हिम्मत ? एतेक बाजैत संगीता जयप्रकाशके भरि पाँज पकरिके जोरजोरसँ कानेंए लागैत छै संगे जयप्रकाश सेहो कानेंए लागैत छै । संगीता जयप्रकाशसँ सवाल कर' लागैत छै । बताऊ जयप्रकाश अहाँ हमरा चिन्हिके , हमरा लगमे रहिक' फेर हमरासँ किय अन्जान बनल रहलौं  आखिर किय जयप्रकाश किय ? हमरा हमर प्रेमके दोषी किय बनेलौं ? जयप्रकाश कानैत कहै छै । सायद संगीता हमरा नसिबमे अहाँके प्रेम नैई लिखल छेल , अपना दुनूके संग नैई लिखल छेल । संगीता फेर सवाल करैत छै । अहाँ त' हमरा चिन्हि गेलौं नें जयप्रकाश फेर किय हमरा नैई बतेलौं जे हम अहाँके जयप्रकाश छी ? किय अहाँ हमर नजिकमे रहिक' हमरासँ नचकायल रहलौं आखिर किय जयप्रकाश किय ? जयप्रकाश कहैत छै संगीतासँ : संगीता जखन हम अहाँके अहीँ हमर संगीता छी पहिचानलौं तखन अहाँ कोनो दोसर लडकाके संगमे प्रेम कर' लागल छेलौं आ ऊ लडका अहाँके संगमे छेल । हमही अहाँके जयप्रकाश छी  यी बात बताबस' डेरा गेलि कहि अहाँ हमरा पहिचानैस' अस्वीकार करबै त' । वस इहे डरसँ हम अहाँके वास्तविक परिचय नैई बतेलूँ आ अहासँ नुकायल रहलूँ । संगीता फेर सवाल करैत छै : किय जयप्रकाश अहाँके अपन बचपनके प्रेमपर विश्वास नैई छेल की ? हम त' अहाँके पत्ता लगावैत लगावैत थाकीक'  अन्त्यमे बाबुजी बियाह करैल' हमरापर दबाब दिअ लागल तब जाके हम विवश भ'के दोसरके संगमे बियाह कर'लेल मजबुरण   राती होब पडल ।जयप्रकाश कहैत छै संगीतासँ: हम त' वस एकदिन अहाँ हमरा जरूर भेटब कहिक' बाबुजीके अपन बियाहक बातसँ नकारैत एलौं । किय की हम अहाँसँ सच्चा प्रेम करैत छेलु , करैत छी आ करैत रहब । मुदा अहाँ संगीता एतेक जल्दी हमर प्रेम आ हमरा बिसरीके बियाह कर' लेल तैयार भ'गेलौं ? आफ त' हमरा लेल अहाँ खाली  सपना बनिक' रहिगेलौं । आब त' अहाँके मांगमे किओ दोसरके नामके सेनुर लागिचुकल य ।आब त' हम इहे कहब संगीता अहाँ अपन जीनगी हँसीखुशीके सँग जीबू । हम जही हालतमे छी हमरा ओही हालतमे छोडि दिअ । अहाँके जीवनमे किओ जयप्रकाश छेल से बिसरि जाऊ । संगीता कहैत छै: प्रेमक एतेक बडका बोझ ल'के हम नैई जीसकब जयप्रकाश । जयप्रकाश कहैत छै संगीतासँ: देखूँ संगीता अहाँके बितलाह जीवनमे किओ जयप्रकाश छेल से बिसरी जाऊ । आब अहाँके आँगु आलोक य । आब अहाँ आ हम एक बढिया दोस्त मात्र छी  आ हमर नाम आलोक छी आलोक संगीता । अपनासबके प्रमक बिछोडमे नैई अहाँके कोनो गल्ती य आ नैई हमर ! वस यी सब समयके खेल आ विधिके लेख अछि । अन्त्यमे संगीता हम अहासँ आग्रह करै छी जे अहाँ तहेन कोनो किसिमके कदम नैई उठायब जाही कारण हमर अहाँके स्वच्छ दोस्तीमे दाग लागेए । आब वेसी काँनू नैई चुपू । आई अहाँ पहिलबेर आलोकके घर आयल छी त' खानाउना खाँके जाऊ , नव रिस्ता बनाके जाऊ । हमर मनमे अहाँक लेल कोनो सिकवा गिला नैई य । वस आब एतबें कहब संगीता अहाँ जत' रहूँ हँसीखुशीसँ रहूँ , सदिखन मुस्कुरावैत रहूँ । प्रेक्षक दोसर नाम त्याग  होई छै संगीता प्रेमक त्याग ।


लेखक : प्रयास प्रेमी मैथिल ( आर.एन. मेहता )


समाप्त ।



बिदेशक यात्रा
(भाग - ३ )

रामपुजन : खटरा भैया छहऽ  हो ?
खटरा : के छहऽ हो ? ए काकी । गोर लागै छी ।
माय : हँ बौवा हमसब ।
खटरा : अच्छा रामपुजन भाय अहाँ आइकल की काज करै छहि ? दैमन्तीके बियाहमे जे ॠण लेनें छेल्ही धनिराम सँ फरिएल्ही की नै ?
रामपुजन: कतऽ सँ फरिएबै भैया । सोचलि जे विदेश जेतौ ।
खटरा पासपोर्ट बनेलही से ?
रमपुजन: ने भैया नै कनेलियै य । पासपोर्ट बनावमे कतेक पाय लागे छै से बता दिय ने हमरा नै बुझल छै आ की की करर पडै छै सेहो नै बुझल छै हमरा ।
खटरा: देखही रामपुजन तोरा पासपोर्ट बनावैमे मोटामोटी ६००० पाय लागतो । नागरिताके फोटोकपी , MRP फोटो । जिल्लासँ निकालभही त डेढ महिनामे बनतो राजधानी जाके बनेबही ते एक हपतामे बनतो मुदा डब्बल खर्च लागतो । तोहर की विचार छौ  ? जिल्लासँ बनेबही की राजधानीसँ ?
माय: नै जिल्लेसँ बनेतै । आरो कीसब कर पडतै ?
खटरा: काकी पहिने पायके ब्यवस्था कके आबु बाँकी हम सबकिछु कदेबै ।
माय: अच्छा ठिक छै बौवा अखन हम जाइ छी पायके जोगारमेधनिराम अहिठाँ ।
खटरा: अच्छा ठिक छै ककी जाऊ ।
( तकराबाद रामपुजन अपन मायके लके पैसाके जोगारके लेल सेठ धनिरामके अहिठाँ जायत छै ।)
दूनु मायपुत: नमस्कार मालिक ।
धनिराम नमस्कार । कहूँ की समाचार सब कुशल मंगल य नें ?
रामपुजन: जी मालिक सब ठिक छै ।
धनिराम: तब फेर की काजसँ एलौ ?
रामपुजन: मालिक अहाँक त बुझले य गामघरके कमाइसँ घरक दुइछाँक मुश्किलसँ टाइर रहल छियै ताहीमे अहाँसँ लेल कर्जा कोनाके फर्याब बड मुश्किल भरहल छै हमरा ।
 धनिराम तब की सोचलौं ? हम त हमर पैसा सुद ब्याज दुनु जोइरके लेबै करब ।
रामपुजनः मालिक हम सोचलि जे हमरा किछ आरो पैसा दिअ हम विदेश जेबै तकराबाद हम अहाँके पाय पाय चुकादेब ।
धनिरामः से त ठिक अछि बौवा मुदा आउर कर्जा लेबाक लेल अहाँके घरेरीबाला जमिन धरौटी राख पडत तब देब हम कर्जा नही त नै देब ।
रामपुजनः ठिक छै मालिक हमरा मंजुर छै ।
धनिरामः भौजी अहाँ किछु नै बजैत छी ।
मायः ठिक छै हमरो मंजुर छै । ततकाल हमर बेटाके पासपोर्ट बनावैल ६००० हजार पैसा दिअ मालिक ।
धनिरामः अच्छा ठिक छै । हँ हइ लिअँ मुदा हमरा हमर पायके सावा अ ब्याज तो
रामपुजनः अचछा ठिक छै मालिक हम अहाँके पैसा समयमे चुकादेब  ।
( तकराबाद रामपुजन आ ओकर माय सेठ धनिरामके अहिठाँ से पाय लके अपन घर वापस जायत छै आ पासपोर्ट बनाके विदेश जेबाक लेल तयारी कके खटराके मादे पासपोर्ट एकटा निक म्यापावरमे लगा दैत छै । किछ दिन बाद भिसा आवैत छै आ रामपुजन विदेश जायत छै  रामपुजनके विदेश जेबाक बखत बस स्टेसनतक छोडओकर सब परिवार जायत छै आ संगमे खटरा सेहो रहैत छै । )

क्रमश:

प्रयास प्रेमी मैथिल

मदनलाल
सकुन्तला देवी
उमा
महेश
राम  ( ओम नारायण )
दिभ्या
शुस्मा
शम्भुनाथ
कमलावति
जिना ( अप्सरा )
रिङकी
घोघन
लिलिया
पिन्टु
फेकु
प्रयास प्रेमी मैथिल
गुल्टेन
दिपक
डाक्टर

                 ( सकुन्तलादेवी उमा, राम आउर शुस्माके हुन्कर सबके पिता जी माने अपन पति मदनलालके आश्रयमे छोडिके अपना प्रलोक चलिजाएत छै । तबसँ मदनलाल अप्गरे मिहिनेत मजदुरी कऽके अपन दू बेटी आ एक बेटाके निक जेका सँ प्रतिपालन करैत छै । एकदिन मदनलालके जेष्ठ बेटी उमा बियाहक जोग भऽजायत छै आ उमाके निक जेकासँ मैथिली परम्परा अनुसार शादी कऽके विदाई करैत छै । ¬¬)

"बापके दुलारी, सिया सुकुमारी, आजु होयत छै विदाई ।
बुढ माई बापके, करेजा कानैं, नयना नोर बहाई ।।

समदाउन
*********
पिता :- हँसि खुशि जाऊ धिया, पियाके नगरियाँ, पियाके नगरियाँ ।
            अमर रहत सेनुर तोहर ।
कोरस:- अमर रहत सेनुर तोहर ।

पिता :- बेटी धन पराई होई छै , अहाँ यी मानू ,अहाँ यी मानू ।
            नै अहाँ बहाबू नोर ।
कोरस:- अमर रहत सेनुर तोहर ।

पिता :- दुनियाँके रित बेटी, बिधिके यी बिधना, बिधिके यी बिधना ।
            अहूँ करु एकरा स्वीकार ।
कोरस:- अमर रहत सेनुर तोहर  ।

बेटी :- दियौ आशिष भैया, अपन बहिन के, अपन बहिन के ।
           जूनि हबियो अहाँ उदास ।
कोरस:-अमर रहत सेनुर तोहर ।

बेटी :- करिएहे सेवा बाबाके, छोट्की बहिनिया, छोट्की बहिनिया ।
           बचा रखिएहे घरक शृगांर ।
कोरस:-अमर रहत सेनुर तोहर ।

( मदनलालके बेटी उमाके विदाईके दृष्य तिर्थ यात्रा करिके अपन पुरा परिवारके साथ घर जारहल शम्भुनाथ, कमलावति  जिना आ रिङकी देख लागै छै । जिना अपन पिता जीसँ पुछैत छै । )

जिनाः– पिता जी ?
शम्भुनाथः– की बेटी ?
जिनाः–पिता जी हँऊ देखूँ त' ऊ लडकी कनियाँ बनल कतेक निक आ लागैत सुन्दर लागिरहल छै । मुदा पिता जी ऊ लडकी किए कानिरहल छै ?
शम्भुनाथः– बेटी जिना ओकर शादी भऽरहल छै आ  ऊ अखन दुल्हिनके पहिरनमे छै आ दुल्हिनके पहिरन बहुत सुन्दर होएत छै । अहूँ एकदिन दुल्हिन बनव आ अहिनति काँनव आ हमरासबके छोडिके चलिजायब अपन पियाके घर । यी संसारके रित अछि बेटी । हरेक बेटीके एकदिन अपन बापके घर छोडिके अपन सासुर जाई पडैत छै ।
जिनाः– पिता जी हमरो अहाँ अहिनति दुल्हिन बनाके विदा करब की नै ?किए की पिता जी सपना अछि जे हमहूँ दुल्हिन बनिके अपन पिता जीके घरसँ  विदाई हबी ।
शम्भुनाथः– अवश्य बेटी हम अहाँके जरूर दुल्हिन बनाके विदाई करब । अपन बेटीके दुल्हिन बनाके विदाई करैसँ वेसी खुशीके पल आउर किछो नहि होएत छै एकटा बापके लेल । ड्राईभर गाडी आँगू बढाबू ।

( शम्भुनाथ सँपरिवार अपन घरके दिस जाएत अछि आ उमा विदाई भऽके अपन ससुराल चलिजायत छै । )

हाँस्य ब्यङ्ग

( पिन्टु , बाट जोहैत रहै छै लिलियाके आवैकऽ आ अहि बिचमे फेकु आबिजायत छै आ पिन्टुसँ पुछैत छै । )
फेकुः– हे हो पिन्टु भैया ककर बाट  निहारिरहल छहऽ ? अहिठना चौबटियामे वैसके ।
( पिन्टु किछु तमसाएके जवाफ दैत छै ।)
पिन्टुः– रै छोरा तू अपन काजसे मतलव राख , हम ककरो बाट तकैत छियै ओहिसँ तोरा कुन मतलव ?
फेकुः– हमरा सब मालुम छै भैया तू अहिठना बैसके लिलियाके आवैकऽ बाट जोहिरहल छहऽ ।
पिन्टुः– जब तोरा सब किछु मालुम छो तऽ फेर पुछै छहि किए ?

( एतबहिमे लिलिया जेहेन कपडा लगवैत छलै सेम ओहिने कपडा लगाके एकटा दोसर लड्की आवैत रहै छै आ पिन्टुके नजैर ओहि लड्कीपर पडैत छै आ फेकूके कहैत छै । )

पिन्टुः– हेवे देखहि फेकू तोहर भौजी हमर लिलि रानी आविरहल छौ । आई हम आँईख मुइनके जाइ छियै आ एक मिठगर चुम्मा लेवै ।
फेकुः– साचो भैया ?
पिन्टु :– तब तोरासँ हम की मजाक करिरहल छियो ?
फेकुः– तब देर कुन बातके ? आँईख मुइनके जा आ लऽलिअ हमर भोजीके गालमे चुम्मा ।

( पिन्टु आँईख मुइनके जायत छै लिलिया सम्झिके ओहि लड्की चुम्मा लैल आ जहिनति लड्कीके आँईख मुइनके पाजामे पकडै छै ओहिनति उ लड्की पिन्टुके अपन दुनू हाथसँ ठेलके जोरदार तमचा गालपर मारै छै की पिन्टु गिर पडैत छै आ लड्की गरियावैत अपन रस्ता चलिजायत छै ।)

लड्कीः– साला अबारा कुत्ता कहिका ।
फेकुः– पिन्टु भैया चुम्मा केहेन लागलऽ , नुनगर छेलऽ की चहटगर ?
पिन्टु :– रे सार रूक तऽ तू ।

( पिन्टु फेकूके मारऽ दोडै छै आ फेकू भागिजायत छै )

( एक सप्ताह वाद )

मदनलालः– बौवा  राम ?
रामः–  जी बाबू जी ।
मदनलालः– अहाँ आजुकल क्लेज किए नहि जारहल छी ?हम देखरहल छी अहाँ हरदम घरक काम काजमे लागल रहैत छी किए ?
रामः–  बाबु जी उमा दिदीके ससुराल गैलाक वाद अहाँके अकेले काज करैत देखिकहमरा क्लेज जाईके मन नै होयत छै आ अहाँ अकेले कतेग दिन काज करैत रहब ?
मदनलालः– देख बेटा काज कोना करबै यी तोरा सोचैके विषय नहि छियो । कुन काज कोनाके करबै , की करऽ पडतै की नहि करऽ पडतै यी हम करबै तू दुनू भाई बहिन पढऽ जो । अखन दू क्लास पढिलिखि लेबें तऽ तोरे आउरके हकमे निक रहतो । उमा दिदी पढलकौं तऽ देखही तऽ अखनी कतेक काज दऽरहल छै पढाई ।
रामः–  ठिक छै बाबु जी अहाँ जेहे कहब हम ओहे करबै । हम काल्ही सँ क्लेज जायब ।

(६ महिना वाद एकदिन अचानक रामके बाबु जी मदनलाल बेहोस भऽजायत छै । से देखिकऽ मदनलालके छोट्की बेटी शुस्मा चिच्याई उठै छै आ शुस्माके चिच्याहट सुनिकऽ राम दोडिकऽ अवैत छै ।)¬

शुस्माः– भैया ऽ..ऽ...
रामः–  की भेलै शुस्मा ?
शुस्माः–  देखुँ नें भैया बाबु जिके कि नें की भऽगेलै । बाजबो नहिकरैत छै ।
रामः–  की भेल बाबु जी की भेल । (  सब गोटेंए काँन लागैत छै । )

( राम बाबु जीके तुरनत हाँस्पीटल लजायतछै । संगही अपन दिदी भिनाजुके जानकारी करावैत छै । हुन्कर दिदी भिनाजु जहिनें खबर सुनैत छै तहिनें दुनू प्राणी अपन पिता जी के देऽख लेल चलि दैत छै । एम्हर रामके पिता जी होसमे तऽ आवैत छै मुदा डाक्टर जवाफ दऽदेनें छै जे अहाँके पिता जी कखिन्तो संसार छोडि सकैत य । एम्हर उमा आ हुन्कर पति अपन ससुरके देखै लऽ हतरपतर कके आविरहल छै की बिचेंमे करिकबा बिलाई बाट काटि दैत छै । तहियो ओसब आवै छै आ भेटै छै अपन पिता जीसँ । ¬¬)

उमा महेशः– यी की भगेल पिता जी ( कानैंत )
मदनलालः– देख बेटी हमर बात सुन, पाहुन अहुँक कहैत छी । अब हमर बाँचैंके कम उमिद य हमरा जेबाक प्रहर आबिगेल य ,से हम अहाँ दुनू गोटेंक उपरकिछ जिम्मेवारी सोप चाहै छी..
उमा महेशः– नै बाबु जी अहाँके किछ नहि होतै । की कहऽ चाहै छी बाबु जी कहूँ ।
मदनलालः– पाहुन वचन दिअ जे हमरा मरलाक वाद राम आ शुस्माके निक जेका सँ देखब अपन छोट भाई बहिन जेकाँ ।
उमा महेशः– जी बाबु जी हमसब राम आ शुस्माके अपन सहोदर भाई बहिन जेकाँ अपन लगमे राखब ।

(एतबेंमे मदनलाल यी संसार छोडिकऽ प्रलोकके चलि जायत छै । समुच्चा परिवारमे कन्नारोहट शुरू भऽजायत छै । उमा आ  हुन्कर पति छोट भाई बहिन राम अ शुस्माके सम्झावैत पिताके अन्तिम दाह सँस्कारके काजमे लागि जायत छै ।)

विधाता तोहर विधना अपरम्पार ।
किओ हँसै , ककरो नोरक' धार ।

बचपन बित्लैय टुगर बनिके
कोना सम्झावी अपन मनके
दुनियाँ लागे लागल' अन्हार
विधाता तोहर .....  .....  ......

ककर आशा , ककर भरोसा
के बतौता जिनगीके परिभाषा
विधाता तोहर .....  .......  ........
जिनगीमे केहेन फाँट्लै दरार

जाडा बित्लै खरमास एलै
छप्पर परके खर उडिएलै
दु:खमे जिनगी बन्लै पहाड
विधाता तोहर .....  ......  ......


( मदनलालके श्राद्ध क्रिया कैलाके वाद यमा हुन्कर पति महेश अपन भाईबहिन शालाशालीके लऽके अपन घरे जायत रहैत छैक की बजारमे एकटा चोर एक लड्कीके हाथसँ  झपैटके भागैत छै ततवहीमे उ लड्की चोर चोर कहिकऽ हल्ला करैत छै की रामके नजर पडैत छै आ दौडैत छै । किछदेरमे चोरके पकैडके ओहि लड्किके पर्स वपस दैत छै । ओ लड्की दोसर किओ नहि महेशके चचेरा बहिन दिभ्या रहैत छै । तकरावाद सबकिओ अपन घरे जायत छै । घरमे खाना खाई वखत महेश रामसँ बतिआवैत छै । )

महेशः– राम आब अहाँ कहूँ अहाँके करऽ के विचार य ?
रामः– भिनाजु हम चाहै छी जे हम एकबेर विदेश जेतौ । पढाई सेहो हमर खतम भऽगेलै ।
महेशः– अच्छा ठिक जौ अहाँके विदेश जेबाक इच्छा य त हम काज करैबाला म्यानपावरमे एकटा निक कम्पनिसँ सुपरभाइजरके डिमाण्ड आयल छै । तत्काले हम अहाँके पठा देब । जेबाक लेल तैयार छी की नै ?
रामः– जी भिनाजु हम तैयार छी ।

( एतबहिमे महेशके चचेरा बहिन दिभ्या आबि जायत छै । )

दिभ्याः– भैया , भौजी ।
उमाः– के दिभ्या बुच्ची ?
दिभ्याः– हँ भौजी हम दिभ्या , अहाँ अपन भाईके कत नुकाके रखनें छियै ? हम आई ओकरा छोडब नै ।
उमाः– किए हमर भाईके की कैर लेवै अहाँ ?

( बिचही महेश आ राम पहुँची जायत छै । )

महेशः– दिभ्या बुच्ची कखनी एलही ?
दिभ्याः–  अखन भर्खर । भैया हम चाहै छी रामके अपन शह घुमा दी ।
महेशः–  ठिक छै घुमा लाबु शहर दू दिन त बाँकी छै तकरा बाद राम त विदेश चलिजेतै ।

( मनमनें दिभ्या रामसँ प्रेम कर लागल रहैत छै )

चलू घुमा दैछी हम अपन शहर सजना ।
अहीँ त छी हमर दिलके लभर सजना ।।

मस्त जवानी हमर अहिँले जोगाउनें छी
सजनी बनायब अहाँ आश लगाउनें छी
डालू नै हमरा पर अहाँ नजर सजना
चलू घुमा दैछी हम.......  .........  ........

हमर जवानी पर अहिँके अधिकार य
अहाँ सँ हमरा राजा भगेल प्यार य
सपना अहिँके देखैछी रातिभर सजना
चलू घुमा दैछी हम.......  ..........  ........

महेशः–  राम लिअ तैयारी भऽके चलू एयरपोर्ट ।
रामः– जी भिनाजु हम तैयार होयत छी ।

( राम अपन छोट बहिन शुस्माके दिदी भिनाजुके अहिठाम छोडिकऽ विदेश प्रस्थान करैत छै । )

( चार सालबाद राम विदेशसँ अपन देश वापस आवैत छै । रामके लेवाकलेल सबकियो एयरपोर्टमे रामके बाट निहारिरहल छै आ ततवहिमे रमा आविजायत छै । सबकियो रामके स्वागतके साथ घर लऽजायत छै । दू चार दिन राम अपन दिदी भिनाजु अहिठना रहैत छै तकरावाद घर जेबाक इच्छा दिदी भिनाजुके सुनावैत छै । )

रामः– उमा दिदी ?
उमाः– की बौवा की भेल ?
रामः–  हम चाहैछी जे शुस्माके लऽके आब अपने गाम जाके रहि  अपन खेतबारी अपनेसँ उबजावी ।
उमाः– यी तऽ अहाँ बहुत निक बात केलौं मुदा एकबेर अहाँके भिनाजुसँ पुछ पडत ।

( एतकहिमे महेश आविजायत छै । )

महेशः–   की बतिआरहल छी दुनू भाईबहिन एकआपसमे ?
 उमाः– की बतिएबै  राम कहिरहल छै जे दिदी आब हम गामे रहिक अपन कामकाज करि ।
महेशः–   अरे वाह ! यी तऽ बहुत निक बात छै । की राम अहाँके गामे रहैकऽ विचार य ?
रामः– जी भिनाजु अब हम गामेमऽ रहिकऽ अपन खेतीबारी जोती कोडीकऽ गुजारा करब ।
महेशः–    देखू  बौवा राम मऽ कालमे बाबु जी के हम वचन देनें रहि जे हम अहाँ दुनू भाईबहिनके अपना लगे राखब अहिँसँ हम अहाँसबके जेबाक लेल नहि कहब आ जौ जेवै तऽ अहिँमे हम नराज सेहो नहि हायब किए की अहाँ अपन गाम अपन घरे जारहल छी । अहाँके निर्णयसँ हम सहमत छी ।
रामः– ठिक छै काल्हीके हमर टिकट कटा दिअ गाम जेबाके वादमे आबिकऽ हम शुस्माके लऽजेवै ।
महेशः– अच्छा ठिक छै ।

( दोसर दिन राम बस स्टेशन जायत छै । बसमे चढै छै त देखै छै अपन सिट पाटनर एकटा लड्की रहै छै आ उ पहिले आबिकऽ बैसल रहैत छै । संजोक कहुँ रामके आ ओई लड्कीके ब्याग एके डिजाइन आ एके रंगके रहै छै । राम सेहो अपन सिटपऽ जाके बैस जाइ छै आ गाडी अगाडी बढै छै । बिचमे राम आ ओई लड्कीके बिचमे परिचयपात होइ छै । लड्की पुछैत छै रामसँ । )

लड्कीः– अहाँके नाम की छी ?
रामः– जी ।
लड्कीः– हम पुछली अहाँके नाम की छी ?
रामः– जी हमर नाम राम अछि आ अहाँके ?
लड्कीः– जी हमर नाम जिना अछि । एम्हर कत सँ.. ?
रामः– हम विदेशसँ एलिय आ भिनाजुके अहिठना रहि आब अपन घरे जारहल छी  आ अहाँ कतसँ..?
जिनाः– जी हमहुँ एम्हर नोकरीके शिलशिलामे अन्तरवर्ता  देब आयल छेली ।
( एतबहिमे रामके घरे सामने बस पुगिजायत छै आ राम उतरि जायत छै । )
रामः– लअ जिना हमर गाम आबिगायल आब हम उतरैत छी । वाई..।
जिनाः– वाई वाई । निकसँ जायब ।

हाँस्य ब्यङ्ग

( राम बससँ उतरिके अपन घरे दिस जायत रहैत छै की बिचमे पिन्टु लिलियाके भेटै आवैके बाट जोहिरहल रहैत छै अहि बिचमे रामके नजर पिन्टुपर पडैत छै । )

रामः– पिन्टु भैया छह् !
पिन्टुः– के..?
रामः– हमरा नै चिन्हलह् ?
पिन्टुः– ए राम बौवा ! कह उमा दाइ आ पाहुनके खबर ?
रामः– सबकिओके समाचार ठिक अछि पिन्टु भैया ।
पिन्टुः– विदेशसँ कहिया एलौं , फेर विदेश जेवै की ?
रामः– तीनचार दिन भायल विदेशसँ आयल ! आब हम विदेश नहि जायब गामेमे रहिकऽ  कामकाज करब । लिअ भैया हम जायत छी ।
पिन्टुः– अच्छा जाउ हम वादमे फेर भेटब ।
रामः– जी होयतै भैया ।

( एम्हर पिन्टु मनेमन बतिआबैत रहै छै आइ हम लिलियापर अपन प्यारके वरखा वरखाके छोडबैय तखन आवै त लिलिया । एतबहिमे लिलिया पहुँची जायत छै ।पिन्टु लिलियाके भरि पाजि पकडिके चुम्मा लेबक लेल खोजै छैकि लिलिया अपन हाथसँ छेकी दैत छै । पिन्टु कनें रिसिआके बजै छै । )

पिन्टुः– अहाँ त हरदम लिलिया हमर...... !
लिलियाः– धत पिन्टु खुलेआम किओ देख लायत तब ?
पिन्टुः– तब की करि लिलिया हमरा वर्दास्त नहि भऽरहल य ।
लिलियाः– पिन्टु हइ कनें लारके बोझाहा एकठाम जम्मा कदिअ नें तब हम आ अहाँ प्रेम करबै ।
पिन्टुः– लिअ जल्दी जल्दी ढेरिआबु ।

( ४ चारि पाँचटा बोझाहा की ढेरिआबैत छै की लिलियाके पिता जी घोघन आबि जायत छै आ लिलियाके चाल करैत छै । )

घोघनः– गे लिलिया ..?
पिन्टुः– बाप बाप रे बाप लिलिया लागैय अहाँके पिता जी आबिरहल य । आब कोना करब ?
लिलियाः– पिन्टु अहाँ अहि बोझाहाके दोगमे नुका जाउ ।
घोघनः– गै लिलिया ?
लिलियाः– जी पिता जी । पिन्टु अहाँ जल्दीसँ नुका जाउ अइ लारके ढेरिमे ।
पिन्टुः– अच्छा लिअ हम नुका जायत छी । हे कने अहाँ अपन पिता जीके जल्दी फुसला, सम्झाएके भगाऊ ।
लिलियाः– अच्छा होतै अहाँ नुकाऊ ।
( पिन्टु बोझाके दोगमे नुका जायत छै । )

घोघनः– मर गै बुच्ची अखनतकमे एकोटा कोलाके बोझाह् नै जम्मा केल्ही य ?ले ले तू उठा उठाके लाब हम ढेरिआबैत छिओ ।
लिलियाः– ठिक छै बाबु जी अहाँ घरे जाऊ अराम करऽ  हम ढेरिआ लेवै ।
घोघनः– तू कखनेंसँ अस्गरे ढेरिएबहि ? टेक्टरवाला कहल्कै य जल्दीसँ खेत खाली कऽर आइ हमरा फुर्सद छै तोहर खेत जोति देब । ले ले जल्दी जल्दी आन बोझाह् हम  ढे रिआवै छी ढेरी ।

( लिलिया आब की करत बोझाह् उठा उठाके आनें लागल आ लिलियाके पिता जी पिन्टु नुकायल ठाममे ढेरिआवें लागल । दू चारिटा बोझाह् उपरसँ राखलाकऽ  वाद पिन्टुके दम फरफरावें लागल आ पिन्टु बाप बाप कऽके बोझाह् के दोगसे निकलीके भागल । )

( एम्हर राम घर आबिकऽ अपन ब्याग मानें झोला खोलैत छै त देखर्त छै किछ पढाईके प्रमाण पत्र बाँकी लड्कीके श्रृगारके सामानसब आब तऽ राम चिन्तित भऽयत छै ।ओम्हर जिना भी अपन घर पहुँचैत छै आ हाथमुहँ धोईके मेकअप करबाक लेल अपनझोला खोलैत छै तऽ देखैत छै पैसेपैसा आ एकटा पेपरमे नाम अतापता सहित मोबाइल नं. । फेर जिना ब्याग निहारैत छै आद आवैत छै यी तऽ रामके ब्याग रामके ब्याग बदलिके हमरा लगे आबिगेल । मुदा जिना इमन्दारीके साथ रामके कल करैत छै । )

जिनाः– ट्रिङ्ग...ट्रिङ्ग........
रामः– ककर फोन आबिगेलै एक त हमरा टेन्सन छै । हेल्लो !
जिनाः– हेल्लो ! नमस्कार ।
रामः– नमस्कार । अहाँ के बजैत छी ? हम अहाँके नै चिन्हलौं ।
जिनाः– हमरा नै चिन्हलौं अहाँ , हम जिना बजैत छी । वसके यात्रामे हम अहाँ एकेठाम बैसल छेली । आब चिन्हलौं की नै ?

( रामके आद आवैत छै जे सहिमे हमर ब्याग आ हमरा संग वसमे यात्रा करैबाली लड्कीके ब्याग त एके रंगके छेलै सायद ओकरे संगे हमर ब्याग अदलाबदला भऽगेलै )

रामः– जी जिना जी चिन्हलूँ ।
जिनाः– राम अहाँके टेन्सन लेबाक जरूरी नै य । अहाँके पसिना हमरा लगे सुरक्षित य । अहाँ आबिकऽ अपन पैसा लऽजासकैत छी ।
रामः–अहाँके बहुत बहुत धन्यवाद जिना जी । हम अहाँके यी इमान्दारीके कभियो नहि भुलब ।
जिनाः– देखूँ हम एक इमन्दार  संस्कारी घरके बेटी छी । हमरासब दोसरके सम्पतिपर लोभ नै करैत छियै । हमर विचारे हर इन्सानके एहने करबाक चाही । अच्छा छोडू यी बातसब आ अहाँ कखनी फुर्सद होइय आबिकऽ अपन पैसा लजाऊ । यी हमर पर्सनल मोबाइल नं. अछि आवैतकाल अहिँ नं. मे हमरा एकबेर कल करिलेब तब आयब ।
रामः– अच्छा ठिक छै जिना काल्हीखुन आबिरहल छी ।
जिनाः– ठिक छै अहाँ आउ हमरा अहिठाँ अहाँके स्वागत य । वेस्त तऽ अखनके लेल बाई बाई ।
रामः– धन्यवाद बाई बाई ।

( जिनाके रामक मासुमियत चेहरा , भोलाभाला हर्कत एकदम पसंद लागल आ जिना रामके मनेंमन पसंद करें लागल मानें प्रेम करऽ लागल । दोसर दिन बिहानें राम अपन पैसा लैल जाइकाल जिनाके कहल अनुसार जिनाके फोन करिके जानकारी करेलक । )
रामः– ट्रिङ्ग... ट्रिङ्ग......।
जिनाः– हेल्लो के राम ? अहाँ आबिरहल छी की नै ?
रामः– हँ जिना जी हम आबिरहल छी ओहे खातिर हम अहाँके फोन केलौं ।
जिनाः– अच्छा जल्दीसँ आउ ।

( दलानमे बैसके जिना अपन माय बाबुके रामके बारैमे जे रामद्वारा जानकारी भेटल रहैं ओ सब बतावैत छै आ कहूँ जे रामके तारिफ करैत छै । )

जिनाः– पिता जी राम एक बहुत नेक इन्सान अछी । मुदा ओकरा संग भगवान बहुत नै निक इन्साफ केल्कै ।
शम्भुनाथः– कि भेलै जिना ? कोनो नै निक घटना भेलै की ?
जिनाः– बचपनमे माय साथ छोडि देल्कै , जब अपन पायरपर खडा होबाक बखत भेलै तऽ पिता जी सेहो छोडिकऽ चलि गेलै । तकराबाद छोट बहिनके अपन दिदी भिनाजूके अहिठाम छोडिकऽ विदेश गेलै आ चार सालके बाद गाम एलै अपन देश । यी पैसा विदेशके कमायल पैसा छियै । यी ओकर पसिनाके कमाइ छियै पिता जी ।
कमलावतिः– बहुत दर्दनाक जिवन छै रामके । वास्तवमे भगवान नै निक इन्साफ केल्कै रामके संगमे । मुदा बेटी जिना भगवान एकेबेर निहृदय सेहो नै छै गाछमे पत्तझर भेलाक बाद हरिआली सेहो ।रअवैत छै तहिनति रामके जिवनके पत्तझरके समय बिति गेलै आब ओकर जिवनमे हरिआली एतै ।

( एतबहीमे राम पहुँची जायत छै )

शम्भुनाथः– मर यी लड्का के छियै निर्धक आबिरहल छै ?
जिनाः– एहे त राम अछि पिता जी ।
रामः– नमस्ते जिना ।
जिनाः– नमस्ते । यी हमर पिता जी आ माय अछि ।
रामः– गोर लागै छी काका गोर लागै छी काकी ।
जिनाः– यी हमर छोट्की बहिन रिङ्की अछि । नमस्ते कर ।
रिङ्कीः– नमस्ते ।
रामः– नमस्ते ।
शम्भुनाथः– कोनो झंझट तऽ नै नें भेल बौवा आवैमे ?
रामः– नै कोनो झंझट नहि भेल काका ।  काका काकी यी हमरा दिस सँ छोट सन सनेस ।
शम्भुनाथः– एकर कुन जरूरी बौवा । अच्छा बौवा अहाँके घर कतऽ य ?
रामः– जी काका हमर घर राजविराज अछि ।
शम्भुनाथः– ए अहाँके घर राजविराज अछि । हम सपरिवार करिब चारसाल पहिले तिर्थ कऽके राजेविराज होयत गुजरैत रहि तऽ देख्ने रहि पोखरीके बगलमे दुवारिपर नरियल बाला घरमे एक लड्कीके शादी भऽके विदाई होयत छेलै हमसब किछकाल ओहिठाम रूकल छलि । अहाँके मालुम य ओ घर ? आ हुन्का घरसँ केम्हर य अहाँके घर ?
रामः– जी उहे हमर घर अछि आ ओ दिन हमर सँ बड हमर उमा दिदीके शादी छेल ।
शम्भुनाथः– ओह् हम तऽ बातेबातमे बिसरिए गेलियै बौवा भुखायल हेता । कखन घरसँ निकलऽल । बेटी जिना ?
जिनाः– जी पिता जी ।
शम्भुनाथः– रामके लऽजाके खाना खुवाऊ ।
जिनाः– ठिक छै पिता जी । राम चलु खाना खाइलऽ ।

( जिना रामके दुवारसँ आँगन लऽयत छै खाना खुवाब लेल । राम सर्मावैत अँगनामे प्रवेश करैत छै । जिना खाना परैसके रामके दैछै खाइलऽ आ फेर पुछैत छै रामसँ । )

जिनाः– राम खाना केहेल लागल ? हम पकेनें छी ।

( राम सर्मा जायत छै किछु नहि बजै छै । कलशा झुकाके खाना खायत रहैत छै । )

जिनाः– जुनी सर्माबु अपन घर सम्झीके खाना खाऊ । शादी हायत तऽ हादीकेवाद ससुराल जायब तऽ की अहिनति सर्मावै ?

( जिनाके बतिआवैत बतिआवैतमे रामके खाना खायल भऽजायत छै आ रामके ओकर पैसाके साथ विदाई करैत छै । जिनाके पिता शम्भुनाथ रामके किछदूर अरिआवैल जिनाके संगे जायलेल कहै छै । किछकाल जिनाके संगे बतिआबमे रामके सेहो जिना पसंद लागे लागल । )

शम्भुनाथः– लिअ बौवा अहाँ अपन पैसा आ निकसँ घर जायब ।
रामः–  जी काका होतै ।
शम्भुनाथ जिना किछदुर तहुँ जो संगें ।

( रामके किछदूर अरिआइतके जिना रामके वाइ वाइ कहै छै  आ अपन आँखीसँ कनखी मारी दैत छै । राम सेहो जिनाके आँखीके जवाफ आँखीसँ दऽदैत छै । )

रामः–     अहाँ आँखीसँ चलेलौं कुन वाण की दिल हमर घायल भगेल ।
              अहाँक मोहनी सुरैत देखिक यी दिवाना प्रेममे पागल भगेल ।
जिनाः–  कलिअ अहाँ हमरासँ प्यार की दिल हमर इन्तजार करैय ।
              सम्झिक अपन सजना अहँके दिल हमर सोल्हो श्रृगार करैय ।

रामः–    कुन जादु मन्तर केलौं अहाँ दिल नै अछि हमर काबुमे
             कोना सम्झावी अपन दिलके अहिँ कोनो उपाय बताबुनें
जिनाः– जूनि लिअ कोनो टेन्सन अहाँ सुनू हमर बात यो
              खाउ कसम सजनी बनायब पकडब हमर हाथ यो
             दिलके बाजी हम हारि गेलू अहाँ खेललौं एहन कुन खेल

जिनाः– सपना हमहूँ सजाउनें छेली बनबै हमहूँ दुल्हिनियाँ
             माथमे सेनुर, हाथमे कँगना पायरमे पहिरब पैजनियाँ
रामः–  वादा करै छी हम रानी सातोजनम साथ निभायब
            माथपर माउर सजाके हम अहिँके  दुल्हिनियाँ बनायब
            सम्झूँ हमर इशारा अहाँ यी दिल अहिँक इन्तजार करैय

जिनाः– आइ लभ यू राम ।
रामः– आइ लभ यू टू जिना ।

( राम अपन घर दिस प्रस्थान करैत छै आ जिना वापस अपन घर जायत छै । एम्हर महेशके चचेरा बहिन मानें उमाके चचेरा ससुरके बेटी दिभ्या रामके पसंद करैत रहैत छै आ यी बात महेश उमा सबके मालुम रहैत छै । अहि विषयमे उमा आ महेश निर्णय करैत छै जे दिभ्या आ रामके शादी कऽदी । दिभ्या हरदम अपन भोजाइ उमासँ रामके वारैमे पुछैत रहैत छै । उमा खाना पकावैत रहै छै भन्सा घरमे । तही बखत दिभ्या आबिके उमासँ पुछैत छै । )

दिभ्याः– भौजी ?
उमाः– की कहऽ चाहै छी बाजू ?
दिभ्याः– भौजी अहाँके भाइ राम कहिया आयत आब ?
उमाः–  किए की बात छै से ? कहनें छेलै दू चार दिनमे आयब शुस्माके लैलऽ । देखूँ तऽ कहिया आवैत छै । एकटा बात दिभ्या अहाँ रामसँ प्रेम करैत छी से तऽ हम सबके मालुम अछि । हमसब अहाँके बियाह रामसँ करबाक लेल तैयार छी मुदा राम अहाँसँ प्रेम करै य की नै से बात अहाँ रामसँ पुछलियै य ?
दिभ्याः– से बात तऽहम नै पुछली ।
उमाः– एकर मतलव अहाँ एकतर्फा प्रेम करैत छी रामसँ । अच्छा कोनो बात नै छै शूस्माके लैलऽ राम एबें करतै तखन अहाँ अपन प्रेमक इजहार करिदेब ।

( एतबहीमे उमाके मोबाइलमे फोन आबैत छै । )

ट्रिङ्ग...... ट्रिङ्ग........
उमाः– हेलो ।
रामः– दिदी प्रणाम ।
उमाः– राम बौवा , खुश रहूँ ।
रामः– दिदी हम आबिरहल छी ।
उमाः– हम तऽ अखन अहीँके चर्चा करैत रहि ।
रामः– दिदी हम गाडी चढैत छी आब फोन राखैत छी ।
उमाः– लिअ राखूँ बाई ।
उमाः– दिभ्या राम आबिरहल छै ।
दिभ्याः– साच्चो भौजी ?
उमाः– साच्चो कहैत छी । अखन ओकरे तऽ फोन अयल छेलै ।

( दिभ्या खुशीसँ दौडीके अपन कमरामे जाइके रामके फोटो निकाली हाथमे लऽके फोटोसंग बतिआबें लागैत छै । )

दिभ्याः– राम हम अहाँसँ बहुत प्रेम करैत छी । हम अहाँके छोइरके दोसर ककरो सँगे बियाह नहि करब । राम अहाँके मालुम य ? हम अहाँसँ प्रेम करैत छी से यी बात भैया भौजीके सेहो मालुम भऽगेल छै । अच्छा यी बताबू राम अहाँ हमरासँ प्रेम करैत छी की नै ? भैयाभौजी अहाँ लगे अहाँसँ हमर बियाहके बात राखब से कहनें अछि हमरा । बाँकी हम अहाँसँ अपन प्रेमक इजहार नै केनें छी , इहो काज हम कऽलेब । हमर प्रेमके स्वीकार करबै नें राम ?  हमरा थाह छै अहूँ हमरासँ प्रेम करैत छी । चलू आब एकेबेर प्रेमक इजहार करै बखत भेटब ।

( एतेक बतिआके दिभ्या अपन बिछोनापर निंना जाइ छै । साँझके राम सेहो अपन भिनाजु अहिठाँ पहुँचि जजायत छै । )

रामः– गोर लागै छिअ भिनाजु , गोर लागै अछि दिदी ।
दुनूः– खुश रहूँ , आनन्द रहूँ ।
महेशः– गामके सब समाचार ठिक य नें ?
रामः– सबकिछु ठिक छै भिनाजु ।
महेशः– घर जायत काल बाटमे किछु दिक्कत तऽ नैनें भायल ?
रामः– नै भिनाजु किछु दिक्कत नै भेलै ।
महेशः– राम अहाँसँ एकटा जरूरी बात करबाक छल ।
रामः– कुन विषयमे कहूँ नें ।

( एतबहिमे रामके मोबाइलमे फोन आबैत छै आ राम फोनमे बतिआबें लागै छै । अहि बिचमे राम एलै से खबर सुनिके दिभ्या रामसँ भेटैल आबिरहल रहै छै । रामके फोनमे बतिआबैत देखिके डेरियेहपर रूकिके सुनें लागैत छै फोनपरके बातसब । )

ट्रिङ्ग....... ट्रिङ्ग..........
रामः– हेलो ! के जिना ?
जिनाः– हँ हम जिना छी । राम अहाँ तऽ हमरा अहिठाँसँ जाइते बिसरी गेलियै नें ?
रामः– नैं जिना तेहेन बात नैं छै की घरके काजमे कनें ब्यस्त रहि । अहाँ तऽ हमर जान बनिगेल छी । हम अहाँके कोनाके बिसरि सकब ।
जिनाः– अखन कतऽ छी अहाँ ?
रामः– हम तऽ अखन शुस्मा बुच्चीके लेबाक लेल दिदी अहिठाँ आयल छी ।
जिनाः– अच्छा दिदी भिनाजुके हमरा दिससँ प्रणाम कहिदेब आ बुच्चिके ढेररास प्यार ।

( यी सबटा बात दिभ्या सुनैत रहैत छै । दिभ्या अपनाआपके रोक नै सकै छै आ दिभ्याके आँखीसँ नोरक धार बहे लागै छै । एतबहिमे रामके दिदी उमा पलैटके डेरियाह दिस देखैत छै आ नजै पडै छै दिभ्यापर दिभ्या कानैत रहै छै की दिच्या अपन घरदिस दोडि भागैत छै कानितें । दिभ्याके उमा पिछा करैत दिभ्याके कोठामे जायत छै आ सम्झावैत छै दिभ्याके । )

उमाः– देखूँ दिभ्या बुच्ची एनंग जौं कानवै तऽ होतै । हम रामके सम्झावै , ओकरा मनेवै उ अपनें मनसँ हमरासबके बिना पुछनें कतौ आ कुनो लड्किसँ शादी कऽलेतै । ओना तऽ हम अहाँके पुछनें रहि रामो अहाँसँ प्रेम करै य की अहिँटा ।

( दिभ्या कानैत कहै छै । )

दिभ्याः– अहिँमे हमर गल्ती छै जे हम रामके मनेंमन एकतर्फी प्रेम करैत एली आ हम अपन प्रेमके इजहार नै केली ।
उमाः– चुपु नै काँनु । हम रामके यी सब बात बतेवै ऊ जरूर मानतै ।
दिभ्याः– नै भौजी अहाँके यी ननैदके कसम अहाँ रामके किछू नहिँ कहबै । ओकरा जे लड्की पसंद छै, ऊ जहि लड्कीसँ प्रेम करैत छै रामके ओही लड्किसँ शादी कऽदियौ । दोसर बात भौजी जाबेंतक रामके शादी नै भजेतै ताबतक हम शादीके विषयमे भी नै कोनो बात करब ।
उमाः– अच्छा ठिक छै । आब तऽ चुपु अ अराम करू हम जायत छी ।
दिभ्याः– नै रूकु भौजी हमहूँ जायब अहाँ सँगें ।

( उमा रूकैत छै दुनू ननैद भौजाई सँगे जायत छै अपन मनके मजबुत बनाके दिभ्या रामके सँगे जिस्कें लागैत छै । )

महेशः– राम के छल यो ? बुझाइ छै अहाँ हमरा लेल सरभैजनी खोजलौं । रामके दिदी बुझाइ य राम अहाँलेल भौजाई खोजलक य ।
उमाः– हँ बौवा साच्चो ? ककर बेटी छियै , कतऽ छै घर यो आ की नाम छै ?
रामः– जी दिदी जिनाके पिता जीके नाम शम्भुनाथ अछि आ घर बिराटनगरमे छै ।
उमाः– मतलव हमर भौजाइ बिराटनगरके अछि आ नाम जिना । नाम हमरा बहुत पसंद आयल मुदा देखमे केहेन छै ? ओकर कोनो फोटो ये अहाँ लगे ?
रामः– नै दिदी नै अछि ।
महेशः– कहि तऽ हम जाके देख आबी ।
रामः– नै भिनाजु नै तेहेन समय एतै तऽ हम अपने अहाँके कहिदेब ।
महेशः– लिअ अहाँसब बतिआउ ताबें ।
दिभ्याः– ए राजा हमरा बिना पुछनें दुल्हिन खोजि लेलौं ?
रामः– सब काज अहाँके पुछीके करी की ?
दिभ्याः– तब की बिना हमरा पुछनें कऽलेबै ?
रामः– एकर मतलब सुहाग रात मनाब लेल अहाँके पुछऽ पडतै ?
दिभ्याः– धत बेसरम । ए राजा ओ काज के लेल हमरा सँ पोर्मिसन नै लेब पडत । ओ काज अहाँ डाइरेक्ट शुरू कऽसकै छी ।

(  राम शुस्मा लऽके गाम वापस जायत छै ।)

उमाः– ले बुच्ची निकसँ जइहे ।
शुस्माः– गोर लाग् छी दिदी , गोर लागै छिअऽ भिनाजू ।
महेशः– खुश रहऽ । राम किछु आ कोनो चिजके जरूरि पडतऽ ते हमरा फोन करिअहऽ, बुझलह की नै ?
रामः– जी भिनाजु होतै ।
महेशः– लिअ निक सँ जाऊ ।

हाँस्य ब्यङ्ग

( बिहान १० बजे लिलिया खाना पकावैत रहै छै । लिलियाके पिता जी खेत घुमऽ गायल रहै छै । लिलया घरमे अकेले रहै छै । अहि बिचमे पिन्टु सरासर एम्हर ओम्हर ताकि आबिकऽ भान्सा घरमे जायत छै आ लिलयाके भर पाँज पकडिके चुम्माचाटी करऽ लागैत संगही लभ प्रेमके बात सेहो ऽ गैत छै । अहि बिचमे लिलियाके पिता जी घोघन आबि जायत छै । )

पिन्टुः– हाई लिलू  रानी प्वाऽ... प्वाऽ...चूऽ....चूऽ......।
लिलियाः– के छी के छोडू हमरा ? ए पिन्टु अहाँ । अहाँ तऽ हमर प्राण लऽलेलौं ।
पिन्टुः– ए लिलि एना किए बजै छी ? हम तऽ अहँ सँ प्रेम करै छी । अहाँके प्राण कोनाकऽ लेब हम । अहाँ हमरा सबदिन बड टारैत गेलौं आइ हम नै छोडब ।
लिलियाः– पिन्टु छोडू नऽ । कियो देख लायत तऽ । हम कहै छी छोडू ।
घोघनः– बुच्ची लिलु ?
लिलियाः–जी पिता जी । अहाँके कहैत रहि नें देखूँ पिता जी आबि गेलै ।
पिन्टुः– आब कोना करबै ? अहँके बापके तऽ हम...।
लिलियाः– हमर बापके की ?
पिन्टुः– अहाँके बापके हम गोर लागब । हे कोनो जोगार करू । बुढुवा देख लायत तऽ जुलुम भऽजायत ।
लिलियाः– एनंग करू अहाँ अहिठाँम भित्ताकातमे पेटकुनियाँ पारिके सुतु हम यी गोनैर ओढा दैत छी । बाबु जीके खाना खायत तक बर्दास्त कऽके चुपचाप रहब ।
पिन्टुः– देखूँ भाइसब प्रेमके चक्करमे कीसब करऽ पडैत छै ।
घोघनः– बुच्ची खाना भेलौ ला खाइलऽ बड जोरसँ भुख लागल य हमरा ।
लिलियाः–अच्छा ठिक छै बाबु जी ।
घोघनः– हम भन्से घर आबिरहल छी ।

( लिलियाके पिता जी भन्सा घरके भित्तर जायत छै आ पिन्टुके जे गोनैरसँ झाप्ने रहै छै ओहिपर जाके बैस रहै छै । लिलिया दोसर ठाम बैसैल दैत छै मुदा घोघन नै मानै छै आ पिन्टुके उपरमे बैस रहै छै । )

लिलियाः– हएत बैसु नें पिता जी ।
घोघनः– नै नै ठिक छै अहिठँ लाबु ।
( किछकाल तऽ पिन्टु दम साधल्कै मुदा जब पिन्टुके भारी लाग्लै की फरफराके उठलै  आ लंक लऽके भाग्लै । जहिना पिन्टु फरफराके उठै छै तहिनति छिपा महक खाना घोघनके भैर मुहँ उछैटके परै छै । घोघन पिन्टुके लाठी लऽ गरिआबैत किछ दुर खेदहारैत छै । )

घोघनः– हे रे सार रूक तऽ तोरा आइ हम बापक बियाह देखा दैछियो ।

( राम अपनबहिन शुस्माके कहैत छै । )

रामः– शुस्मा बुच्ची शुस्मा ?
शुस्माः– हँ भैया कथी कहै छह् ?
रामः– हे एनें सुन काल्ही सवेरे खाना उना पकाविहे किए की काल्ही किछु जरूरी काजसँ बिराटनगर जेवाक छै आ तहूँ अपन कपडा साफ कऽलिहिए तोरो संगे जेबाक छौ।
शुस्माः– जी भैया होतै ।

( दोसर दिन सवेरे राम आ शुस्मा दुनू भाईबहिन मोटरसाइकलसँ बिराटनगर जायत छै  किछु सान सपिंग करबाक लेल  । सपिंग करैतकाल सपिंग मलमे रामसँ जिनाके भेट होएत छै । )

जिनाः– राम , अहाँ सपिंग मलमे ?
रामः– हँ हम किए हमरा सपिंग मलमे नै एबाक चाही की ?
जिनाः– नै नै से बात नै छै । हमर कहैक मतलव अहाँ बिराटनगर एलौ आ हमरा जानकारी नै करेलौ ।
रामः– हडबडमे एलू तै जानकारी कराब लेल बिसरि गेलू ।
जिनाः– अच्छा छोडू । यी के अछी  ?
रामः– अनदाज लगाबू तऽ के अछि ।
जिनाः– हमरा अनदाज सँ उ पक्के शुस्मा अछि ।

( यी समय शुस्मा अकेले किछ कपडा पसंद करैत रहै छै । आ अपन भैयाके  बजावै छै ।  एम्हर ओम्हर घुरिके देखै छै त नजर पडै छै फेर अपन भैयाके नजिक जायत छै । )

शुस्माः– भैया यी के अछि ? हमरा विचारस यी पक्का हमर होबवाली भौजी अछि । गोर लागै छी भौजी !
जिनाः– खुश रहूँ ! सपिंग कायल भगेल ?
शुस्माः– भगेलै मात्र हमर कुर्तासलवार लेबाक लेल बाँकी छै । चलूँन अहाँ पसंद कदेवै ।
जिनाः– हमर पसंद कायल अहाँके पसंद हायत ?
शुस्माः– अहाँ जे पसंद कऽदेब से अहाँके ननैदके मंजुर होयत चलू ।

( जिना पसंद कऽदैत छै आ शुस्माके मंजुर भजायत छै । )

रामः– लिअ जिना आब हमरासब घरे जायत छी बहुत बेर भऽगेलै ।
जिनाः– नै आइ अहँ दुनू भाइबहिनके हमरे अहिठाँ मेहमानी रहे पडत । आजु नहि जादेब हम ।

( जिना राम आ ओकर बहिनके अपन अहिठाँ लजायत छै । दुवारपर जिनाके पिता जी शम्भुनाथ बैसल रहै  छै । राम दुनू भाइबहिन जाके गोर लागैत छै । )

राम+शुस्माः– गोर लागै छी काका ।
शम्भुनाथः– खुश रहूँ ! यी बुच्चि के अछि ?
रामः– यी हमरासँ छोट हमर बहिन शुस्मा छियै ।
शम्भुनाथः– बुच्चि रिङ्की पानी लेनें आउ बौवा राम एल्खिन य । बुच्चि अहाँ आँगना जाउ । जिना बेटा शुस्माके संगे लऽजाउ अँगना ।
जिनाः– ठिक छै बाबु जी ।
शम्भुनाथः– अच्छा कहूँ बेटा गामघरके समाचार सब ठिक य नें ?
रामः– जी काका सबकिछु ठिक छै ।

( जिना शुस्माके अँगना लऽजायत छै आ भन्सा घरे जाके दुनू कियो मिलिके चाय बनवैत एकदोसरसँ बतिवैत रहैत छै । अहि बिचमे जिनाके माइ आबिकऽ चोखटपरसँ सबटा बात सुनैत रहै छै । )

जिनाः– शुस्मा उमा दिदी आ भिनाजुके की समाचार य ? सककियो ठिकठाक य नें ?
शुस्माः– हँ भौजी सबकियो ठिकठाक छै । कुसल मंगलमय अछि ।
जिनाः– आउरसब कहूँ आइकल अहाँके भैया की कऽरहल य ?
शुस्माः– किछु नै बस सब पुरानें कामकाज । अँगना सुनासुना लागैत रहै छै अहाँ जेवै तऽ सब पुरा भऽतै ।
जिनाः– हम तऽ जेबाक लेल तैयार छी मुदा अहाँके भैया अहिँ विसयमे किछु धिआने नहि दऽरहल य ।

( अहिबिचमे जिनाके माइ खखास करैत भन्सा घरमे प्रवेश करैत छै । )

कमलावतिः– खँऽ खँऽ । जिना बहुत देरसँ अहाँ दुनू गोटे बतिआरहल छियै की बात छै ?
जिनाः– नै माइ कोनो बात नै अछि । अहिनति हम दुनू गोटे हँसैत बजैत छी ।
कमलावतिः– देखूँ बेटी हम अहाँके माइ छी ।दोसर बात हम अहाँ दुनू गोटेके सबटा बात सुनी चुकल छी अहाँसब की बतिआरहल छलौ से । अहाँ रामके पसंद करैत छी ? किए चुप छी ?

( एतबही जिना चाय लके दुवारप पिता जी आ रामके चाय देबबाक लेल चलि जायत छै )

 कमलावतिः– बुच्चि शुस्मा अहाँके भैया हिन्का पसंद करैत अछि की इहेटा हून्का पसंद करैत छै ?
शुस्माः– नै काकी जतेक जिना भैयाके चाहैत छै ओतबहि भैया सेहो हरदम हिन्के बारैमे बतिआबैत रहैत छै ।
कमलावतिः– मतलव दुनू एकदोसरके पसंद करैत छै । हम अखनें जिनाके पिता जीकऽ अहिँ विसयमे बात करऽ कहै छियै ।
( कमलावति अपन पतिसँ जाके राम आ जिनाके शादीके विषयपर रामसँ बात करऽ लेल कहैत छै । )

कमलावतिः– जिनाके बाबु सुनै छियै ?
शम्भुनाथः– की कहैत छी ?
कमलावतिः– कनें हेएने आबु तऽ ।

( जिनाके पिता जिनाके माइके लगमे जायत छै । )

शम्भुनाथः– कहूँ कि बात छै ?
कमलावतिः–कहलूँ की राम आ जिना एकदोसरके पसंद करैत छै संगे अपनासब रामके निक जेका बुइझ गायल छी तै कहलूँ रामसँ शादीके विषयपर बात चलाबू ओकर की विचार छै ।
शम्भुनाथः–अच्छा ठिक छै हम बात करैत छी ।
शम्भुनाथः– बेटा राम हम अहाँसँ एकटा बात पुछ चाहै छी । अहाँ नकारबै तऽ नैनें ?
रामः– नै काका अहाँ यी केहेन बात करैत छी । अहाँ तऽ हमर पिता समान छी  आ बेटा कहूँ बापके बातके नकारि सकै छै कि ?
शम्भुनाथः– हम यी कहैल चाहै छी जे अहाँ हमर पुरा परिवारके जानिए गेलौ । तै हम चाहै छी अहाँके अपन परिवारके एक सदस्य बना ली ।
रामः– मतलव ? हम बात नै बुझलूँ काका ?
शम्भुनाथः– हमर कहैक मतलव अहाँ आ जिनाके शादी कऽके यी दोस्तीके नातेदारीमे बदैल दी ।
रामः– ठिक छे बाबु जी हम भिनाजुके अहि विषयपर बात करऽ लेल भेज दायब ।
शम्भुनाथः– ठिक छै हम अहाँके भिनाजुके इन्तजारमे रहब ।

(बियाहक विषयपर चर्चा भेल से बात जिनाके थाह नै होयत छै । बिहान भरें राम आ शुस्मा अपन घर जायत छै । दूदिन बाद रामके भिनाजु शादीके बातचित करऽ लेल शम्भुनाथ अहाठाँ जायत छै आ शादी पक्कापक्कि करि लैत छै । )

महेशः– प्रणाम काका ।
शम्भुनाथः– प्रणाम ! हम तऽ अहाँके नै चिन्हलौ ।
महेशः– हम रामके भिनाजु महेश ।
शम्भुनाथः– ए !आब चिन्हलु । बुच्ची रिङ्की पानी लऽके आउ । चलु दलानके भितर वैसके बतिआयब ।
शम्भुनाथः– तब पाहुन अहाँके की विचार य ?
महेशः– देखूँ बाबु जी राम आ जिना एकदोसरके पसंद करैत छै अहिमे विचार करैक कुन बात , लडका लडकी राजी छै तऽ आब कुन बातके देरी । अहाँ शादीके तैयारी करू । हम जाके शादीके लगन पंडितसँ बुझिके अहाँ लगे खबर पठादेब ।
शम्भुनाथः– होतै पाहुन ।
महेशः– तब हम बाबु जी जायत छी ।
शम्भुनाथः– नस्ता तऽ कऽलिअ
महेशः– नै बाबु जी आइ हम कनें जल्दीमे छी । आब तऽ अहि घरमे आबत जाबत आनाजाना लागले रहतै दोसर दिन नस्तापानी करब ।
शम्भुनाथः– अच्छा ठिक छै ।

( महेश शादीके बातचित कऽके वापस जायत छै आ शादीके दिन तय कऽके शम्भुनाथके खबर कऽदैत छै । एम्हर पिन्टु लिलियाके घर होयत जायत रहै छै की लिलियाके नजैर पिन्टुपऽ पडैत छै आ पिन्टुके बजावैत छै । लिलिया भर्खर मुरगाके माउस आ भात खाके उठलें रहै छै । )

हाँस्य ब्यङ्ग

लिलियाः– पिन्टु हे एनें आबु नें ।
पिन्टुः– नै हम नै जायब अखन कोनो दोसर दिन ।

( लिलिया पिन्टुके जवर्दस्ती घिचके अपन घरके भित्तर लऽजायत छै आ भित्ततर सँ बिलैया लगादैत छै । किछकालमे लिलियाके पिता जी घोघन आबि जायत छै आ लिलियाके बजावैत छै । घर खोल जायत छै नै खुलै छै । भित्तरसँ बिलैया लागल रहै छै । लिलियाके पिता जी पडोसिया गुल्टुनके बोलाके आनैत छै आ केवाडी खोलैत छै तऽ देखै छै पिन्टु आ लिलियाके । गुल्टेन लिलियाके पिता जी घोघनके सम्झावैत छै आ लिलिया पिन्टुके मन्दिरमे लऽजाके शादी कऽदैत छै । )

घोघनः– लिलिया गै लिलिया ? कतऽ गेलै यी छौरी घरके झिझिर सेहो खुल्ले छै । रे गुल्टेन बौवा कनें हमरा अहिठा यातऽ बौवा ।
गुल्टेनः– हँ काका आवैत छी हम । की भायल काका की भायल ?
घोघनः– हइ घरके केवाड तोड तऽ । गुल्टेन ठिक छै काका हम तोडैत छी । पिन्टु...... लिलिया ........?
घोघनः– हे भगवान यी हम की देख रहल छी ?
गुल्टेनः– काका हल्ला नै करह् । हल्ला करभ तऽ तोरे बेज्जती हेतऽ  चुपचाप यी दुनू मन्दिरमे लऽजाके शादी करि दहऽ सब झंझट खतम भऽजेतऽ ।
घोघनः–  ठिके कहै छी तू । चल दुनूके बियाह कऽदैछी ।

( घोघन लिलिया आ पिन्टुके मन्दिरमे लऽजाके बियाह कऽदैत छै । एम्हर जिना क्याम्पससँ घर आवैत रहैत छै साथमे दिपक सेहो रहैत छै । अचानक जिनाके चक्कर आवि जायत छै आ बेहोस भऽके गिर पडै छै । दिपक जिनाके एकटा गाडीमे चढाके हँस्पिटल लऽजायत छै । डाक्टर जिनाके चेकजाँच करै छै । वादमे जिना होसमे आवैत छै । डाक्टर जिनाके चेक केलाह रिपोर्ट दिपकके रूमसँ बहार चौखट लग लऽजाके कहैत छै । से बात जिना सेहो सुनि लैत छै । )

डाक्टरः– बौवा दिपक ...?
दिपकः– जी डाक्टर साहाब ।
डाक्टरः– एम्हर आउ ।
दिपकः– जी सर कहूँ ।
डाक्टरः– अहाँ बेमारीके के छी ?
दिपकः– जी हम एकर साथी संगे भाइ सेहो छी डाक्टर साहाब ।
डाक्टरः– देखूँ बौवा दिपक होनीके कियो नहि टारी सकै छै । जिना किछ दिनके मेहमान अछि । जिनाके ब्लड क्यान्सर य । हम किछ दबाइ लिख देनें छी जिनाके खुवायब ।

(डाक्टरके बात सुनिके दिपकके आँइखसँ नोर बह लागै छै मुदा दिपक अपन नोरके पोछिके जिना लग जायत छै । )

जिनाः– दिपक की कहलक डाक्टर ?
दिपकः– किछु नै जिना किछु नै कहल्कै अहाँके किछ दिन अराम करबाक लेल कहलक य । अराम करब तऽ सब ठिक भऽजेतै कहलक ।
जिनाः– दिपक भैया अहाँ हमरा संग झुठ बाजिरहल छी । हम अहाँ आ डाक्टरके सबटा बात सुनि लेलु य हमरा ब्लड क्यान्सर छै ।

( दिपक कानें लागैत छै संगे जिना सेहो कानें लागै छै । )

जिनाः– दिपक भैया अहाँ हमरा बहिन मानैत छी नें ?
दिपकः– हँ बहिन  ( कानैत अवाजमे )
जिनाः– तऽ हमरा वचन दिअ जे यी बात ककरोसँ नै कहबै ? यी बात हमरा  अहाँबिचमे कैद रहतै ।
दिपकः– अच्छा ठिक छै बहिन अहाँके जे विचार ।
जिनाः–एकटा बात आउर भैया अहाँ हमरा साथ देवै ।
दिपकः– हम हरदम अहाँके संग छी बहिन ।
जिनाः– तब ठिक छै भैया अखन चलू घरे ।

( दिपक जिनाके लऽके जिनाके घर जायत छै जिनाके पहुँचावैकऽ लेल ठिक तहि बखत राम सेहो शादीके पहिल निमन्त्रणा कार्ड लऽके अपन ससुरके देब आयल रहै छै । राम जिनाके बजावैत छै मुदा जिना किछु जवाफ नै दैत छै आ घरके भित्तर चलि जायत छै आ अपन समानसब राखिके दिपकके कान्हापर हाथ राखिके बाहार निकली जायत छै । )

रामः– हाइ जिना कतऽ सँ आवै छी ।
जिनाः– हाइ दिपक डारलिङ्ग ।

( रामके किछु नै फुराइ छै । राम कार्ड छोडिके तुरन्त अपन घरे जायत छै । फेर किछुकालमे जिना घुरिके आवैत छै आ देखैत छै कार्ड फेर जाके अपन पितासँ बतिआवैत छै । )

जिनाः– माइ पिता जी ...?
कमलावतिः– की भायल बेटी ?
जिनाः– यी ककर शादीके कार्ड अछि ?
कमलावतिः– मर अहाँके मालुम नै य ? अहाँ आ रामके शादीके कार्ड आउर ककर ।
जिनाः– माइ हमर जिनगीके फैसला हमरा बिनु पुछनेही कऽलेलौ ? हमरो किछ अपन च्वाइस अछि , सपना अछि । हम यी शादी कुनो भी हालतमे नै करब बुझलौं ?
शम्भुनाथः– मर बेटी अहाँ यी की बाजैत छी ? अहाँ  राम एक दोसरके पसंद करैत छी फेर एना किए बाजिरहल छी ?
जिनाः– नै पिता जी रामके हम तेहेन नजरसँ कहियो नें देखली य । रामके हम एकटा बढिया साथीके रूपसँ मात्र देखली य ।

( जिना अपन माइबापसँ मनक बात मनके भित्तरे नुकाके झुठ बाजैत छै आ चुपचाप अपन कोठामे जाके सुति रहैत छै । एकदिन राम किछ समानसब किनबाक लेल बजार जायत छै ओहीदिन जिना अपन बहिन रिङ्की  दिपकके संगे बजार घुम गायल रहै छै । जिनाके नजर रामपर पडि जायत छै । जिना रामके देखके दिपक संगे किछ एहेन हर्कत करे लागै छै जाहीसँ रामके जिनाप्रति नफरत उतपन्न हो ।  राम उ हर्कत देखिलैत छै अ जिनाके नजदिक जायत छै । )

जिनाः– हाई दिपक डारलिङ्ग किछ करू नें ।

(जिना दिपकके किस करैकऽ नाटक करै छै की रामके नजर पडै छै  ।  राम जिना लगे जयत छै । )

रामः–  जिना ?
जिनाः–  के बिचमे डिस्टप करऽ चलिआयल दिपक देखूँ तऽ के अछि ?
दिपकः– के छहि रे तू ? कबावमे हड्डी बने एले य ।
जिनाः–  ए राम । दिपक यी राम छियै । कहुँ राम की हाल य ? विचारा परेसान बुझाइ छै ।
रामः–  जिना अहाँ यी की कऽरहल छी । हमरा संगे जिबे मरैके किरिया खाके अखन हमरा सामनेमे दोसरके संग ......!
जिनाः– हम त अहाँ संग. अपन मन बहलावैके लेल किरिया खेलू रहें  अहाँ तकरा सिरियस लऽलेलौ ? यी एक्किसो शताब्दी छियै राम । अहाँ कुन दुनियाँमे अटकल छियै । सच्चमे हम अहाँस नै दिपकसँ प्रेम करै छियै आ शादी सेहो हम दिपकके संगे करबै एकटा बात आउर राम अहाँ हमर पाँछा छोडू । हमरासँ शादी करैके सपना देखैल छोडू ।
रामः–  वाह ! जिना वाह ! कतेक आसानस कहि देलौ । ठिक छै अहाँ एहें नें सम्झलौं जे राम दिपकके जेका पढल लिखल नै छै  आ अहाँ जेका पढल लिखल लड्की हमरा नै भेटतै मुदा हम अहाँसँ वादा करै छी तोकल लगनमे अहाँस निक पढल लिखल  सुन्दर लड्कीसंगे शादी करिके देखायब ।
जिनाः–  जाउ जाउ हमहूँ देखै छी जे अहाँसंग शादी करऽ लेल कुन लड्की राजी होइय ?

( वादमे राम कानें लागैत छै  रिङ्की देखके रामके लगमे आविके कहै छै । )

रिङ्कीः–  भिनाजु अहाँ नै कानू हमसब दिदीके सम्झावै छी ।

( तकरावाद राम अपन घर आ जिना सबकियो अपन घर जायत छै । जिना घर पहुँचतेअपन रूममे जाके काँनें लागैत छै । जिनाके काँनैत जिनाके छोटकी बहिन रिङ्की देख लैत छै । रिङ्कीके शंका भऽजायत छै जे किछ गडबड छै कहिके । एम्हर राम रिससँ जिनाके पिता जीके फोन कऽके शादी केन्सिल करादैत छै । )

ट्रिङ्ग.......ट्रिङ्ग.......
शम्भुनाथः–  हेल्लौ के राम बौवा !

( राम काँनैत स्वरमे बोलैत छै । )

रामः–  बाबु जी प्रणाम ! बाबु जी ......?
शम्भुनाथः–  हँ बौवा हम सुनिरहल छी ।
रामः– बाबु जी यी शादी आब नै हुव सकत । किए नहि हुव सकतै से गप त अहाँके मालुमे हायत ।
शम्भुनाथः–  हम की करि । केतबो सम्झावै छी जिना हमरासबके को बाते नही सुनुरहल छै ।
रामः– अहाँके कोनो दोष नै अछि बाबु जी । हम अहाँके सदिखन अपन पिताके रूपमे देखव । हमरा लेल अहाँ दरणिय छेलौं , अछि आ रहब ।

( एतेक बाजिके राम फोन काटिदैत छै  आ अपन दिदी भिनाजुके फोन लगावैत छै । रामके दिदी उमा फोनउठावैत छै उमाके संगमे हून्कर ननैद दिभ्या सेहो रहैत छै आ फोनके सबटा बात ओहो सुनैत छै । )

ट्रिङ्ग.......ट्रिङ्ग.......
उमाः–  हेल्लौ ! राम बौवा कहुँ की समाचार य ?

( राम कानैत स्वरमे बजैत छै )

रामः–  दिदी सब बात बिगैर गायल । हम जिनाके संगमे शादी नै करब । कोनो दोसर लड्की देखूँ जेहनें लड्की भेटत तेहनें लड्कीसँ हम शादी करऽ लेल  तैयार छी ।
उमाः–  पहिले बात त बताउ भायल की ?
रामः–  दिदी हमर ददिल टुइट गेल । जिना हमरासँग धोखेवाजके खेल खेलल्कै । ओ कियो दोसरके सँग प्रेम करै छै हमरासँ नै । हमरा सँगे अपन मन बहलावैत छलै ।
उमाः–  अच्छा ठिक छै अहाँ नै काँनू हम अहाँके भिनाजूसँ बात करब ।
उमाः–  दिभ्या बुच्ची अहाँके की विचार य ?
दिभ्याः–  भौजी हम हरदम तैयार छी मुदा हमा बुझाइ य अखन रामके लगे जेबाक चाही । अहाँ अस्वीकार तऽ  नैनें करबै ?
उमाः–  नै नै हम किए अस्वीकार करब । अहँके जे विचार ।

( दिभ्या रामके अहिठाँ जायत छै ।राम दुवारपऽ मन उदास कऽके बैसल रहै छै तहि समय पहुँचि जायत छै ।)
दिभ्याः–  राम...!
रामः– के..?  दिभ्या ।
दिभ्याः–  हँ हम दिभ्या मुदा अहाँ एना मुहँ लटकाके किए बैसल छी ? बात की छै ?
रामः–  नै तेहन किछू नै छै । सब ठिक छै । अहिनति बैसल छी ।
दिभ्याः–  हम नै मानब जरूर किछु बात छै । लड्का लोग तऽ शादीके नामसँ खुशी होयत छै मुदा अहाँके तऽ शादी होबवाला य तऽ उदास किए छियै ?
रामः–  दिभ्या यी बियाह आब कान्सिल भऽगेल किए की जिना हमरासँ नै दोसर आउर ककरोसँ प्रेम करै छै । मुदा हम ओकरा केतबो बिसरैल चाहै छी  मुदा भुल नै सकिरहल छी ।
दिभ्याः– देखूँ राम जे भेलै ओकरा भुइल जाऊ आ आब आगुके सोचु । शादीके निमन्त्रण आ दिन जे तैय कऽचुकल छी ।
रामः–  हमरा तऽ किछु नै सुझिरहल छै दिभ्या की करी कोनाके करी । एहि समयमे के अपन बेटीके हमरासँ शादी करऽ लेल तैयार होतै ।
दिभ्याः–  हम अहाँसँग शादी करऽ लेल तैयार छी । हम बनव अहाँके दुल्हिन । मुदा हम अहाँके चेहराप मुस्कुराहट देख चाहै छी ।

( एतैक बात सुनिके राम हँस लागैत छै । )

रामः–  लिय दिभ्या आब भित्तर चलु ।
( राम आ दिभ्या दुवारपरस उठिके घरके भित्तर जायत छै । एम्हर जिना अपन घरमे अपन सुतैवाला कोठामे रामके तस्वीर हाथमे लऽके आँखीमे नोरक धार बहावैत तस्वीरसँग बतिआवैत रहै छै । यी दृष्य जिनाके छोट्की बहिन रिङ्की देख लैत छै । )

जिनाः– राम हमरा अहाँ माफ करि दायब । ओना तऽ हम माफीके लायक नै छी । हम अहाँके वचन दऽके वचन पुरा नहि केलौ किएकी हम अहाँके जिनगीमे अन्हरिया बैनके  प्रवैश नै करऽ सकब । हम अपन जिनगीसँ हारि गेलु राम । हमर सपनासबमे आँगी लागी गेल छै राम । हम अपन आँगी लागल सपनासँ अहाँके जिनगी वर्वाद होयत देख नै सकब राम । भलेही हमर दुल्हिन बनैक सपना अधुरा रहि जाइ । अहाँ हमरा हमर दिलमे बैसके किए तडपावैत छी  राम ? अहाँ दोसरके सँग शादी कलू राम । हमर दिलसँ निकली जाउ राम ।

( एतेक बतिआबैत जिना अपन बिछौनापर निंना जायत छै । यी दृष्य देखिकऽ रिङ्कीके मनमे उत्सुकता जागि जायत छै आखिर बात की छै दिदी रामके प्रेम करै छै मुदा ओकर सामने दोसरके सँग प्रेमके नाटक करै छै । रिङ्की यी बात पता लगावके लेल दिपमसँ भेटैय लेल जायत छै । )

रिङ्कीः– प्रणाम दिपक भैया ।
दिपकः– खुश रहूँ । की काजसँ एलौ रिङ्की ? सबकिछु ठिकठाक अछि नें ?
रिङ्कीः– अखनतक तऽ सबकिछु लगभग ठिके अछि । अहाँसँ एकटा जरूरी काज पडिगेलै तै एलौ भैया ।
दिपकः– एहन हमरासँ कुन काज पडिगेल बताबु नें ।
रिङ्कीः– यदि अहाँ हमरा अपन बहिन मानैत छी तऽ पहिले हमर किरिया खाउ जे हम पुछव से अहाँ सचसच बतायब ।
दिपकः– अहाँके किरिया कहुँ नऽ की पुछ चाहै छी हम झुठ नै बाजव ।
रिङ्कीः– आइ हो दिपक भैया जिना दिदी ओइदिन रामके सोझामे अहाँसँग प्रेमके नाटक केलक आ घर जाके केबाड बन्द कऽके रामेक नाम पुकारी पुकारी काँनैत रहै छै । अकेलेमे हरदम ओकरे नाम जपैत रहैत छै । आखिर बात की छै दिपक भैया ? अहाँसँ जिना दिदीके बेसी हेमछेम यऽ । अहाँके तऽ पता हायत ।
दिपकः– देखु बहिन हम अहाँके वचन दऽदेलु य तऽ सुनु  । जहि दिन अहाँ अहिठाँम राम शादीके निमन्त्रण कार्ड देबऽ आयल छल ओही दिन हम आ जिना क्लेजसँ घर आवैत छेलु तहि बखत रस्तामे जिना अचानक बेहोस भऽगेल । तकरवाद हम जिनाके हँस्पिटल लऽजाके चेकजाँच करेलू तऽ डाक्टर रिपोर्ट बतेलक जे जिनाके ब्लड क्यान्सर छै आ यी बात जिना सेहो सुनि लेलक । जिना हमरासँ वचनबद्ध करा लेलक जे यी बात ककरो नै कहब ।

( ब्लड क्यान्सरके नाम सुनिके रिङ्की फुइट फुइटके काँनें लागै छै । रिङ्कीके आँइखसँ नोरक माहासागर बहऽ लागै छै ।  )

दिपकः– जिनाके दिलमे अखनो रामेकऽ बास छै । जिना रामके खुशीके लेल यीसब केलक । जिना रामके जिनगीमे जाके ओकर जिनगीके मरूभुमी बनाव नै चाहै यऽ । ताहीसँ जिना रामके सोझामे हमरासँग् प्रेमक नाटक केलक ताकी रामके जिनाप्रति नफरत उतपन्न हुवें । आ शादी करैसँ इन्कार कऽदेलक । रिङ्की बहिन जिना बहिन मात्र किछ दिनके मेहमान य । जिनाके खुशी राखैक कोशिस करू । भगवान जिनाके सँगमे बहुत नै निक इन्साफ केलक बहिन ।
रिङ्कीः– अच्छा ठिक छै भैया हम अखन घर जाइ छी ।
दिपकः– ठिक छै जाऊ ।

( रिङ्की घरमे जाके ब्लड क्यान्सर बाला बात माय बाबु जीके बता दैत छै । तकरावाद जिनाके सबकिओ हरदम खुश राखैक कोशिस करैत छै । किछ देरवाद रामके फोन आवैत छै जिनाके बाबु जीके मोबाइलमे । )

ट्रिङ्ग ..... ट्रिङ्ग ....
शम्भुनाथः– हेल्लौ !
रामः– गोर लागै छी बाबु जी ।
शम्भुनाथः– खुश रहूँ बौवा । सबकिछु कुसल मंगल य नें ?
रामः– हँ बाबु जी सब ठिक छै । बाबु जी अहाँ हमर शादीमे आयब की नै ? अहाँ सब परिवारके आब पडत ।
शमभुनाथः– जी बेटा हमसब आबैक कोशिस करब ।
रामः– कोशिस नै आबै पडत बाबु जी ।
शम्भुनाथः–अच्छा ठिक छै ।

( फोन काटिदैत छै । जिना अपन पिता जीसँ पुछत छै जे ककर फोन छेल । )

जिनाः– ककर फोन छल पिता जी ?
शम्भुनाथः– राम बौवाके ।
जिनाः– की कहैत छल ?
शम्भुनाथः–कहैत छलै सँपरिवारके हमर शादीमे आब पडत ।

( एतेक बात सुनिके जिनाके एकदिस खुशी होयत छै जे राम परिवारिक जिवनमे प्रवेश करहल छै त दोसर दिस दुःख होयत छै जे रामके दुल्हिन बन नै सकली । रामके फोटो हातमे लके जिना .......। )

गीत

कोना भुलाबी हम अहाँके, भुईल नै हम सकै छी ।
अपन जिनगी हम अहाँसंग जी नही सकै छी ।

हमर दुवा य अहाँ लेल , हरदम खुश रहब ।
हमरा सच्चा प्रेमके , दिलमे साजाके राखब ।
साथ नैछी त' की भेल, शादी मुबारक कहै छी ।
अपन जिनगी हम.....  ......  .....  ......  ......  ।

प्रेमक वर्षा हो सबदिन, अहाँके जीवनमे ।
फूलक' खुश्बू गम्केए, अहाँके घर आँगनमे ।
अहाँ हरदम हँसैत रहब, हम दिलस' कहै छी ।
अपन जिनगी हम.....  ......  .....  ......  ......  ।

( जिना सँपरिवार रामके बियाहमे जेबाक लेल तैयार होयत छै । जिना सेहो साडी लगाके दुलहिन जेका सजिधजिके तैयार होयत छै आ सब परिवार रामके अहिठाम जेबाक लेल प्रस्थान होयत छै । किछू समय यात्रा केलाकबाद जिना सबकियो रामके अहिठाम पहुँचै छै । )

रामः– बाबु जी गोर लागै छी ।
शम्भुनाथः– खुश रहूँ ।
रामः– बाबु जी सबकियो तैयार छै चलू मन्दिर ।

( राम आ दिभ्याके दुल्हा दरल्हिन बनल देखिक जिनाके फेर चक्कर आबि जायत छै आ मुहसँ खुनके उल्टी कर लागै छै सबमे हहाकर मचिजायत छै । शादीमे कन्नारोहत शुरू भजायत छै । राम जिनाके हँस्पिटल लजायत छै । हँस्पिटलमे डाक्टर जिनाके चेकजाँच करैत छै । राम डाक्टरसँ रिपोर्ट पुछैत छै । )

रामः– की भेलै बाबु जी जिनाके ? डाक्टर साहब की भेल छै जिनाके ?
डाक्टरः– देखूँ हिन्का अइसँ पहिनो एहेन किछू भायल छलै कहियो ?

( रामके सँगमे रिङ्की सेहो रहै छै रिङ्की कहै छै । )

रिङ्कीः– हँ डाक्टर अंकल एकबेर भायल छलै । डाक्टर तब तऽ अहाँके सबकिछु थाह हायत । आब यी मरिच अन्तिम अवस्थामे य ।
रामः– की भेलै डाक्टर साहब ।  ( घबराल )
डाक्टरः– देखूँ राम बौवा हिन्का ब्लड क्यान्सर अछि आ यी अन्तिम अवस्थामे पुगिचुकल य । आब एकरा बचैक कोनो उपाय नै य । आब एकेटा भगवानपर भरोसा करू । ओकर की मर्जी य ।

( एम्हर अस्पतालक बिछोनापर जिना खुनक उलटी करैत रामके पुकारिरहल छै । यी सुनिके दिभ्या रामके बोलाव लेल जायत छै । अहि बखत जिनाके लगमे  जिनाके पिता जी रहै छै । जिना अपन पितासँ बतिआवैत छै । जिनाके माइबाबु जिनाके अवस्था देखके काँनैत रहै छै । )

जिनाः– पिता जी माइ अहाँसब किय काँनैत छी । हमर सपना नै पुरा भेलै अहिस काँनैत छी । जूनि काँनु दिभ्याके देखू पिता जी अहाँके यी जिना बेटी नजर आयत । रामके घर पठा दियो नैत ओकर शादीके लगनके समय बित जेतै । माय हम रामसँ किय शादी करैलेल इन्कार केलू थाह् य किय की हम रामके जिवनमे शुखी रहे से कामना करैत छी ओकर जिवनके दुःख देब नै चाहैत छी हम । राम बचपनेसँ दुःखसँ गुजरल छै । ताहिसँ राम हमरासँ नफरत करे कहिक हम दिपकके संग झुठा प्रेमक नाटक केली ।

( यी सबटा बात राम आ दिभ्या सेहो सुनैत रहै छै । जिनाके यी त्याग सुनिके राम आ जिना दुनूके आँइखसँ नोर झहरे लागैत छै या राम दोडीके जिनाके लगमे जायत छै ।)

रामः– जिना अहाँ यी की केलौ ?
जिनाः– राम अहाँ किय काँनैत छी । अहाँके त अखन शादी करैल जेबाक चाही । शादीके लगनक समय बितल जारहल य । दिभ्या रामके खुश राखब । हिन्का कभियो दुःखके अनुभुति नै हुवै इहे हमर अहाँसँ बिन्ती य ।
दिभ्याः–नै दिदी अहाँके किछु नै हायत ।
रामः– सँगे जिबै मरैके किरिया खाँके अखन हमरा बिरान अपनासँ अलग सम्झी लेलौ । हमरासँ यी बात छुपाके राख्लौ ? की सोचलौ जे यी बात जनीके राम हमरासँ नफरत करता ? जिना हमरा खातिर अहाँ एतेक बडका त्याग केलौ । हम अहाँसँ आउर बेसी प्रेम कर लगली जिना ।
जिनाः– धन्यवाद राम जे अहाँ हमरासँ एतेक प्रेम करै छी । आइ हम बहुत खुश छी । सबकियोके प्रेम सिनेह अपन संग लऽके जारहल छी । वस दुःख एकटा बातके छै जे हमर सपना पुरा नै भेलै ।

( एतेक बाजीके जिना काँने लागैत छै आ फेरसँ खुनके उल्टी शुरू भऽयत छै । दिभ्या अपन संगसे सेनुर निकालीके रामसँ कहैत छै । )

दिभ्याः–राम समय बहुत कम छै । शादीके लगनके समय निक्लैसँ पहिने जिना दिदीके सुहागन बना दियो देरि जूनि करू आ दिदीके घर लऽके चलू ।

( राम दिभ्याके हाथसँ सेनुर लऽके जिनाके माँग भरिदैत छै । फैर जिना कहैत छै । )

जिनाः–आब हमरा ककरो किछु सिकायत नै य । माइ पिता जी अहाँसब किए काँनैत छी ? बहिन रिङ्की अहाँ किए काँनैत छी ? देखूँ हम कतेक खुश छियै । आब तऽ हम दुल्हिन बनि गेलियै आ आब हमरा पिया अपन घर लऽजेतै । हम दुल्हिन बनिके अपन पियाके घर जारहल छी । हमर सपना पुरा भऽगेलै । अहाँसब हमरासँ खुश नै छी की ? आब तऽ हमरा हँसिके विदा करू ।
शम्भुनाथः– नै बेटी हमसब अहाँसँ बहुत खुश छी ।
जिनाः– दिभ्या हमरा लगमे आउ बहिन ।

 ( जिना अपन माथसँ सेनुर लऽके दिभ्याके माँगमे लगा दैत छै । तकरा वाद राम सबकियो मिलके जिनाके गाडीमे लऽके घर लजायत  छै । गाडीमे जिनाके बगलमे सिरानी लगे एक कातमे राम आ एक कातमे दिभ्या बैसल रहै छै । जिना राम आ दिभ्याके हाथ एक दोसरके हाथमे दऽके बिच रस्ता अपन प्राण तियागी दैत छै । सबके सबमे बन्नारोहट शूरू भऽजायत छै । अन्तमे जिनाके मृत्य शरिरके राम अपन घरे लजाके दाह सँस्कार करै छै  । )

लेखक :– प्रयास प्रेमी मैथिल

समाप्त ।
हमहुँ जायब पिया घर बनिकऽ दुल्हिन
------------------------------------------------
मदनलाल
सकुन्तला देवी
उमा
महेश
राम  ( ओम नारायण )
दिभ्या
शुस्मा
शम्भुनाथ
कमलावति
जिना ( अप्सरा )
रिङकी
घोघन
लिलिया
पिन्टु
फेकू

                  (  उमा, राम आउर दिभ्याके हुन्कर सबके पिता जी माने अपन पति मदनलालके आश्रयमे छोडिके अपना प्रलोक चलिजाएत छै । तबसँ मदनलाल अस्गरे मिहिनेत मजदुरी कऽके अपन दू बेटी आ एक बेटाके निक जेका सँ प्रतिपालन करैत छै । एकदिन मदनलालके जेष्ठ बेटी उमा बियाहक जोग भऽजायत छै आ उमाके निक जेकासँ मैथिली परम्परा अनुसार शादी कऽके विदाई करैत छै । ¬¬)

"बापके दुलारी, सिया सुकुमारी, आजु होयत छै विदाई ।
बुढ माई बापके, करेजा कानैं, नयना नोर बहाई ।।

समदाउन
********* 
पिता :- हँसि खुशि जाऊ धिया, पियाके नगरियाँ, पियाके नगरियाँ ।
            अमर रहत सेनुर तोहर ।
कोरस:- अमर रहत सेनुर तोहर ।

पिता :- बेटी धन पराई होई छै , अहाँ यी मानू ,अहाँ यी मानू ।
            नै अहाँ बहाबू नोर ।
कोरस:- अमर रहत सेनुर तोहर ।

पिता :- दुनियाँके रित बेटी, बिधिके यी बिधना, बिधिके यी बिधना ।
            अहूँ करु एकरा स्वीकार ।
कोरस:- अमर रहत सेनुर तोहर  ।

बेटी :- दियौ आशिष भैया, अपन बहिन के, अपन बहिन के ।
           जूनि हबियो अहाँ उदास ।
कोरस:-अमर रहत सेनुर तोहर ।

बेटी :- करिएहे सेवा बाबाके, छोट्की बहिनिया, छोट्की बहिनिया ।
           बचा रखिएहे घरक शृगांर ।
कोरस:-अमर रहत सेनुर तोहर ।

( मदनलालके बेटी उमाके विदाईके दृष्य तिर्थ यात्रा करिकेअपन पुरा परिवारके साथ घर जारहल शम्भुनाथ, कमलावति  जिना आ रिङकी देख लागै छै । जिना अपन पिता जीसँ पुछैत छै । )

जिनाः– पिता जी ?
शम्भुनाथः– की बेटी ?
जिनाः–पिता जी हँऊ देखूँ त' ऊ लडकी कनियाँ बनल कतेक  सुन्दर लागिरहल छै । मुदा पिता जी ऊ लडकी किए कानिरहल छै ?
शम्भुनाथः– बेटी जिना ओकर शादी भऽरहल अछि आ  ऊ अखन दुल्हिनके पहिरनमे छै आ दुल्हिनके पहिरन बहुत सुन्दर होएत छै । अहूँ एकदिन दुल्हिन बनव आ अहिनति काँनव आ हमरासबके छोडिके चलिजायब अपन पियाके घर । यी संसारके रित अछि बेटी । हरेक बेटीके एकदिन अपन बापके घर छोडिके अपन सासुर जाई पडैत छै ।
जिनाः– पिता जी हमरो अहाँ अहिनति दुल्हिन बनाके विदा करब की नै ?किए की पिता जी हमर सपना अछि जे हमहूँ दुल्हिन बनिके अपन पिता जीके घरसँ  विदाई हबी ।
शम्भुनाथः– अवश्य बेटी हम अहाँके जरूर दुल्हिन बनाके विदाई करब । अपन बेटीके दुल्हिन बनाके विदाई करैसँ वेसी खुशीके पल आउर किछो नहि होएत छै एकटा बापके लेल । ड्राईभर गाडी आँगू बढाबू ।

( शम्भुनाथ सँपरिवार अपन घरके दिस जाएत अछि आ उमा विदाई भऽके अपन ससुराल चलिजायत छै । )

हाँस्य ब्यङ्ग

( पिन्टु , बाट जोहैत रहै छै लिलियाके आवैकऽ आ अहि बिचमे फेकु आबिजायत छै आ पिन्टुसँ पुछैत छै । )
फेकुः– हे हो पिन्टु भैया ककर बाट  निहारिरहल छहऽ ? अहिठना चौबटियामे वैसके ।
( पिन्टु किछु तमसाएके जवाफ दैत छै ।)
पिन्टुः– रै छोरा तू अपन काजसे मतलव राख , हम ककरो बाट तकैत छियै ओहिसँ तोरा कुन मतलव ?
फेकुः– हमरा सब मालुम छै भैया तू अहिठना बैसके लिलियाके आवैकऽ बाट जोहिरहल छहऽ ।
पिन्टुः– जब तोरा सब किछु मालुम छो तऽ फेर पुछै छहि किए ?

( एतबहिमे लिलिया जेहेन कपडा लगवैत छलै सेम ओहिने कपडा लगाके एकटा दोसर लड्की आवैत रहै छै आ पिन्टुके नजैर ओहि लड्कीपर पडैत छै आ फेकूके कहैत छै । )

पिन्टुः– हेवे देखहि फेकू तोहर भौजी हमर लिलि रानी आविरहल छौ । आई हम आँईख मुइनके जाइ छियै आ एक मिठगर चुम्मा लेवै ।
फेकुः– साचो भैया ?
फेकुः– तब तोरासँ हम की मजाक करिरहल छियो ?
फेकुः– तब देर कुन बातके ? आँईख मुइनके जा आ लऽलिअ हमर भोजीके गालमे चुम्मा ।

( पिन्टु आँईख मुइनके जायत छै लिलिया सम्झिके ओहि लड्की चुम्मा लैल आ जहिनति लड्कीके आँईख मुइनके पाजामे पकडै छै ओहिनति उ लड्की पिन्टुके अपन दुनू हाथसँ ठेलके जोरदार तमचा गालपर मारै छै की पिन्टु गिर पडैत छै आ लड्की गरियावैत अपन रस्ता चलिजायत छै ।)

लड्कीः– साला अबारा कुत्ता कहिका ।
फेकुः– पिन्टु भैया चुम्मा केहेन लागलऽ , नुनगर छेलऽ की चहटगर ?
पिन्टुः– रे सार रूक तऽ तू ।

( पिन्टु फेकूके मारऽ दोडै छै आ फेकू भागिजायत छै )

( एक सप्ताह वाद )

मदनलालः– बौवा  राम ?
रामः–  जी बाबू जी ।
मदनलालः– अहाँ आजुकल क्लेज किए नहि जारहल छी ?हम देखरहल छी अहाँ हरदम घरक काम काजमे लागल रहैत छी किए ?
रामः–  बाबु जी उमा दिदीके ससुराल गैलाक वाद अहाँके अकेले काज करैत देखिकहमरा क्लेज जाईके मन नै होयत छै आ अहाँ अकेले कतेग दिन काज करैत रहब ?
मदनलालः– देख बेटा काज कोना करबै यी तोरा सोचैके विषय नहि छियो । कुन काज कोनाके करबै , की करऽ पडतै की नहि करऽ पडतै यी हम करबै तू दुनू भाई बहिन पढऽ जो । अखन दू क्लास पढिलिखि लेबें तऽ तोरे आउरके हकमे निक रहतो । उमा दिदी पढलकौं तऽ देखही तऽ अखनी कतेक काज दऽरहल छै पढाई ।
रामः–  ठिक छै बाबु जी अहाँ जेहे कहब हम ओहे करबै । हम काल्ही सँ क्लेज जायब ।

(६ महिना वाद एकदिन अचानक रामके बाबु जी मदनलाल बेहोस भऽजायत छै । से देखिकऽ मदनलालके छोट्की बेटी शुस्मा चिच्याई उठै छै आ शुस्माके चिच्याहट सुनिकऽ राम दोडिकऽ अवैत छै ।)¬

शुस्माः– भैया ऽ..ऽ...
रामः–  की भेलै शुस्मा ?
शुस्माः–  देखुँ नें भैया बाबु जिके कि नें की भऽगेलै । बाजबो नहिकरैत छै ।
रामः–  की भेल बाबु जी की भेल । (  सब गोटेंए काँन लागैत छै । )

( राम बाबु जीके तुरनत हाँस्पीटल लजायतछै । संगही अपन दिदी भिनाजुके जानकारी करावैत छै । हुन्कर दिदी भिनाजु जहिनें खबर सुनैत छै तहिनें दुनू प्राणी अपन पिता जी के देऽख लेल चलि दैत छै । एम्हर रामके पिता जी होसमे तऽ आवैत छै मुदा डाक्टर जवाफ दऽदेनें छै जे अहाँके पिता जी कखिन्तो संसार छोडि सकैत य । एम्हर उमा आ हुन्कर पति अपन ससुरके देखै लऽ हतरपतर कके आविरहल छै की बिचेंमे करिकबा बिलाई बाट काटि दैत छै । तहियो ओसब आवै छै आ भेटै छै अपन पिता जीसँ । ¬¬)

उमा महेशः– यी की भगेल पिता जी ( कानैंत )
मदनलालः– देख बेटी हमर बात सुन, पाहुन अहुँक कहैत छी । अब हमर बाँचैंके कम उमिद य हमरा जेबाक प्रहर आबिगेल य ,से हम अहाँ दुनू गोटेंक उपरकिछ जिम्मेवारी सोप चाहै छी..
उमा महेशः– नै बाबु जी अहाँके किछ नहि होतै । की कहऽ चाहै छी बाबु जी कहूँ ।
मदनलालः– पाहुन वचन दिअ जे हमरा मरलाक वाद राम आ शुस्माके निक जेका सँ देखब अपन छोट भाई बहिन जेकाँ ।
उमा महेशः– जी बाबु जी हमसब राम आ शुस्माके अपन सहोदर भाई बहिन जेकाँ अपन लगमे राखब ।

(एतबेंमे मदनलाल यी संसार छोडिकऽ प्रलोकके चलि जायत छै । समुच्चा परिवारमे कन्नारोहट शुरू भऽजायत छै । उमा आ  हुन्कर पति छोट भाई बहिन राम अ शुस्माके सम्झावैत पिताके अन्तिम दाह सँस्कारके काजमे लागि जायत छै ।)

विधाता तोहर विधना अपरम्पार ।
किओ हँसै , ककरो नोरक' धार ।

बचपन बित्लैय टुगर बनिके
कोना सम्झावी अपन मनके
दुनियाँ लागे लागल' अन्हार
विधाता तोहर .....  .....  ......

ककर आशा , ककर भरोसा
के बतौता जिनगीके परिभाषा
विधाता तोहर .....  .......  ........ 
जिनगीमे केहेन फाँट्लै दरार

जाडा बित्लै खरमास एलै
छप्पर परके खर उडिएलै
दु:खमे जिनगी बन्लै पहाड
विधाता तोहर .....  ......  ......

क्रमश: 

प्रयास प्रेमी मैथिल

( मदनलालके श्राद्ध क्रिया कैलाके वाद यमा हुन्कर पति महेश अपन भाईबहिन शालाशालीके लऽके अपन घरे जायत रहैत छैक की बजारमे एकटा चोर एक लड्कीके हाथसँ  झपैटके भागैत छै ततवहीमे उ लड्की चोर चोर कहिकऽ हल्ला करैत छै की रामके नजर पडैत छै आ दौडैत छै । किछदेरमे चोरके पकैडके ओहि लड्किके पर्स वपस दैत छै । ओ लड्की दोसर किओ नहि महेशके चचेरा बहिन दिभ्या रहैत छै । तकरावाद सबकिओ अपन घरे जायत छै । घरमे खाना खाई वखत महेश रामसँ बतिआवैत छै । )

महेशः– राम आब अहाँ कहूँ अहाँके करऽ के विचार य ?
रामः– भिनाजु हम चाहै छी जे हम एकबेर विदेश जेतौ । पढाई सेहो हमर खतम भऽगेलै ।
महेशः– अच्छा ठिक जौ अहाँके विदेश जेबाक इच्छा य त हम काज करैबाला म्यानपावरमे एकटा निक कम्पनिसँ सुपरभाइजरके डिमाण्ड आयल छै । तत्काले हम अहाँके पठा देब । जेबाक लेल तैयार छी की नै ?
रामः– जी भिनाजु हम तैयार छी ।

( एतबहिमे महेशके चचेरा बहिन दिभ्या आबि जायत छै । )

दिभ्याः– भैया , भौजी ।
उमाः– के दिभ्या बुच्ची ?
दिभ्याः– हँ भौजी हम दिभ्या , अहाँ अपन भाईके कत नुकाके रखनें छियै ? हम आई ओकरा छोडब नै ।
उमाः– किए हमर भाईके की कैर लेवै अहाँ ?

( बिचही महेश आ राम पहुँची जायत छै । )

महेशः– दिभ्या बुच्ची कखनी एलही ?
दिभ्याः–  अखन भर्खर । भैया हम चाहै छी रामके अपन शह घुमा दी ।
महेशः–  ठिक छै घुमा लाबु शहर दू दिन त बाँकी छै तकरा बाद राम त विदेश चलिजेतै ।

( मनमनें दिभ्या रामसँ प्रेम कर लागल रहैत छै )

चलू घुमा दैछी हम अपन शहर सजना ।
अहीँ त छी हमर दिलके लभर सजना ।।

मस्त जवानी हमर अहिँले जोगाउनें छी 
सजनी बनायब अहाँ आश लगाउनें छी
डालू नै हमरा पर अहाँ नजर सजना
चलू घुमा दैछी हम.......  .........  ........

हमर जवानी पर अहिँके अधिकार य
अहाँ सँ हमरा राजा भगेल प्यार य
सपना अहिँके देखैछी रातिभर सजना 
चलू घुमा दैछी हम.......  ..........  ........

महेशः–  राम लिअ तैयारी भऽके चलू एयरपोर्ट ।
रामः– जी भिनाजु हम तैयार होयत छी ।

( राम अपन छोट बहिन शुस्माके दिदी भिनाजुके अहिठाम छोडिकऽ विदेश प्रस्थान करैत छै । )

( चार सालबाद राम विदेशसँ अपन देश वापस आवैत छै । रामके लेवाकलेल सबकियो एयरपोर्टमे रामके बाट निहारिरहल छै आ ततवहिमे रमा आविजायत छै । सबकियो रामके स्वागतके साथ घर लऽजायत छै । दू चार दिन राम अपन दिदी भिनाजु अहिठना रहैत छै तकरावाद घर जेबाक इच्छा दिदी भिनाजुके सुनावैत छै । )

रामः– उमा दिदी ?
उमाः– की बौवा की भेल ?
रामः–  हम चाहैछी जे शुस्माके लऽके आब अपने गाम जाके रहि  अपन खेतबारी अपनेसँ उबजावी ।
उमाः– यी तऽ अहाँ बहुत निक बात केलौं मुदा एकबेर अहाँके भिनाजुसँ पुछ पडत ।

( एतकहिमे महेश आविजायत छै । )

महेशः–   की बतिआरहल छी दुनू भाईबहिन एकआपसमे ?
 उमाः– की बतिएबै  राम कहिरहल छै जे दिदी आब हम गामे रहिक अपन कामकाज करि ।
महेशः–   अरे वाह ! यी तऽ बहुत निक बात छै । की राम अहाँके गामे रहैकऽ विचार य ?
रामः– जी भिनाजु अब हम गामेमऽ रहिकऽ अपन खेतीबारी जोती कोडीकऽ गुजारा करब ।
महेशः–    देखू  बौवा राम मऽ कालमे बाबु जी के हम वचन देनें रहि जे हम अहाँ दुनू भाईबहिनके अपना लगे राखब अहिँसँ हम अहाँसबके जेबाक लेल नहि कहब आ जौ जेवै तऽ अहिँमे हम नराज सेहो नहि हायब किए की अहाँ अपन गाम अपन घरे जारहल छी । अहाँके निर्णयसँ हम सहमत छी ।
रामः– ठिक छै काल्हीके हमर टिकट कटा दिअ गाम जेबाके वादमे आबिकऽ हम शुस्माके लऽजेवै ।
महेशः– अच्छा ठिक छै ।

( दोसर दिन राम बस स्टेशन जायत छै । बसमे चढै छै त देखै छै अपन सिट पाटनर एकटा लड्की रहै छै आ उ पहिले आबिकऽ बैसल रहैत छै । संजोक कहुँ रामके आ ओई लड्कीके ब्याग एके डिजाइन आ एके रंगके रहै छै । राम सेहो अपन सिटपऽ जाके बैस जाइ छै आ गाडी अगाडी बढै छै । बिचमे राम आ ओई लड्कीके बिचमे परिचयपात होइ छै । लड्की पुछैत छै रामसँ । )

लड्कीः– अहाँके नाम की छी ?
रामः– जी ।
लड्कीः– हम पुछली अहाँके नाम की छी ?
रामः– जी हमर नाम राम अछि आ अहाँके ?
लड्कीः– जी हमर नाम जिना अछि । एम्हर कत सँ.. ?
रामः– हम विदेशसँ एलिय आ भिनाजुके अहिठना रहि आब अपन घरे जारहल छी  आ अहाँ कतसँ..?
जिनाः– जी हमहुँ एम्हर नोकरीके शिलशिलामे अन्तरवर्ता  देब आयल छेली ।

( एतबहिमे रामके घरे सामने बस पुगिजायत छै आ राम उतरि जायत छै । )

रामः– लअ जिना हमर गाम आबिगायल आब हम उतरैत छी । वाई..।
जिनाः– वाई वाई । निकसँ जायब ।

( राम बससँ उतरिके अपन घरे दिस जायत रहैत छै की बिचमे पिन्टु लिलियाके भेटै आवैके बाट जोहिरहल रहैत छै अहि बिचमे रामके नजर पिन्टुपर पडैत छै । )

रामः– पिन्टु भैया छह् !
पिन्टुः– के..?
रामः– हमरा नै चिन्हलह् ?
पिन्टुः– ए राम बौवा ! कह उमा दाइ आ पाहुनके खबर ?
रामः– सबकिओके समाचार ठिक अछि पिन्टु भैया ।
पिन्टुः– विदेशसँ कहिया एलौं , फेर विदेश जेवै की ?
रामः– तीनचार दिन भायल विदेशसँ आयल ! आब हम विदेश नहि जायब गामेमे रहिकऽ  कामकाज करब । लिअ भैया हम जायत छी ।
पिन्टुः– अच्छा जाउ हम वादमे फेर भेटब ।
रामः– जी होयतै भैया ।

( एम्हर पिन्टु मनेमन बतिआबैत रहै छै आइ हम लिलियापर अपन प्यारके वरखा वरखाके छोडबैय तखन आवै त लिलिया । एतबहिमे लिलिया पहुँची जायत छै ।पिन्टु लिलियाके भरि पाजि पकडिके चुम्मा लेबक लेल खोजै छैकि लिलिया अपन हाथसँ छेकी दैत छै । पिन्टु कनें रिसिआके बजै छै । )

पिन्टुः– अहाँ त हरदम लिलिया हमर...... !
लिलियाः– धत पिन्टु खुलेआम किओ देख लायत तब ?
पिन्टुः– तब की करि लिलिया हमरा वर्दास्त नहि भऽरहल य ।
लिलियाः– पिन्टु हइ कनें लारके बोझाहा एकठाम जम्मा कदिअ नें तब हम आ अहाँ प्रेम करबै ।
पिन्टुः– लिअ जल्दी जल्दी ढेरिआबु ।

( ४ चारि पाँचटा बोझाहा की ढेरिआबैत छै की लिलियाके पिता जी घोघन आबि जायत छै आ लिलियाके चाल करैत छै । )

घोघनः– गे लिलिया ..?
पिन्टुः– बाप बाप रे बाप लिलिया लागैय अहाँके पिता जी आबिरहल य । आब कोना करब ?
लिलियाः– पिन्टु अहाँ अहि बोझाहाके दोगमे नुका जाउ ।
घोघनः– गै लिलिया ?
लिलियाः– जी पिता जी । पिन्टु अहाँ जल्दीसँ नुका जाउ अइ लारके ढेरिमे ।
पिन्टुः– अच्छा लिअ हम नुका जायत छी । हे कने अहाँ अपन पिता जीके जल्दी फुसला, सम्झाएके भगाऊ ।
लिलियाः– अच्छा होतै अहाँ नुकाऊ । 

( पिन्टु बोझाके दोगमे नुका जायत छै । )

घोघनः– मर गै बुच्ची अखनतकमे एकोटा कोलाके बोझाह् नै जम्मा केल्ही य ?ले ले तू उठा उठाके लाब हम ढेरिआबैत छिओ ।
लिलियाः– ठिक छै बाबु जी अहाँ घरे जाऊ अराम करऽ  हम ढेरिआ लेवै ।
घोघनः– तू कखनेंसँ अस्गरे ढेरिएबहि ? टेक्टरवाला कहल्कै य जल्दीसँ खेत खाली कऽर आइ हमरा फुर्सद छै तोहर खेत जोति देब । ले ले जल्दी जल्दी आन बोझाह् हम रिआवै छी ढेरी ।

( लिलिया आब की करत बोझाह् उठा उठाके आनें लागल आ लिलियाके पिता जी पिन्टु नुकायल ठाममे ढेरिआवें लागल । दू चारिटा बोझाह् उपरसँ राखलाकऽ  वाद पिन्टुके दम फरफरावें लागल आ पिन्टु बाप बाप कऽके बोझाह् के दोगसे निकलीके भागल । )

( एम्हर राम घर आबिकऽ अपन ब्याग मानें झोला खोलैत छै त देखर्त छै किछ पढाईके प्रमाण पत्र बाँकी लड्कीके श्रृगारके सामानसब आब तऽ राम चिन्तित भऽयत छै ।ओम्हर जिना भी अपन घर पहुँचैत छै आ हाथमुहँ धोईके मेकअप करबाक लेल अपनझोला खोलैत छै तऽ देखैत छै पैसेपैसा आ एकटा पेपरमे नाम अतापता सहित मोबाइल नं. । फेर जिना ब्याग निहारैत छै आद आवैत छै यी तऽ रामके ब्याग रामके ब्याग बदलिके हमरा लगे आबिगेल । मुदा जिना इमन्दारीके साथ रामके कल करैत छै । )

जिनाः– ट्रिङ्ग...ट्रिङ्ग........
रामः– ककर फोन आबिगेलै एक त हमरा टेन्सन छै । हेल्लो !
जिनाः– हेल्लो ! नमस्कार ।
रामः– नमस्कार । अहाँ के बजैत छी ? हम अहाँके नै चिन्हलौं ।
जिनाः– हमरा नै चिन्हलौं अहाँ , हम जिना बजैत छी । वसके यात्रामे हम अहाँ एकेठाम बैसल छेली । आब चिन्हलौं की नै ?

( रामके आद आवैत छै जे सहिमे हमर ब्याग आ हमरा संग वसमे यात्रा करैबाली लड्कीके ब्याग त एके रंगके छेलै सायद ओकरे संगे हमर ब्याग अदलाबदला भऽगेलै )

रामः– जी जिना जी चिन्हलूँ । 
जिनाः– राम अहाँके टेन्सन लेबाक जरूरी नै य । अहाँके पसिना हमरा लगे सुरक्षित य । अहाँ आबिकऽ अपन पैसा लऽजासकैत छी ।
रामः–अहाँके बहुत बहुत धन्यवाद जिना जी । हम अहाँके यी इमान्दारीके कभियो नहि भुलब ।
जिनाः– देखूँ हम एक इमन्दार  संस्कारी घरके बेटी छी । हमरासब दोसरके सम्पतिपर लोभ नै करैत छियै । हमर विचारे हर इन्सानके एहने करबाक चाही । अच्छा छोडू यी बातसब आ अहाँ कखनी फुर्सद होइय आबिकऽ अपन पैसा लजाऊ । यी हमर पर्सनल मोबाइल नं. अछि आवैतकाल अहिँ नं. मे हमरा एकबेर कल करिलेब तब आयब ।
रामः– अच्छा ठिक छै जिना काल्हीखुन आबिरहल छी ।
जिनाः– ठिक छै अहाँ आउ हमरा अहिठाँ अहाँके स्वागत य । वेस्त तऽ अखनके लेल बाई बाई ।
रामः– धन्यवाद बाई बाई । 

( जिनाके रामक मासुमियत चेहरा , भोलाभाला हर्कत एकदम पसंद लागल आ जिना रामके मनेंमन पसंद करें लागल मानें प्रेम करऽ लागल । दोसर दिन बिहानें राम अपन पैसा लैल जाइकाल जिनाके कहल अनुसार जिनाके फोन करिके जानकारी करेलक । )

रामः– ट्रिङ्ग... ट्रिङ्ग......।
जिनाः– हेल्लो के राम ? अहाँ आबिरहल छी की नै ?
रामः– हँ जिना जी हम आबिरहल छी ओहे खातिर हम अहाँके फोन केलौं ।
जिनाः– अच्छा जल्दीसँ आउ ।

( दलानमे बैसके जिना अपन माय बाबुके रामके बारैमे जे रामद्वारा जानकारी भेटल रहैं ओ सब बतावैत छै आ कहूँ जे रामके तारिफ करैत छै । )

जिनाः– पिता जी राम एक बहुत नेक इन्सान अछी । मुदा ओकरा संग भगवान बहुत नै निक इन्साफ केल्कै ।
शम्भुनाथः– कि भेलै जिना ? कोनो नै निक घटना भेलै की ?
जिनाः– बचपनमे माय साथ छोडि देल्कै , जब अपन पायरपर खडा होबाक बखत भेलै तऽ पिता जी सेहो छोडिकऽ चलि गेलै । तकराबाद छोट बहिनके अपन दिदी भिनाजूके अहिठाम छोडिकऽ विदेश गेलै आ चार सालके बाद गाम एलै अपन देश । यी पैसा विदेशके कमायल पैसा छियै । यी ओकर पसिनाके कमाइ छियै पिता जी ।
कमलावतिः– बहुत दर्दनाक जिवन छै रामके । वास्तवमे भगवान नै निक इन्साफ केल्कै रामके संगमे । मुदा बेटी जिना भगवान एकेबेर निहृदय सेहो नै छै गाछमे पत्तझर भेलाक बाद हरिआली सेहो ।रअवैत छै तहिनति रामके जिवनके पत्तझरके समय बिति गेलै आब ओकर जिवनमे हरिआली एतै ।

( एतबहीमे राम पहुँची जायत छै )

शम्भुनाथः– मर यी लड्का के छियै निर्धक आबिरहल छै ?
जिनाः– एहे त राम अछि पिता जी ।
रामः– नमस्ते जिना ।
जिनाः– नमस्ते । यी हमर पिता जी आ माय अछि ।
रामः– गोर लागै छी काका गोर लागै छी काकी ।
जिनाः– यी हमर छोट्की बहिन रिङ्की अछि । नमस्ते कर ।
रिङ्कीः– नमस्ते ।
रामः– नमस्ते ।
शम्भुनाथः– कोनो झंझट तऽ नै नें भेल बौवा आवैमे ?
रामः– नै कोनो झंझट नहि भेल काका ।  काका काकी यी हमरा दिस सँ छोट सन सनेस ।
शम्भुनाथः– एकर कुन जरूरी बौवा । अच्छा बौवा अहाँके घर कतऽ य ?
रामः– जी काका हमर घर राजविराज अछि ।
शम्भुनाथः– ए अहाँके घर राजविराज अछि । हम सपरिवार करिब चारसाल पहिले तिर्थ कऽके राजेविराज होयत गुजरैत रहि तऽ देख्ने रहि पोखरीके बगलमे दुवारिपर नरियल बाला घरमे एक लड्कीके शादी भऽके विदाई होयत छेलै हमसब किछकाल ओहिठाम रूकल छलि । अहाँके मालुम य ओ घर ? आ हुन्का घरसँ केम्हर य अहाँके घर ?
रामः– जी उहे हमर घर अछि आ ओ दिन हमर सँ बड हमर उमा दिदीके शादी छेल ।
शम्भुनाथः– ओह् हम तऽ बातेबातमे बिसरिए गेलियै बौवा भुखायल हेता । कखन घरसँ निकलऽल । बेटी जिना ?
जिनाः– जी पिता जी ।
शम्भुनाथः– रामके लऽजाके खाना खुवाऊ ।
जिनाः– ठिक छै पिता जी । राम चलु खाना खाइलऽ ।

( जिना रामके दुवारसँ आँगन लऽयत छै खाना खुवाब लेल । राम सर्मावैत अँगनामे प्रवेश करैत छै । जिना खाना परैसके रामके दैछै खाइलऽ आ फेर पुछैत छै रामसँ । )

जिनाः– राम खाना केहेल लागल ? हम पकेनें छी ।

( राम सर्मा जायत छै किछु नहि बजै छै । कलशा झुकाके खाना खायत रहैत छै । )

जिनाः– जुनी सर्माबु अपन घर सम्झीके खाना खाऊ । शादी हायत तऽ हादीकेवाद ससुराल जायब तऽ की अहिनति सर्मावै ?

( जिनाके बतिआवैत बतिआवैतमे रामके खाना खायल भऽजायत छै आ रामके ओकर पैसाके साथ विदाई करैत छै । जिनाके पिता शम्भुनाथ रामके किछदूर अरिआवैल जिनाके संगे जायलेल कहै छै । किछकाल जिनाके संगे बतिआबमे रामके सेहो जिना पसंद लागे लागल । )

शम्भुनाथः– लिअ बौवा अहाँ अपन पैसा आ निकसँ घर जायब ।
रामः–  जी काका होतै । 
शम्भुनाथ जिना किछदुर तहुँ जो संगें ।

( रामके किछदूर अरिआइतके जिना रामके वाइ वाइ कहै छै  आ अपन आँखीसँ कनखी मारी दैत छै । राम सेहो जिनाके आँखीके जवाफ आँखीसँ दऽदैत छै । )

रामः–     अहाँ आँखीसँ चलेलौं कुन वाण की दिल हमर घायल भगेल ।
              अहाँक मोहनी सुरैत देखिक यी दिवाना प्रेममे पागल भगेल ।
जिनाः–  कलिअ अहाँ हमरासँ प्यार की दिल हमर इन्तजार करैय ।
              सम्झिक अपन सजना अहँके दिल हमर सोल्हो श्रृगार करैय ।

रामः–    कुन जादु मन्तर केलौं अहाँ दिल नै अछि हमर काबुमे ।
             कोना सम्झावी अपन दिलके अहिँ कोनो उपाय बताबुनें ।
जिनाः– जूनि लिअ कोनो टेन्सन अहाँ सुनू हमर बात यो ।
             खाउ कसम सजनी बनायब पकडब हमर हाथ यो ।
             दिलके बाजी हम हारि गेलू अहाँ खेललौं एहन कुन खेल ।

जिनाः– सपना हमहूँ सजाउनें छेली बनबै हमहूँ दुल्हिनियाँ ।
             माथमे सेनुर, हाथमे कँगना पायरमे पहिरब पैजनियाँ ।
रामः–  वादा करै छी हम रानी सातोजनम साथ निभायब ।
            माथपर माउर सजाके हम अहिँके  दुल्हिनियाँ बनायब ।
            सम्झूँ हमर इशारा अहाँ यी दिल अहिँक इन्तजार करैय ।

                                                         क्रमश:
                                      प्रयास प्रेमी मैथिल

गामक चलाक गोनुझाँ


   गोनुझाँके गाममे एकदिन सरकार नव योजना ल'के आयल आ गामक सबकियोके बजेलक । सरकारी योजना यी छल जे सरकार गामके हरेक घरमे एकठा ढेनुवाँ महिस आ एकटा बिलाइ देबाक योजना छेलै मुदा किछ सर्त सेहो छेल । सर्त यी छेल जे सबकियो महिस दुहिके बिलाइके पिवैल देबाक आ बाँकी बचल दुध अपन परिवारमे प्रयोग करैल । गामक सबलोग सर्त मंजुर करैत महिस आ बिलाइ ल'के अपन अपन घर गायल । गोनुझाँ सेहो एकटा महिस आ बिलाइ ल'के घर गेल । घर गेलाक बाद गोनुझाँ सोचैत छै हम खैटखैटके महिसके खिआपिआके दुध दुइहके बिलाइके पिआदेवै त हमरा की फाइदा होतै । गोनुझाँ एकटा उपाय निकाल'लक आ पहिलुक दिन महिसके खिआपिआके दुध दुहिके निक जेकासँ दुधके ओटलक आ बिलाइके पकडिके ओटलाह गरम दुधमे बिलाइके मूहँ डुबादेलक की बिलाइके मूहँ गायल झरैक बिलाइ छरपटाइत भागल । दोसर दिनसँ गोनुझाँ बिलाइके काँचो दुध दैत छेल त बिलाइ देखिएके भाइग जायत रहै । गामक बाँकी लोग महिस दुहिके बिलाइके काँचे दुध दैतछल आ सबहक बिलाइ मोटाके गोहि जेकाँ भ'गेल । एमहर गोनुझाँके बिलाइ दिनेदिन दुबरायल जायत रहै आ गोनुझाँ दुनू प्रानी मोटायल जाइतछेल । गामके कियो ब्यक्ति गोनुझाँके सिकायत सरकार सँ क'देलक जे गोनुझाँ बिलाइके दुध पिअ नै दैय से । किछ दिनबाद सरकारी कर्मचारी आयल चेक करै लेल । देखैय ते साँचे गोनुझाँके बिलाइ दुबरा गेल छलै बाँकी सबहक मोटाएल रहै । सरकारी कर्मचारी गोनुझाँ सँ पुछलक अहाँके बिलाइ किए दुबराएल ? गोनुझाँ कहलक साहब हम त सबदिन दुध दुहिके बिलाइके पिअ दैछी मुदा बिलाइ दुध देखिएके भागि जाइय ब अहिँ कहूँ हम की करि ? अगर अहाँके विश्वास नै होयत य त हम अहाँके सामनेंमे महिस दुहैत छी  आ बिलाइके दैछी । गोनुझाँ सरकारी कर्मचारीके सामनेंमे महिस दुहीके बिलाइके पिआबैल गायल की बिलाइ दुध देखिते मातर लंक ल'के भागल आ सरकारी कर्मचारी देखिते रहिगेल ।गोनुझाँ कहलक देखलियै साहब अहाँ अपन आँखीसँ । बादमे सरकारी कर्मचारी वापस चलिगायल ।

                                                                                                              प्रयस प्रेमी मैथिल
"जन्म दैतअ छि माँ बापक रम तँ अपनेही"
             (अन्तिम भाग -१८) 

मेनुका :- अहाँ दुनू गोटाके नाम की अछि बाबु ?

बृद्धबृद्धा :- हमर निम कर्मलाल आ हमर पत्नीके नाम सुस्मा अछि । 

( मेनुका जैहनति नाम सुनैत छैथ तहिनति हुन्का आँखि सँ नोरक' समुन्द्र बह लागै छैथ आ अप्पन मातापिताके भरि पाँज पकरिके  कान लागै छथि । कर्मलाल  अपना दुनूगोटाके भरिपाँज पकरिके कानैत देखिके मेनुका सँ पछै छैथ । )

कर्मलाल :- बौवा अहाँ के छी ? किये हमरा दुनूंगोटाके नाम सुनीके कांन लागलौं ?

मेनुका :- पिता जी हमरा नै पहिचानलौं अहाँसब ?

कर्मलाल :- नै , नाम कहब तब नें चिन्हब जे अहाँ के छी ?

मेनुका :- हम अहाँके छोट्की बेटी मेनुका छी पिता जी मेनुका ।

( एतेक बात सुनि कँ कर्मलाल मेनुकाके मूह निहारैत रहिगेल जेनाकी ओकर बोल बन्द भ'गेल । किछ बोल नै सकिरहल आ मेनुका काँनैत पुछैत रहल । )

मेनुका :- यी की हालत बना लेलौं पिता जी ?  की चिजके कमी भेल अहाँलोकिनकें जे आइ दोसरकें दुवार दुवार पर जाँके भिख मांगे लागलौं ? 

कर्मलाल :- बेटी , यी सब हमर कर्मके फल अइछ । अहाँ सही कहनें छेलौं जन्म दैत अछि माँ बाप करम तँ अपनेही सेहें भेल बेटी । अहाँके अइ राज सँ निकाललाँके वाद अहाँके दाइसबके शादी भेलाके वाद अपना महलमे उडीबिडी लागिगेल बेटी । सब राजपाट बिकागेल किछ नें रहल बाँकी । यी सब हमरा हमर करमके फल मिलिरहल छैक बेटी । हम अहाँके संगमे बहुत बड्का अन्याय केलूं बेटी । तेकरें सजाय आइ हम भोगैत छी बेटी ।

मेनुका :- नै पिता जी एना नैं बाजूं ।  यी सब विधिके विधान अछि । जे विधाता छठिके राति लिखि दैत छैक ओ हर प्राणीके भोगहीटा परै छै मुदा मानवके अप्पन करम करसें पाँछा नैं हटबाक चाही। माँबाप अप्पन बेटाबेटीके जन्म दैत छथि संगे पढालिखाँ दैत छैक मुदा ओ बेटाबेटीके करममे शुख चायन लिखल नै अछि तँ ओ बेटाबेटी अनैतिक काजमें संलग्न भ'के नैतिक करम करs सँ चुकी जायत रहै छैथ जेकर नतिजा जिनगीभर भोग पडै छैथ ।चलूं पिता जी आब घर जाएत छी ।

( ओहीठाम सँ मेनुका अप्पन मातापिताके ल'के  संगे सबगोटा अप्पन राज आवै छथि आ फेर स' खुशीके जीवन बितावें लागैं अछि ।)

जन्म दैत अछि माँ बाप करम तँ अपनेही
लेखक :-
प्रयास प्रेमी मैथिल

      #समाप्त#

पात्र परिचय :-

(१) कर्मलाल सिंह ठाकुर:-(राजा'क')
(२) सुस्मा:- (रानी 'क')
(३) दिक्षा :-(राजाके बेटी जेठ्की)
(४) दिभ्या:- (राजाके बेटी मैझली)
(५) प्रिति:- (राजाके बेटी सैझली)
(६) मेनुका:- (राजाके बेटी छ़ोट्की)
(७) बैजु :-(मंत्री 'क')
(८) भोला:- (नवधिया 'अपाहिज')
(९) बढिया माइ
(१०) धर्मपाल सिंह:- (राजा 'ख')
(११) सुमैना :-(राजकुमारी)
(१२) जीतुराम (मंत्री 'ख')
(१३) अन्तरा:- (मलिनियां)
(१४) गर्जन :-(राक्षस)
(१५) लाँल कनियाँ :-(राक्षसके बेटी)
(१६) हात्ती
(१७) हाँस बिहुस :-(हात्तीके बेटी)
(१८) अमर :-(नव युवराज मेनुकाके बेटा

रचनाकानर ; प्रयास प्रेमी मैथिल

 

"जन्म दैत अछि माँ बाप करम तँ अपनेही"
         ( भाग - १७ )

( बरात बिदाई भ'के चलि जाइ छथि । ओम्हर लाँल कनियाँ नवधिया "भोला" आ सुमैनाके आवैके बाट निहारै छथि । सुमैनाके आविरहल खबर सुनी कँs मेनुकाके गर्भके दरद उठि जायत अछि । )

सोहर :-

एक त' पिया मोरा भोला दोसर सुमैना बियाहे गेला !
ललना रे तेसरमे गर्भके दरदिया बड सतावेला रे-२ !!

लाँल पियाके बाट तकै दुवार में -२
हाँस बिहुस छै कोहबर सजावै में -२
ललना रे दरदके मारे हमरा किछ नें फुराई  अछि रे-२ !

सुमैना बियाह पिया दुवार एल -२
सब सखी सुमैनाके परिछें गेल -२
ललना रे सुमैनाके राखिते पायर बोवा जन्म लेल्कै रे-२ !

लाँल खुशी झुमी कs नाँचs लाग्लै-२
देखिते सचमैना बौवाके गोदी लेल्कै-२
ललना रे हँसितें हाँस बिहुस भरी आंगन फूलेफूल भेलैं रे-२!

( सुमैनाके राखितें अंगनामे पायर मेनुकाके कोगख सँs नव राज कुमारके जन्म होएत छैथ । जेकर नमाकरन करैत अछि "अमर" । अमरकें जन्म सँ पुरा राज खुशी अछि । दिनचरिया कटैके क्रममें एकदिन मेनुकाके मनमें अप्पन मातापिताके देखएकें लेल जेबाके बिचार पैदा होएत छै मुदा यी बात केकरा कहति जें हम माँ बापकें देख जायब आ चुपचाप मन मारिके बैसल रहै अछि । मेनुकाके मन मारिके बैसल देखि कँs सुमैना पुछै छैथ मेनुका सँs ।)

सुमैना:  दिदी की भेलैन जें एना मन उदास कँsकें बैसल छथि ।

मेनुका:  नै किछ ओहिनती बैसल छी ।

सुमैना:  नै दिदी जरूर किछ बात अछि जे अहाँ हमरा सँ छिपारहल छी । कहूँ की बात अछि दिदी जें अहाँ एना मन मारिके बैसल छी ?

मेनुका:  बात किछो नै अछि सुमैना बस माँ बाबुके याद आबि गेल । देखके मन करै छै ।

सुमैना:  एतबेंटा बातमें दिदी एतेक उदास चलूं काल्हिखुन सबगोटा जबैं माँ बाबु जीके देखकें लेल ।

( दोसर दिन बिहान सवेरें नवधिया संग सब गोटा चलि दैत अछि मेनुकाके नहिहर माँ बापके देखकें लेल । जब मेनुका नहिहर पहुचै छथि तँ ओहि राजके किओ नैं पहिचानै छथि मेनुकाकें ।ओहीठाम देखै छथि कत्तौ नें अप्पन मातापिताके घर नजर आवैत अछि । ततबेंमे एक नवयुवक आवै छथि आ ओकरा सँ सुमैना पुछै छैथ ।)

सुमैना:  हे हौ भैय्या हेंएनें सुन तँ !

नवयुवक:  कहूँ की बात ?

सुमैना:  अहि राजके राजा जे छलै ओ कतँ रहै छै आजुकल ?

नवयुवक:  बहिन उ राजा आब अहिठाम नै रहै छथि । ओकर बेटीसबके बियाह भेलाके बाद हुन्कर सब राजपाट बिलैट गेल ।३ टा बेटीसबके बढिया राजघरानामें बियाह केल्खिन मुदा ऊसब तँ घुमि कँs अखनधरि माँ बापकें देखैयो लेल नै आयल । आउर एकटा बटी जे सब सँ छोट बेटी रहै हुन्का लँगडा लुल्हाके संगे बियाह कराके रातोरात अही राज सँ निकाली देल्कै । ओकर अखन धरि कोनो खबर नै जे ओ कतँ गेला , कतँ छथि । हँ एतेक सुनमें आयल अछि जें राजारानी दुनों कहानती दोसर टोलमें भिख मांगीके अप्पन गुजारा कsरहल छथीन ।

( एतेक बात सुनीकें मेनुकाकें आँखी सँ नोरक' धार बह् लागै छैथ । मुदा करथि की ? सबकिओ सुमैना , हाँसबिहुस , लाँल कनियाँ सम्झावै छैथ ।दोसर दिन ओसब गरिब आ असहाय लोककें अनाज आ लत्ताकपडा दान करsके ओही गाममें काजकरम राखै छथि । असहायके गाउँमे अनाज आ लत्ताकपडा बांटिरहल छै से सुनिके मेनुकाके मातापिता भी जाइ अछि । मेनुकाके मातापिता पुरा बुढ भ'गेल रहै अछि । किन्को ओसब पहिचानें नै सकैत अइछ ।  मेनुका अप्पन मातापिताके वस्त्र देवके क्रममे नाम पुछै छथि । मेनुकाके पिता मेनुका दिस घुमि कँs देखै छथि..........

बाँकी कहानी भाग - १८ में
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