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मैथिली चेतनामुलक नाटक "दहेज" भाग - १०

मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै       दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक

                    दहेज
             दृश्य :-  दशम्  (१०)


 समय :- बेरियाके ५ बजे
दृश्य :- आदित्य अपन अफिस सँ छुट्टी भेलाक वाद रुम जाएत रहै छै तही समयमे अनुप्मा अपन शादीके दहेजवाला बात सुनिके अपनाआपके अभागीके उपमा दैत आत्महत्या करऽ नदीमे डुवै लऽ  जाएत रहै छै की आदित्यके नजर अनुप्मा पऽ पडि जाएत छै । आदित्य अनुप्माके पैहचाएन जाई छै जे यी अनुप्मा अछि कहिक' । आदित्यके शंका भ'जाई छै ओकर हर्कत देखके आ आदित्य अनुप्माके आवाज दै छै । अनुप्मा पलैटके देखै छै आदित्यके तऽ अनुप्मा आउर तेजीस' भागे लागै छै । आब नदी झप देत तब नदीमे झप देत ताहीमे आदित्य पकडि लैत छै । )

अनुप्मा :-  हमरा नई जिबैके छै यी जीनगी । किए पकडलौ हमरा अहाँ आदित्य हमरा मरें दिअ ।

 ( अनुप्मा अपन तागत लगि आपनाके आदित्य सँ
 छोडावैले खोजै छै की आदित्य अनुप्माके गालमे दू झापड दै छै । अनुप्मा फेर आदित्के छाति सँ सैटके सिहैक सिहैकके कानें लागैत छै ।)

 आदित्य :- आत्महत्या केनाई पाप छियै अनुप्मा । की बात छै , की भेल ? कीए एहेन निर्णय लेलौं ?

अनुप्मा :- हमरा उपर बहुत बडका पहाड टुटि पडल जकरा हम सैह नहि सकलूँ आदित्य । जई लड्का संगमे हमर बिवाह तय भेल छला ओकर पिता जी कहलक जे शादी सँ एक दिन पहिने हमरा लग दहेजके ४ लाख पाय पठादू तब तऽ शादी हायत नहि तँ  नई । अहाँक तऽ मालुमे अईछ जे हमर पिता जीक' अवस्था । नोकरी क'के जीवन गुजारा संगे हमरा पढावैत छलै ।

आदित्य :- ए पगली आत्महत्या केनाई बहुत बड्का पाप छियै । अहाँके आत्महत्या भेला सँ यी समस्याके समाधान भ'जेतै की यी दहेजके रोग उकैन जेतै । कतेग दिन तक अपन जीनगी बिना देखल लड्काके संगमे दाउमे लगाव दैत रहब । हँ मानै छी जे माय बाप बेटा बेटीके पोसैपालै छै , पढावै लिखावै छै तऽ ओकर अधिकार बनै छै  मुदा यी नई की बेटा बेटी सँ बिना पुछनैं ओकर जीनगीके एतेक बड्का फैसला क'दी । आई अहाँ यी समस्या सँ पाछु भागबै , कआल्ही दोसर भागतै एनामे त' यी दहेजक धधरा आउर बढतै आ बढैत बढैत समुच्चा समाजके सुडाह क'देतै । अहाँ तऽ पढल लिखल छी । अहि जब एनंग हार मानि लेवै तऽ आउर बाँकी अनपढसब की करता । केकरो त अहिके बिरोधमे अवाज उठवे ने पडतै तऽ हमही अहाँ युवा किएक नई ?  चलूँ अखिन्तो किछु नई बिगडलै । घर जाऊ बाबु जी परेशान हेता ।

अनुप्मा :- अहिठाँ सँ हमर डेरा बहुत दूर अछि ।

आदित्य :- चलू कोई बात नई । बाबु जीके फोन नं. दिअ हम बाबु जीके फोन क'के जानकारी करा दैत छी । 

( अनुप्मा आदित्यके अपन बाबु जीके फोन नं. दैत छै आ आदित्य अनुप्माके बाबु जीके फोन करैत छै । अनुप्माके बाबु जी घबराएत फोन उठावैत छै । )


शिवप्रसाद :- हेलौ ! के छी ?

आदित्य :- हेलौ ! हम अंकल आदित्य अनुप्माके क्लेजके संगी जे ईनरूवामे एके क्लेजमे पढैत रहियै । अंकल अपने चिन्ता नई करु । अनुप्मा अखन हमरा लग अछि ।

शिवप्रसाद :- अनुप्मा अहाँ लगमे अछि ?

आदित्य :- हँ अंकल हमरा लग अछि । हई लिअ अनुप्मा सँ बात करु ।

अनुप्मा :- हेलौ ! बाबु जी ।

शिवप्रसाद :- अनुप्मा तू ठिक छिहि ने बौवा ?

अनुप्मा :- हँ बाबु जी हम एकदम ठिक छी ।

आदित्य :- अंकल अपने अनुप्माके शादीके चिन्ता नई करु ।जे लगन तय केनें छी ओही लगनमे अनुप्माके शादी जरुर होतै हँ अहिबेरक दुल्हा दहेजमे ४ लाख सँ बेसी मोलवाला चिज मागत ।

शिवप्रसाद :- बौवा अहाँ तऽ जानिते छी हमर अवस्था । एतेक बडका पाय हम कतऽ से दिअ सकब ।

आदित्य :- अंकल हम मजाक केलौ । सच्चमे अहिबेरक दुल्हाके पाय नई अहाँके घरके अनमोल चाँनके टुकडा अनुप्मा चाही वस अनुप्मा आरो किछु नई  । बस आब अपने शादीके तैयारीमे लाईग जाऊ अंकल । बाई....!

शिवप्रसाद :- बाई.....!

( आदित्य तुरन्त अपन मायके फोन क'के सब बात कहै छै आ रूम आवैके लेल बोलावै छै । विहान सवेरे आदित्य अनुप्माके ओकर बाबु जी लग पुगा दैत छै। दू घण्टावाद आदित्य अपन शरपर सेहेरा बान्हिके अनुप्माके बियाहै लँ जाएत छै । स्वंमवरके दृश्य पऽ दहेज विरूद्धके गीत संग नाटकके समाप्त होएत छै । )

दहेज बिरुद्ध गीत
=०=०=०=०=०=
करियौ सब किओ परहेज लियौ नै कियो दहेज-२ ।
संकल्प करू सब किओ अब करबै आदर्श शादी यौ ।
मिथिलाके कराबु दहेज सँ अजादी यौ ना ।

जख्ने शादीमे लेलौ अहाँ ढौवा -२ ।
बुझियौ बिक गेल हमर बौवा -२ ।
जबतक सब मिल बन्द नै करबै लै ल' दहेज यौ, 
धियाके उपर उभरैत रहत कलेश यौ ना ।

जबतक मिझायब नै दहेजक धन्धोर -२ ।
धियाके आइखसे बैहते रहत नोर -२ ।
अब त' रोकु सब किओ धियाके बर्वादी यौ ,
करै जाउ नें सब किओ आदर्श शादी यौं ना ।

धिया छैथ लक्ष्मीके रूप -२ ।
मिथिला छी किए चुप -२ ।
अब दहेज नैं ल' करू बेटाबेटीके शादी यौ ,
मिथिलाके दिलाऊ दहेज सँ अजादी यौ ना ।
करियौ सब किओ परहेज लियौ नै कियो दहेज-२ ।
संकल्प करू सब किओ  करबै आदर्श शादी यौ ।
मिथिलाेके कराबु दहेज सँ अजादी यौ ना ।

                                       धन्यवाद ।

                             💝प्रयास प्रेमी मैथिल®

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