जुनी जाऊ छोडिके हमरा पियाजी अहाँ विदेस
सैह नहि सकब हम सैञा जुदाई के हो क्लेश
दु:खे शुखे हो करि लेबै गुजारा
गुजारा............गुजारा हो
दु:खे शुखे हो करि लेबै गुजारा
दु:ख हरिलेतै महेश
सब मिलि गामे रहूँ पिया पहिर गरिबी के हो भेष
सैह नहि सकब हम सैञा जुदाई के हो क्लेश
जुदाई लिखल अछि सजनी देखूँ हाथके लकिरमे
छठि रातिमे लिखल्कै बिधाता गरिबी हमरा तक्दीरमे
ककरा कहतै बौवा बुच्ची पापा
पापा.............पापा हो
ककरा कहतै बौवा बुच्ची पापा
के लाबिक देतै सनेस
ककरा देख हम करबै श्रृगार अहाँ चलि जबै विदेस
सैह नहि सकब हम सैञा जुदाई के हो क्लेश
प्रयास प्रेमी मैथिल©













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