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मैथिली साहित्य, मैथिली गजल, मैथिली कथा , मैथिली कविता, मैथिली गीत , कहमुकरी, चारपातिया

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बरमझियाके पेडा खुवेबौ भन्टावारीके केरा गे चल हमरासंग मस्ती उडेबै राजबिराज हमर डेरा गे


बरमझियाके पेडा खुवेबौ भन्टावारीके केरा गे
चल हमरासंग मस्ती उडेबै राजबिराज हमर डेरा गे

भारदह् घुमेबौ कंचनपुर घुमेबौ आ घुमेबौ विरेन बजार गे
लहान लsजाके सिनेमा देखेबौ किन देबौ सोलह् शृगार गे
बाम दहिन नै सोचही बेसी आबि जो हमर कोरा गे
चल हमरासंग मस्ती.........  .........  .........  .........  ...

रानी बनाके राखबौ हम तोरा कमी नै हेतौ कुनो चिज के
किनिके साडी लाबि देबौ हम तोरा गे जोगबन्नीसे बिछके
चल हम बुझाके कहै चियौ तोरा घरके पछोरा गे
चल हमरासंग मस्ती........  ..........   ..........  .........  .

मानी जो हमर बात गे गोरकी करि लेनें हमरा पसिन गे
नाम तोहर हम लिखि देबौ सुनरी १०/२० कट्ठा जमिन गे
देखही 'प्रयास' तोहर दिवाना बनि करै छौ निहोरा गे
चल हमरासंग मस्ती.....  ..........  ........  .........  ......

प्रयास प्रेमी मैथिल®

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