मैथिली लप्रेक - ७
दुर्गा, जीना आ रामके एक दोसरके संग बहुत मेल छल मुदा ओसब एक दोसरके संग कहियो प्रत्यक्ष रुपे नै भेटल छेल । यी सब चिट्ठी-पत्रीके माध्यमसे एक दोसरके मित्र बनल छेल ।रसेरस यी सबके मित्रता एकदम घनिष्ट भ'गेलैय । राम धरानमे रहैत छल आ जीना आउर दुर्गा खाधबारी संखुवासाभा मे । धिरे-धिरे जीनाके मनमे रामप्रति प्रेमक टुसी पौनकें लागल माने जीना रामके प्रेम करs लागल मुदा यी बात यी बात जीना रामके कहऽ नै सकैत छेल जे हम अहाँ स' प्रेम करैय छी । एक दिन जीना अपन भीनाजुके अहिठाम धरान आएल छेल आ रामके धरान भेटैयके लेल छलै । संजोग रामके वही दिन अफिससे छट्टी मिलल घर जेबाक लेल । एमहर जीना सोचलक जे आइ रामसे भेटके अपन मनके बात कहिए देवैय । दूनू गोटेय धरानके भानुचौकमे भेट भेल । तकरवाझ दुनू गोटेय नस्ता करऽ लेल एकटा होटलमे गेल । नास्ता केलाके वाद राम कहलकैय जीना आइ हम कनें धरफरमे छी । घरमे आइ हमर बियाहके फाईनल बातचित करैयके छै तै दोसर दिध भटब तँ कनें नीकसे बतिआयब । एतेक बात जे सुनलक जीना रामके किछो कहि नें सकलक बेचारी माने जे ओकर मुहसे बाक हरण भ'गेल । बेचारी जे मनमे सोचिके आयल छेल ओ मनेंमे रहिगेल ।
प्रयास प्रेमी मैथिल®

















