maithilisahitya, मैथिली कव, मैथिली गजल, मैथिली गीत, मैथिली कथा, मैथिली साहित्य MAITHILISAHITYA: लप्रेक

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मैथिली साहित्य, मैथिली गजल, मैथिली कथा , मैथिली कविता, मैथिली गीत , कहमुकरी, चारपातिया

सामाचार

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मैथिली लप्रेक - ७


                 दुर्गा, जीना आ रामके एक दोसरके संग बहुत मेल छल मुदा ओसब एक दोसरके संग कहियो प्रत्यक्ष रुपे नै भेटल छेल  । यी सब चिट्ठी-पत्रीके माध्यमसे एक दोसरके मित्र बनल छेल ।रसेरस यी सबके मित्रता एकदम घनिष्ट भ'गेलैय । राम धरानमे रहैत छल आ जीना आउर दुर्गा खाधबारी संखुवासाभा मे । धिरे-धिरे जीनाके मनमे रामप्रति प्रेमक टुसी पौनकें लागल माने जीना रामके प्रेम करs  लागल मुदा यी बात यी बात जीना रामके कहऽ नै सकैत छेल जे हम अहाँ स' प्रेम करैय छी । एक दिन जीना अपन भीनाजुके अहिठाम धरान आएल छेल आ रामके धरान भेटैयके लेल छलै । संजोग रामके वही दिन अफिससे छट्टी मिलल घर जेबाक लेल । एमहर जीना सोचलक जे आइ रामसे भेटके अपन मनके बात कहिए देवैय । दूनू गोटेय धरानके भानुचौकमे भेट भेल । तकरवाझ दुनू गोटेय नस्ता करऽ लेल एकटा होटलमे गेल । नास्ता केलाके वाद राम कहलकैय जीना आइ हम कनें धरफरमे छी । घरमे आइ हमर बियाहके फाईनल बातचित करैयके छै तै दोसर दिध भटब तँ कनें नीकसे बतिआयब । एतेक बात जे सुनलक जीना रामके किछो कहि नें सकलक बेचारी माने जे ओकर मुहसे बाक हरण भ'गेल । बेचारी जे मनमे सोचिके आयल छेल ओ मनेंमे रहिगेल ।

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मैथिली लप्रेक - ६


अपन ससुराल स' किछु दिनक बाद सुनिता बौवा प्रभातके ल'के नहिरा आएल मुदा दुल्हा अपनें घरे रहि गेल । तकरबाद अपन बचपनके सखि चमेलिया सँ भेट गेल । चमेलिया सुनितिया स' पुछलक ,
चमेलिया :- आई गे सुनितिया चुपेचाप बियाह कsलेलही , अपन दुल्हाके देखेबो नें केलही । सोचलिही जे चमेलिया हमर दुल्हाके फुसला लेत नैं गे ?
सुनितिया :- हे ! से बात नै छै , हमर माँ बाप धरफरमे हमर बियाह कsदेलकौ तै नै कहs पेलियौ ।
चमेलिया :- अच्छा ठिक छै । आइ चल हमरा संगे बजार हमर Boyfriend भेटैलें आबिरहल छै । देखिहे केहेन छै हमर ऊ....।
सुनितिया :- अच्छा चल देख लैत छियो तोरो Lover के ।
सुनितिया चमेलिया संगे बजार गेल ।ओकर Boyfriend के देखै लेल । मुदा चमेलियाके Boyfriend के आवै मे कनें देरि भेलाके कारणें सुनितिया दुकानमे मेकअप  के सामान किनें लागल ।तहि बिचमे चमेलिया अपन Boyfriend के फोन कsके बजेलक । ओ आएल ।जब दुकान पs जाइ छै त सुनितिया पलैटके देखै छै, आ बजै छै ,
सुनितिया :- आईं यै अहाँ एमहर कतs ?
चमेलिया :- तु एकरा चिन्है छिहि गें ?
सुनितिया :- एहे त छियै हमर प्रभातके पापा ।
 चमेलिया :- स्तब्ध । पुरा चुपचाप , माने सकदम ।

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मैथिली लप्रेक - ५




         अचानक प्रकाशके मोबाईलमे अन्ठिया नम्बर से फोन आएल । प्रकाश फोन रिसिभ केलकै त' ओम्हर स एक लडकी मधुर अवाजमे बोललै । तकर वाद दूनु गोटेके परिचय पात भेला । ओ लडकी अपन नाम सुलेखा बतौलक । फोनमे बातचित करैत-करैत प्रकाश आ सुलेखामे एक दोसरके बिच प्रेम भ'गेलै संगे एक दोसरके प्रत्यक्ष भेटघाट भी भेल । सच्चमे सुलेखा बहुत सुन्दर छलै जेना स्वर्गके परि रहैय । दूनु एक दोसरके संग जीवन जीवैयके निर्णय क'के मन्दिरमे जाइके शादी क'लेलकै । प्रकाशके शादीमे हुन्कर मित्र बिन्देश्वर , असरफ , सौगारथ , दिनेश , विधानन्द , सुधिर लगायतके सब संगीसब आएल । सब गोटें प्रकाशके बधाई दैत कहलकै साच्चे प्रकाश जी अहाँके सुलेखा स्वर्गके परि सामान अइछ । प्रकाश त' खुशी सँ चूर भ'गेलै । खुशियो किएक नै हेतै परि सनक' जे प्रेमिका भेटलै । सब संगी अपन-अपन घर गेला । भोरेंभोर रितेश बजार आवैत छलै तs देखै छै प्रकाशके उदास चेहरा बनाके माथ पs हाथ ध'के दुवार पर बैसल छेला । रितेश जाइके पुछैत छै ,
रितेश:- मर की भेल प्रकाश भैया ? एना किये माथ पs हाथ ध'के बैसल छहँ ? भौजी संगमे राति खटपट ते नै भेलs ?
प्रकाश:- रितेश भाइ एकरा संगमे बियाह क'के हमर कुलके दिया बुता गेल ।
रितेश:- से कोना के ?
प्रकाश:- रितेश भाइ जेकरा हम स्वर्गके परि सम्झीके बियाह कsके आनलूँ से त तेसर लिंगी निकलsल ।
रितेश:- लाs....  .........  ...... ।

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मैथिली लप्रेक - ४



               रामलखनाके कतार सँ गाम आएला १० दिन भ'गेलै । आजु बिहानें रामलखना फेसबुक खोललकै तs देखैय छै चन्द्रमुखीके अनलाईनमे । रामलखना मेसेज लिखलकै , कतs अछि यौ डार्लिंग ? ओमहर सs मेसेजके रिप्लाई आयल , हम अखन ईनरुवा महेन्द्र चौकमे बरक' गाछी तरमे बैसके अहींके याद कsरहल छी । चन्द्रमुखीके यी मालुम नैं छेल जे रामलखन कतार सs घर गाम चलिएलै से । रामलखन फेर मेसेज केलकै, डार्लिंग हमहूँ आविरहल छी । हँ. हँ.. आऊ नें । रामलखना गेल गुलटेनवाँके Rx माँगिके पुरा तयारीके साथ चन्द्रमुखिके भेटै लs । जब रामलखना महिन्द्र चौक पहुँचल त' कोनो लड्कीके नैं देखै छै बरक' गाछ तरमें । बस गाछक' दोसर कातमे ३/४ टा छौरासबके बैसल देखै छै । रामलखना मनेंमन सोचै छै च्याटिंगमे अहिंसंगे बियाह करब से वादा केनें छै ठकना त' नै चाही । रामलखना फेर भ्वाइस मेसेज केलकैय , चन्द्रमुखि डार्लिंग अहाँ कतs छी हम अहाँके बरक' गाछी तरमे नै देखै छी । एतेक कहीके गाछक' नजिक गेलै त' सुनैय छै ओइ कातक' एकटा छौराके मोबाईल सँ यी मेसेज बजैत ।जब आगु जा'के देखै छै तँ ऊ छौरा त' संगेसंग पढैत जे रहै सेहे फेकना छियै फेक आई. डी. मे ।

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मैथिली लप्रेक - ३


                एस.के., रविन्द्र , राजदेव , फुलमतिया आ फुलेश्वरी यी सब गोटें संगेसंग पढैत छलै । रविन्द्र फुलमतियाके बड्ड प्रेम करैत छलै मुदा ओकरा अपन मनके बात कहs नै सकैत छलै । रविन्द्र मनेंमन विचारलsकै  एना केनें सँ नै होतै , आजु जे हेतै से हेतै मुदा आजु फुलमतियाके आई. लव. यू. कहिए के छोड्वै । रविन्द्र हिम्मत जुटाके पुरा तयारीके साथ स्कुल पहुचल । स्कुलमे रविन्द्र देखै छै ग्रुप-ग्रुपमे छौरा- छौरीसबके फुसुर-फुसुर करैत ।रविन्द्रके किछो समझमे नै आयल । तब रविन्द्र फुलेश्वरीके पुछै छै , रविन्द्र:- यी कथी कs फुसुर-फुसुर भ'रहल छै ? फुलेश्वरी:- अहाँके नैं मालुम अईछ ? रविन्द्र:- नै , हमरा किछो नें मालुम अछि । फुलेश्वरी:- रातिखुन राजदेवके सहजोगमे फुलमतिया एस. के. के संगे टाप भsगेलै ।

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मैथिली लप्रेक - २


              टिन.....! टिन......! पिन्टु:- हेल्लौ के टुनियाँ ? अहाँके आवाज सुनै लेल हम बहुत ब्याकुल छेलूँ टुनियाँ । टुनियाँ:- हमरो मन पिन्टु अहाँके आवाज सुनै लेल छटपट करैत छेल ! पिन्टु, हमरा कनेक अहाँके सहजोग चाही ! पिन्टु:- की सहजोग ? अहाँके लेल हम जे भी करैय लेल तयार छी । टुनियाँ:- बस १००० रूपैयाँ पायके जरुरी पडि गेलैय हमरा ! ल'के आबूँ नें बजार पिन्टु । पिन्टु:- अच्छा अहाँ चिन्ता जुनि करु हम आबिरहल छी पिन्टु तुरन्त पाय ल'के बजार जाएय छै । पिन्टु:- हँ हे लिय पाय टुनियाँ । टुनियाँ:- धन्यवाद पिन्टु ! अहाँ कतेक नीक छी पिन्टु । पिन्टु:- आउर जरुरी पडत तs हमरा कल करब । टुनियाँ:- अच्छा होएतै । पिन्टु बजार सँ घर घुरिके जाएत छला कि मोबाईलमे फोन आवै छै ! टिन..टिन...! पिन्टु:- के माँ , कही कथी कहै छही ? माँ:- बौवा रौ बजार सँ किछ मिठाई लेनें अबिहेए ! पिन्टु:- अच्छा हम लेनें आवै छियो माँ ! पिन्टु घुमिके होटल गेलै मिठाई लैलs तँ देखै छै होटलके पछाडी कोन महक टेबुल पs खिखराके संगमे धाएके हजरियाके गर्दा उडिरहल छै ।

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मैथिली लप्रेक - १


                 राम, तूँ हमरा सँ असली वाला प्रेम करै छिहि नें ? तोरा भरोसा किएक नैं होए छौ हेमा ,.फोनके स्पीकर लौड क'के सुनि ले हे हे हे ! ठोकल प्रेम करै छियौ । तूँ खाली डिलिंग दै छिहि , नै त' आवि कँ बियाहक' बात नहि करतिहिँ बाबु सँ । देख हेमा हम एक हप्ताके भित्तर छुट्टी लs गाम आवै छी तखन तोर बाबु जी सँ गप क'लेब फाईनल । एतबहिमे फोन कटिगेलै । राम ठिक सातम दिन गाम जाएत छै । हेमाके घर पहुँच देखै छै घर दुवार सजाएल , दरबाजा पs गेट आ दुवार पs हेमाके छोटकी बहिन हिना कुर्सि पs बैसल रहैं । राम धकमकाएत पुछलकै:- यी कथिके गेट बनेनें छलै हिना ? हिना गेटक' पाछा लगाएल बोर्ड दिस रामके ईशारा केलकै । राम तकिते रहिगेलै । ओकरा नहि सुझै । ओकरा चारुकात अन्हार लाग लागलै ।

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