maithilisahitya, मैथिली कव, मैथिली गजल, मैथिली गीत, मैथिली कथा, मैथिली साहित्य MAITHILISAHITYA: हिन्दी गजल

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ऐसे  क्यू   मुझसे  तू  नजर   चुराती  हो ।

जाने  पहचाने  हो फिर  क्यू  सर्माती हो ।


मै  दिवाना  बन   गाया  हूँ  तेरे   प्यारमे 

पास   रहकर    मुझको    तडपाती   हो ।


तेरा   चेहरा   मेरे    निगाहोमे   वसी   है

हरवक्त   मेरे    सपनोमे   तू   आती  हो ।


ईस  कदर  चढ   गाया  नाशा   प्यारका

हाजिर  हूँ बोलो  क्या तूम  फरमाती हो ।


कबतक    रहुँगा   मै   तन्हा   तेरे   बिन

पास  आजाओ  सनम क्यू  घबराती हो ।


अब  लड   जाउँगा   मै  ईस   जमानेसे

बोलो क्या तू मुझको दिलसे लगाती हो ।


चाँद   तारेसे   भर  दुँगा   तेरी   माँगको

कहो  मेरा   दिलका  सरगम   गाती  हो ।


अब   कुछ   भी   नही   पुछुँगा   तुमसे

क्या तुम मेरे  साथमे  इश्क  लडाती हो ।


वस  बहुत   होगाया   नाटक   प्यारका

क्या  मेरे  साथमे  तुम  घर  बसाती हो ।


🌾Prayas Premi Maithil🖋️

🇳🇵Inaruwa - 8 Dumraha , Sunsari

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