maithilisahitya, मैथिली कव, मैथिली गजल, मैथिली गीत, मैथिली कथा, मैथिली साहित्य MAITHILISAHITYA: गजल

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#गजल


यी दिलक' अँगना सजाएक' रख्ने छियौ तोरेल'।

यी ब्याकुल मनके  मनाएक' रख्ने छियौ तोरेल' ।


बेसी  देरि  नैई  कर  लोकके  चक्करमे  पैडक'

यी आँईखमे प्रेम  छुपाएक' रख्ने  छियौ तोरेल' ।


जौं हमर  प्रेम  सच्चा  होतैत'  तू एबिही  जरुर

हम दिल बाटप'  बिछाएक' रख्ने  छियौ तोरेल' ।


एकबेर  तू  घुरिक'  देखही  त'  प्रयास  प्रेमीके

बगैचाक' गुलाब  हिआएक' रख्ने छियौ तोरेल' ।


                             🇳🇵प्रयास प्रेमी मैथिल✍️




गजल


स्वतन्त्रता बोझल अछि माथपर खुल्ला कारागारमे छी ।

पुरुषक तनमे जन्म ल'के जीवनक मझधारमे छी ।


बापके ईच्छा, बहिनके ईच्छा, भाईके ईच्छा, बौहके ईच्छा

माईके खातिर किछो नैई केली सबहक देखारमे छी ।


मलेशिया, साउदी , दुबई अवसरके नै कोनो कमी छै

पहिचान बन्की लगाब खातिर मानवके बजारमे छी ।


रामा कठौला सुनैत सुनैत सुतली रातिक' दुई बजे

याद एलै घरक' ऋण सुरज उगैक' ईन्तजारमे छी ।


विदेससँ घर आवैत हमरा बाबुजी क'देलक भीन

जेष्ठ पुत्र भ'के जे जन्म लेली तै आई हम अन्हारमे छी ।


प्रयास प्रेमी मैथिल



गजल


बढौतरी चढौतरी आ लोकके सन्काबमे बड्ड माहान छी अहाँ ।

अपने पायरमे कुडहारी मारिरहल छी बड्ड नादान छी अहाँ ।


एकबेर र धोका खेलाक' बाद लोक चौकन्ना रहैत छै धोकासँ

कबो काँग्रेस कबो एमाले सच्च बताबु ककर सन्तान छी अहाँ ।


भाई भाईके बिचमे झगडा लगाक' गृहयुद्ध सेहो करबेलौं

बाप बनैक' लेल बापके मरलौं केहेन शुद्ध  सैतान छी अहाँ ।


खेत बेचलौं खरिहान बेचलौं सँगहि बेचलौं अपन बथान

आब देशके उर्जा सेहो बेचै छी कहुँ कतेग गुणवान छी अहाँ ।


बाप पुर्खाके अर्जल अजवारल खाँ खाँके अपने घरमे आई

भाईके सँगमे कुस्ती लडै छी कहुँ केहेन पहलवान छी अहाँ ।

 


अहाँ एवैए जे सुनिक' खुशी भ'गेली हम ।

वसमे नै छै दिल भुईल गेली सब गम ।।


फूलेफूलसँ सजौनें छी दिलक डगहर

सर्मावैत पहुँचे अहाँक' प्रेमक कदम ।


दुनियाँदारीक' वहीखाता नै देखल करु

अहाँ हमरासँ प्रेम करै छी खाऊ कसम ।


साथ नहि छोडब हम चाहे जेभी भ'जाए

दिवानी भेली हम अहाँके प्रेममे सनम ।


कनें मुस्कचराक' कहुँ ल'के प्रयासके नाम

अहाँ हमरे प्रीतम बनब सातो जनम ।


आर. एन. मेहता 

(प्रयास प्रेमी मैथिल)

 



यै सजनी अहाँ जखनें घोघ बनेलियै ।

अहाँ हमर आँईखक निंन चोरेलियै ।।


हम बेहोस भेलि अहाँक' प्रेम प्रीतमे

हमरा प्रेमक रस जे अहाँ पीएलियै ।


अचकेमे निंन हमर टचटि गलै प्रिय

जखनें हाथक' चुडी अहाँ खनकेलियै ।


प्रेमक ताहसँ हम राति जलैत रहि

मनमे प्रेमक लुत्ती अहाँ सुन्गा देलियै ।


कोना वर्षलौं अहाँ प्रेमक बाईढ एलै

अहाँ सँगे हम प्रयास भसिआ गेलियै ।


प्रयास प्रेमी मैथिल




देहरीप' बैसक' रस्ता निहारै छी हम  ककरो आवैक' आशमे ।

हमर  प्राण  प्रिय   मनमोहना  पिया  रहैत  छथिन  प्रवासमे ।


बौवा  दौडैत  छै  अंगना   दुवार   बजैछै  घुघरु   घुनुर  घुनुर

साँझमे लोरि  सुनावैत कहैछी चन्दामामा छौ तोहर अकाशमे ।


हुन्का हम कहली दुनू मिलिक' गामेमे रहिक' किछु काज करु

हमरा  छोडिक' ओ गामस' बहरा चलिगेल ढौवाके  तलासमे ।


हमर  आँइखक  ओल्तीमे  टपकैत  रहैत  छै  सिनेहक  ठोप

ओकरे  नामक  उच्चारण  होयत  छै  हमर  हर एक  साँसमे ।


सुन रे कौउवा  बात  हमर  जो जाके  कहिहे हमर पियाके तू

जोगिनके   भेषमे  रहैत  य   घरनी  अपने   घर  वनवासमे ।


प्रयास प्रेमी मैथिल

 


प्रिय हम लिख रहल छी गजल अहाँ शब्दके चुनू ।
हमर धिआन नैई तोडू बजाके पायल रुनुझुनू ।

अहाँ अपन नयनक हर्कतपर कनें काबू राखू
हम कहै छी आदत सुधारू हमर बात सुनू ।

दिलक सियाहीके तागत नैई अछि मालुम अहाँके
पढबाक चक्करमे नहाजेत अहाँके आँईख दुनू ।

अहाँके दिलक अवाज हमर दिल सुइन लेलक
अहाँ अपन केसकें सहारे प्रेमक जाल नैई बुनू ।

देखूँ बड बेर भ'गेल डिबियो ओंधावैए लागल छै
हमहूँ सतैत छी आ अहूँ अपन दुनू आँईख मुनू।

प्रयास प्रेमी मैथिल (आर.एन. मेहता )




 किछ बाजू बतिआबू कहुँ किय उदास छी ।

हमरासँ कनफुस्की करू किय निराश छी ।


बन्द पिजडासँ भागल हम एक चिडैया

हमरा लेल अहाँ खुला निश्चल अकाश छी।


जही चिजके पाँछा हमर आत्मा भागैत छै

ओई पुनम ईजोरियाके अहाँ प्रकाश छी ।


जीवनक पुरबा पछिआ हावाके चोटसँ

हम प्यासी पंक्षी आ अहाँ तकर पिआस छी ।


कतेक संगे भेट भेल जीवनक राहमे

अहाँ सबकिओसँ अलग हमर खास छी ।


निश्चल दिलसँ पढूँ हमर जीवन अहाँ

अहाँ हमर रेखा हम अहाँके प्रयास छी ।


प्रयास प्रेमी मैथिल

 


गजलकार :- विरेन्द्र कुमार सिंह

१. गजल 

आंदोलन करबै हमसभ तहिया धरि

ई, नश्ल्वादी सोंच रहतै जहिया धरि 


हमसभ अइठाँ दहाक' कहाँ याल छी

देखैछी ओ उनुस लाडै'हैं कहिया धरि


फिरंगीकेँ नाल देख काटब घुस्कुनिया तँ

घूमब मात्रे ओकर गाड़ीकेँ पहिया धरि


कोर्रा मारि, केन्ना बिसरब मधेशी भाई  

चलू पोतैछी करिखा ओक्रा बपहिया धरि


शासक सँ दारू नै अप्न अधिकार छीनू 

सीमित नै रहू यारे मात्रे पन्सहिया धरि





२. गजल 

ई लाल - लाल धूजा ललकार केकरा लेल 

जनते नै रहतै, त’ ई सरकार केकरा लेल


अहीं लेल लोग अत' प्राणक आहूती देल्कै  

आब बनल छी आहाँ,  खूंखार केकरा लेल


माथमें पट्टी बान्हि कुदलै, ई गरिब'हे बेट्टा

बनल छल दिन-राति क्रांतकार केकरा लेल


आँहाँ त’ भूलि गेलियै, सत्तामें झूलि गेलियै

छोड़ि गेलियै निच्चा, बोखार केकरा लेल 


आरि-कोन्ह ढाहि, साँढ़ सन' उपढ़याँह नै करु

दिया'जे देलू मुँहमें, से ई बकार केकरा लेल


अहं नै करू बेसी, छनेमें-छनाक भ' ज्यात

मधेश'क माओवादी भेल, बेकार केकरा लेल



 ३. गजल

एक-दाेसरमें मुँह दुस्सा-दुस्सी किया भेलै गौ

फर्कल बछरु दूध नै पिल्कै मुन्हीमें कसेलै गाै 


राम खेलैछै तीर-धनुहिया एकहु निशाना बाम नए

बाँचिगेलै सुर्पनेखा मुदा ई सिताजी ह'रेलै गाै 


हाँस बगरिया हँसिले एकदिन ताेंहूँ फँस्बे यार

गर्दनि काटिक' हमरे साेझा बबाजी लगेलै गाै 


रक्क्त सभटा चूबा-चूबाक' तम्घैलामें ताेंहीँ रख्ने

एकहि बुन्न जँ हम चटलियै सभ किये डरेलै गाै 


राति-दिन त् ताेंही हँकैछे बैस्ले बैसल गाछकेँ

बिना फुकनहि अइ धामीकेँ भुँत केना परेलै गाै 



४. गजल 

हमछी सिताकेँ सहोदर भाई, मानैछै दुनियाँ सगरे

ताहीसँ, हमरा मधेशीके यौ, तानैछै दुनियाँ सगरे


आब हम्ही जे अहं करबै, अपने घरकेँ अस्तित्व लूटि

ओहीसँ, हमर मधेशी भैया, कानैछै दुनियाँ सगरे


बुझबै तँ नीकेँ रहब, काबीले रहब, मुदा से केँ बुझतै

अपनेमें लड़ब त' अहिना देखू, हानैछै दुनियाँ सगरे


नून-लस्सा लागल त' बूझू दाईलोमें काला छै किछ 

अहिनाक' मधेश फुटौने छै ने, जानैछै दुनियाँ सगरे


जँ सिता,  बुद्ध सुनिक' लोग नमन करय मधेशोकेँ, नेताजी ! 

जेसभ अहं नै करैछै माटि'क, फानैछै दुनियाँ सगरे





५. गजल 

गंडक, कोशी, बलान नहेबै यौ

हम आब त' ई, पुराण पढ़ेबै यौ


विद्यापतिकेँ लिखल पोथी हमसभ

घर-घर द'क' आ गुमान बढ़ेबै यौ


सीयाजीकेँ नगरिमें हमसभ छी 

भूगोले पर,  महान कहेबै यौ


आहौं मानब त' मानू मीताजी 

अपनोसे जी, जहान लगेबै यौ


मिलबै  त' लिय'न' संगोरे करबै हम 

सब भाई मिलक' सान बढ़ेबै यौ 



 



नयनक नहरमे डुबाके हमरा कहूँ अहाँ की पावै छी ।

दोसरके भ'गेलौं अहाँ फेर याद आबिक किय सतावै छी।


नितदिन हरक्षण अहाँके भुलाबके कोशिशमे रहै छी

हमर आँगास' गुजैरके सुतल दिलके किय जगावै छी ।


हमर जीवनक फूलवारीसँ नाता तोडिके त' चलिगेलौं

पोन्कैत टुस्सीके एना बिचमे पैनी काटिक' किय सुखावै छी ।


आब त' यी जिनगी जहर सनके लागे लागल छै हमरा

नोरक बाईढमे हम बितलाहा यादसबके बहावै छी ।


प्रर्थना करै छी अहाँ सदिखन हँसैत मुस्कुरावैत रहूँ

अपन साँस अहाँके नाम क'के तनसँ विदा होब चाहै छी ।


आर. एन. मेहता

 



मनक' ललुसा लेल आँईख पेहरामे छै ।

साजन सजल हमर आई सेहरामे छै।


अपन दिलक बात हम ककरासँ कहि

हमर सुन्निहार नैई किओ नहिरामे छै ।


अपन मनहि मनमे दिलके गगनमे

हमर साजन लजा रहल ससुरामे छै ।


आई सबहक नजर सगरो चौकन्ना छै

दुल्हा निहारी रहल हमर कजरामे छै ।


हम दुल्हिन बनिक' आई ससुराल जेवै

दुनूटा कुलके लाज हमर अचरामे छै ।



प्रयास प्रेमी मैथिल




  • नुका लिअ हमरा अहाँ अपन नयनक नगरीमे ।
  • ककराल' रख्ने छी जवानी जोगाक' प्रेमक गगरीमे ।

  • देख लेल ब्याकुल छी हम अहाँके चन्द्रमुखी चेहरा 
  • किय नुकाके रख्ने छी सावा हथक घोंघक पोटरीमे ।

  • अहाँके एक मुस्कानप' हम अपन दिल हारि गेलौं
  • खुश भ'जायब देखके हमरा धोती, कुर्ता, पगरीमे ।

  • एना ब्यर्थमे समय नैई बिताबू बात सुनू हमर
  • किछ नैई भेटत गामक मरल मुर्दाके खखरीमे।

  • कबुल करू अहाँ हमरा हम अहाँसँ प्रेम करै छी
  • सिनेहक गेठरी बान्हि लिअ अहाँ अपन अचरिमे ।


  • प्रयास प्रेमी मैथिल  




 जकरा मानलि अपन सेहे बेराएके गेलै ।

मेघमे उडैत बादल जेकाँ हेराएके गेलै ।


खुनक' रिस्ता नैई मुदा बसैत छेलै दिलमे

अनमोल प्रेमधन सबटा ओराएके गेलै ।


किछ फटाहाके फटाहागिरी करैत देखके

लक्षयके बिसैर अपनासँ डेराएके गेलै ।


दुब्बर असहाय सम्झिक' सहारा बनलियै

दुई सहोदर बिच लडाई लडाएके गेलै ।


जब पुछली हम अहाँ किय केलौं एना

नैई किछ बाजिअ' छुछे मुस्कुराएके गेलै ।


प्रयास प्रेमी मैथिल


 



अखन अहाँके आँईखमे सनम नासा य जामके ।

जाऊ अहाँ अराम करू फेर हम भेटै छी सामके ।


अहाँ अनमोल जनिजायत अपनाके पहिचानू

हर किओ खरिदैल' चाहै य बिना मोल बिना दामके ।


घोंघमे नैई नुकायल रहूँ खुइलके अहाँ बोलू

अहाँ सत्यप' अटल छी त' छोडू कहुल्का अन्जामके ।़


सुखक की भरोसा दु:ख हरदम साथमे रहत

आँगाके निशाना साँधू कैसके पकडू लगामके ।


अपन दिलक सियहीसे लिख रहल य प्रयास

जिनगीसँ डैटके लडू साथ दियौं अपन रामके ।


प्रयास प्रेमी मैथिल

 मैथिली गजल



किय मन मारिक’ बैसल छी एना किछ त’ हमरा बताबु नें ।

किय दूर हटल छी हमरासँ अहाँ लग ससैरके आबु नें ।


बुझू सम्झू दुनियाँ समाजके आ जीवन जिबके अभ्यास करू

नैई पडू दोसरके बहकावमे अपन मनके सम्झाबु नें ।


लोगक’ देखासिखी नैई करू लोग त’ फेकै छै अस्मानमे थूक

सत्यक’ सनेससँ स्नान करू अपन मनक मैल बहाबु नें ।


बितलाह बातके नैई सुर्ता करू पाँछा घुईरके नैई ताकू

जेबाक’ बहुत दूरतक य अपन डेगके आगा बढाबु नें ।


जीवनक’ अन्तिम सत्य मृत्यु छियै से यी बात अहूँ जानैत छी

कनें कैसके मुस्कुरा दिअ अपन चाँनके चकोर बनाबु नें ।


प्रयास प्रेमी मैथिल




 जहियासँ अहाँ प्रीतक पसाही लगाक’ गेलौं ।

हमर आँईखक निनिंञा अहाँ उडाक’ गेलौं ।


किछ नैई बुझैत छेलियै हम प्रीत प्यारमे

वन फोर थ्रीवाला हिसाब अहाँ सिखाक’ गेलौं ।


मन हमर छेलै पिआसल बहुत दिनसँ

आँईखक ईशारासँ प्रेम रस पिआक’ गेलौं ।


आब नित हेरायल रहैछी अहीँके यादमे

यी कुन जाँदू हमरापर अहाँ चलाक’ गेलौं ।


हमरा संगे नयनसँ नयन लडा लडाके

दिल चोरनी अहाँ हमर दिल चोराक’ गेलौं ।




 नयनक'  धनुखसँ  तीर  नैई  मारू  अहाँ ।

बनल  प्रेमक खोताके  नैई उजारू  अहाँ ।


खरायल   खरमास   हमर   दिलके   घर ,

अइमे   प्रेमक  लुत्ती  नैई  पजारू  अहाँ ।


जौं अहाँके  नजर   गडल  अछि   हमराप'

दिलक केवाडी खुल'ल अछि पधारू अहाँ ।


देखके  अहाँके   हमरो   मन  बहैक  गेलै ,

प्रेमक  फूलसँ  दिलक घर सिङ्गारू अहाँ ।


हम  अहाँके  भ'गेलौं  अहूँ भ'जाऊ  हमर ,

प्रेम  भरल  आरती  हमर  उतारू  अहाँ ।


आर. एन. मेहता




बिन मेघक वर्षै पाइन धर्ती ठनठन छै ।

ककरासँ कहि यी बात किओ नैई अपन छै ।


बहायल पसीना सब आई बेकार भ'गेलै 

रौदामे भसिआरहल सबटा अनधन छै ।


देखह पजरलै पसाही बिना लुत्तीके

तै पसाहीमे डैहरहल हमर जीवन छै ।


बिना माईर जिनगी तताईर देलक

यी जवानी क'रहल हमरा गन्जन छै ।


प्रयासक माथप' सिआनक बोझ भेलै भारी

कोनाक' घुरि पाँछा बोलारहल बचपन छै ।


प्रयास प्रेमी मैथिल





 एना जे अहाँ मनेमन मुस्कुरावै छी ।

किछ त' जरूर छै जे अहाँ छुपावै छी ।


दिलक' धडकन बता रहल अछि

नयनक' अकाशसँ प्रेम वर्षावै छी ।


अहाँके ठोरक' ईशारा हम बुझली

सबहक सामनें बोलैल' सर्मावै छी ।


सबटा जानैत अहाँ अन्जान बनिक'

आँखिक' सोझामे रहिक' तडपावै छी ।


मुहँ नैई खोलिक' लव यू कहि गेलौं

आँगा अहाँ चलू पाछूसँ हम आवै छी ।


आर. एन. मेहता

 



आँईखमे नोर सजाएके हम अहाँके बाट निहारैत छी ।

अहाँके स्वागतके लेल हम अपन दिलके बहारैत छी ।


दिलक' थालीमे अहाँ लेल भोजन परैईसक' राखल य ,

आबिक' भोग लगाब लेल हम अहाँके सोएर पारैत छी ।


दिलके बगैंचामे हम दुनू मिलके लगेली प्रेमक खोता ,

दूरदेश रहिक' अहाँ कहूँ आई खोता किय उजारैत छी ।


नितभोर दिनकरके दर्शन , काँ काँ करैत अछि कौउवा ,

थाकल दिल हाथमे ल'के लाठी कौउवाके फटकारैत छी ।


अटल  विश्वास  माहादेवके  पुजली  हमर विजय भेलै ,

बनिक' दुल्हिनियाँ आई हम अहाँके आरती उतारैत छी ।


Prayas Premi Maithil

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