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गजल - ४५


भावनाके सरोवरमे अहाँ आई नेहाए लिअ !
यै अपन भाग्यके एकबेर अजमाए लिअ !!

आब ककरो उपर विश्वास नई करु अहाँ ,
खेल खेलैसँ पहिने अहाँ हर्दा बजाए लिअ !

एहेन मोका फेर फेर नहि आयत कभियो ,
अहिबेर अहाँ अपन बदला सधाए लिअ !

छल, कपट सब सबकिछु सँ दूर रहिक' ,
अपन सुन्दर सपनाके घर सजाए लिअ !

कुलक' देहरिके एक अहिटापर आशा ये ,
यै अपन प्रेम सँ कुलक' दिप जराए लिअ !

💝प्रयास प्रेमी मैथिल®

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