maithilisahitya, मैथिली कव, मैथिली गजल, मैथिली गीत, मैथिली कथा, मैथिली साहित्य MAITHILISAHITYA: नाटक

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मैथिली साहित्य, मैथिली गजल, मैथिली कथा , मैथिली कविता, मैथिली गीत , कहमुकरी, चारपातिया

सामाचार

सामाचार
मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै       दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक

                    दहेज
             दृश्य :-  दशम्  (१०)


 समय :- बेरियाके ५ बजे
दृश्य :- आदित्य अपन अफिस सँ छुट्टी भेलाक वाद रुम जाएत रहै छै तही समयमे अनुप्मा अपन शादीके दहेजवाला बात सुनिके अपनाआपके अभागीके उपमा दैत आत्महत्या करऽ नदीमे डुवै लऽ  जाएत रहै छै की आदित्यके नजर अनुप्मा पऽ पडि जाएत छै । आदित्य अनुप्माके पैहचाएन जाई छै जे यी अनुप्मा अछि कहिक' । आदित्यके शंका भ'जाई छै ओकर हर्कत देखके आ आदित्य अनुप्माके आवाज दै छै । अनुप्मा पलैटके देखै छै आदित्यके तऽ अनुप्मा आउर तेजीस' भागे लागै छै । आब नदी झप देत तब नदीमे झप देत ताहीमे आदित्य पकडि लैत छै । )

अनुप्मा :-  हमरा नई जिबैके छै यी जीनगी । किए पकडलौ हमरा अहाँ आदित्य हमरा मरें दिअ ।

 ( अनुप्मा अपन तागत लगि आपनाके आदित्य सँ
 छोडावैले खोजै छै की आदित्य अनुप्माके गालमे दू झापड दै छै । अनुप्मा फेर आदित्के छाति सँ सैटके सिहैक सिहैकके कानें लागैत छै ।)

 आदित्य :- आत्महत्या केनाई पाप छियै अनुप्मा । की बात छै , की भेल ? कीए एहेन निर्णय लेलौं ?

अनुप्मा :- हमरा उपर बहुत बडका पहाड टुटि पडल जकरा हम सैह नहि सकलूँ आदित्य । जई लड्का संगमे हमर बिवाह तय भेल छला ओकर पिता जी कहलक जे शादी सँ एक दिन पहिने हमरा लग दहेजके ४ लाख पाय पठादू तब तऽ शादी हायत नहि तँ  नई । अहाँक तऽ मालुमे अईछ जे हमर पिता जीक' अवस्था । नोकरी क'के जीवन गुजारा संगे हमरा पढावैत छलै ।

आदित्य :- ए पगली आत्महत्या केनाई बहुत बड्का पाप छियै । अहाँके आत्महत्या भेला सँ यी समस्याके समाधान भ'जेतै की यी दहेजके रोग उकैन जेतै । कतेग दिन तक अपन जीनगी बिना देखल लड्काके संगमे दाउमे लगाव दैत रहब । हँ मानै छी जे माय बाप बेटा बेटीके पोसैपालै छै , पढावै लिखावै छै तऽ ओकर अधिकार बनै छै  मुदा यी नई की बेटा बेटी सँ बिना पुछनैं ओकर जीनगीके एतेक बड्का फैसला क'दी । आई अहाँ यी समस्या सँ पाछु भागबै , कआल्ही दोसर भागतै एनामे त' यी दहेजक धधरा आउर बढतै आ बढैत बढैत समुच्चा समाजके सुडाह क'देतै । अहाँ तऽ पढल लिखल छी । अहि जब एनंग हार मानि लेवै तऽ आउर बाँकी अनपढसब की करता । केकरो त अहिके बिरोधमे अवाज उठवे ने पडतै तऽ हमही अहाँ युवा किएक नई ?  चलूँ अखिन्तो किछु नई बिगडलै । घर जाऊ बाबु जी परेशान हेता ।

अनुप्मा :- अहिठाँ सँ हमर डेरा बहुत दूर अछि ।

आदित्य :- चलू कोई बात नई । बाबु जीके फोन नं. दिअ हम बाबु जीके फोन क'के जानकारी करा दैत छी । 

( अनुप्मा आदित्यके अपन बाबु जीके फोन नं. दैत छै आ आदित्य अनुप्माके बाबु जीके फोन करैत छै । अनुप्माके बाबु जी घबराएत फोन उठावैत छै । )


शिवप्रसाद :- हेलौ ! के छी ?

आदित्य :- हेलौ ! हम अंकल आदित्य अनुप्माके क्लेजके संगी जे ईनरूवामे एके क्लेजमे पढैत रहियै । अंकल अपने चिन्ता नई करु । अनुप्मा अखन हमरा लग अछि ।

शिवप्रसाद :- अनुप्मा अहाँ लगमे अछि ?

आदित्य :- हँ अंकल हमरा लग अछि । हई लिअ अनुप्मा सँ बात करु ।

अनुप्मा :- हेलौ ! बाबु जी ।

शिवप्रसाद :- अनुप्मा तू ठिक छिहि ने बौवा ?

अनुप्मा :- हँ बाबु जी हम एकदम ठिक छी ।

आदित्य :- अंकल अपने अनुप्माके शादीके चिन्ता नई करु ।जे लगन तय केनें छी ओही लगनमे अनुप्माके शादी जरुर होतै हँ अहिबेरक दुल्हा दहेजमे ४ लाख सँ बेसी मोलवाला चिज मागत ।

शिवप्रसाद :- बौवा अहाँ तऽ जानिते छी हमर अवस्था । एतेक बडका पाय हम कतऽ से दिअ सकब ।

आदित्य :- अंकल हम मजाक केलौ । सच्चमे अहिबेरक दुल्हाके पाय नई अहाँके घरके अनमोल चाँनके टुकडा अनुप्मा चाही वस अनुप्मा आरो किछु नई  । बस आब अपने शादीके तैयारीमे लाईग जाऊ अंकल । बाई....!

शिवप्रसाद :- बाई.....!

( आदित्य तुरन्त अपन मायके फोन क'के सब बात कहै छै आ रूम आवैके लेल बोलावै छै । विहान सवेरे आदित्य अनुप्माके ओकर बाबु जी लग पुगा दैत छै। दू घण्टावाद आदित्य अपन शरपर सेहेरा बान्हिके अनुप्माके बियाहै लँ जाएत छै । स्वंमवरके दृश्य पऽ दहेज विरूद्धके गीत संग नाटकके समाप्त होएत छै । )

दहेज बिरुद्ध गीत
=०=०=०=०=०=
करियौ सब किओ परहेज लियौ नै कियो दहेज-२ ।
संकल्प करू सब किओ अब करबै आदर्श शादी यौ ।
मिथिलाके कराबु दहेज सँ अजादी यौ ना ।

जख्ने शादीमे लेलौ अहाँ ढौवा -२ ।
बुझियौ बिक गेल हमर बौवा -२ ।
जबतक सब मिल बन्द नै करबै लै ल' दहेज यौ, 
धियाके उपर उभरैत रहत कलेश यौ ना ।

जबतक मिझायब नै दहेजक धन्धोर -२ ।
धियाके आइखसे बैहते रहत नोर -२ ।
अब त' रोकु सब किओ धियाके बर्वादी यौ ,
करै जाउ नें सब किओ आदर्श शादी यौं ना ।

धिया छैथ लक्ष्मीके रूप -२ ।
मिथिला छी किए चुप -२ ।
अब दहेज नैं ल' करू बेटाबेटीके शादी यौ ,
मिथिलाके दिलाऊ दहेज सँ अजादी यौ ना ।
करियौ सब किओ परहेज लियौ नै कियो दहेज-२ ।
संकल्प करू सब किओ  करबै आदर्श शादी यौ ।
मिथिलाेके कराबु दहेज सँ अजादी यौ ना ।

                                       धन्यवाद ।

                             💝प्रयास प्रेमी मैथिल®
मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै       दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक
                    दहेज
             दृश्य :- नौ  ( ९ )


समय :- भोरक' ९ बजे 
दृश्य :- सेठ धनलाल अपन दलान घरमे बैसल रहै छै । तहि समय हुन्के पर्वरिसमे पलल बढल आ ओकरे फैक्ट्रीमे मेनेजरके काज करिरहल हेमकान्तके प्रवेश ।

हेमकान्त :- प्रणाम मालिक !
धनलाल :- प्रणाम हेमकान्त ! कह् की समाचार ? सब ठिक छो नें । फैक्ट्रीमे काम निक सँ भ'रहल छै ने ?
हेमकान्त :- कामकाज सब ठिक छै हुजुर ।
धनलाल :- तब फेर कोन काज सँ एलह ?
हेमकान्त :- मालिक हमर पुत्रके शादीके निमन्त्रण देवकलेल एलौं ।
धनलाल :- अच्छा से बात । आंई रौ हमरे शिरे तोहर  बेटा पढल्कौ लिखल्कौ आ शादी करै बेरमे हमरा सँ पुछोताछ नें ? 

( अहि बिचमे सेठ धनलालके बेटा गज्जु नारायण चलि आवै छै । )

धनलाल :- कहिया छियौ बेटाके शादी ? 
हेमकान्त :- हुजुर दू दिनके बाद बाँकी सबकिछु कार्डमे लिखल अछि ।
धनलाल :- बौवा गज्जु देखही तs की नाम छियै लड्की आ लड्की बापके ?
गज्जु :- जी पिता जी हम देखैत छी । 

( गज्जु कार्ड देखै छै त' ओहे अनुप्मा जकर कारने हम आदित्य सँ पिटाई खेनें छलूँ । )

गज्जु :- पिता जी यी त'  ओहे छोरी छियै जकरा कारणे आदित्यके संगमे हमरा झगडा भेल छलै ।  आ हमरा अदितबा पिटने रहै । 
धनलाल :- अच्छा आब आबि गेलै ने मुर्गी लाईन पर ।  देख हेमकान्त शादी करै छेहे बड निक मुदा दहेज कतेक देल्कौ ।
हेमकान्त :- सरकार दहेजके विषयमे हम किछु बातचित नई केलौ । बुझू जे हम बेटाके आदर्श शादी क'रहल छी । 
धनलाल :- हमर बात सुन । लड्कीके बापके फोन क'के कही जे हमर आ एक दिन अगाडी दहेजके ४ लाख पाय चाही  तब हेत हमरा बेटा सँ अहाँ बेटीक' शादी ।
हेमकान्त :- सरकार हम त' बचन द'देनें छियै । 
धनलाल :- तोरा दोस्त चाही की हम ? 
हेमकान्त :- नई सरकार अहाँ ।
धनलाल :- त' फेर जे कहलियो से कर ।

( हेमकान्त सेठ धनलालके कहल अनुसार लड्कीवालाके फोन करै छै आ ओम्हर लडकीके पिता शिवप्रसाद फोन रिसिभ करै छै । )

शिवप्रसाद :- हेल्लौ ! के ?
हेमकान्त :- हम हेमकान्त ! शिवप्रसाद जी हम त' एकटा बात अहाँके कहैले बिसरी गेल रहि ।
शिवप्रसाद :- की बात ?
हेमकान्त :- कहलू की जे हमर दहेजके ४ लाख पाय कल्हिखुन साँझतकमे  हमरालग पहुँच जेबाक चाहि ।

 (यी फोनपरके सब बात शिवप्रसादके बेटी अनुप्मा सुनि लैत छै )

शिवप्रसाद :- यी की कहिरहल अछि अपने । हम एतेक पाय कतs स' लावबै । ओहोमे एक दिनके भितरमे । यी अहाँ बडका धोखा क'रहल छी हमरा संगमे ।
हेमकान्त :- हम सेसब नई बुझै छी । हमरा कल्ही साँझधरिमे पाय पहुँच जेबाक चाहि  त पहुँच जेबाक चाहि । नई त' बुझू यी शादी नई हायत ।

( एतेक कहिके हेमकान्त फोन राखिदैत छै )

धनलाल :- आब देख्तै जे हमरा बेटाके पिटाई करबावैके नतिजा की होएत छै । 

( तकराबाद हेमकान्त अपन घरदिस प्रस्थान करै छै । रसेरस पर्दा खसैत छै । अहिठाँ आविके नवम् दृश्यके समाप्ति । )

💝प्रयास प्रेमी मैथिल ®
मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै       दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक
                    दहेज
             दृश्य :- आठ  ( ८ )


  १० सालवाद

समय :- भोरक' ११ बजे ।
दृष्य :- आदित्य शिखाके ओकर घरतक पहुँचावै लऽ दुनू गोटे घर सँ निक्लैके तैयारीमे रहै छै  ताही बिचमे नोकरीके लेल ईन्टरभ्यु देल अफिस सँ आदित्यके फोन आवै छै । आदित्य फोनमे बात करिके फोन की राखै छै फेर दुवार पऽ आदित्यके नाम सँ डाँकिया एक चिट्ठी ल'के आलि जाएत छै आ आदित्यके दैत छै ।

मोबाईल :- ट्रिङ..ट्रिङ...ट्रिङ...

आदित्य :- हेल्लौ ! सर नमस्कार ।
मोबाईल :- नमस्कार ! बधाई अछि आदित्य अपने ईन्टरभ्यु देलाह सबगोटामे सँ  अहाँ सबसे निक आ बेसी प्रतिशत सँ पास भेलौं । तै अहाँ एक सप्ताहके भितर आविके अपन काज शुरु क'सकै छी । हम सब अहाँके प्रतिक्षामे रहब ।
आदित्य :- जी सर होतै । धन्यवाद सर ।
मोबाईल :/ जी ! बाई ।
डाँकिया :- आदित्य भाई !
आदित्य :- की भाई जी , की बात छै ? किछु चिट्ठीपत्री छै की ?
डाँकिया :- हँ अहाँक नाम सँ एक चिट्ठी अछि, हे हई लिअ ।
आदित्य :- धन्यवाद भाई जी । देख्लौ शिखा हमथ भाग्य । आइये नोकरीके खबर आ अनुप्माके चिट्ठी एकसाथ ।लिअ शिखा आब कनेकाल रुकिजाऊ देखैत छी जे एतेक दिनके वाद अनुप्मा की लिखिके पठौने छै ।
शिखा :- अच्छा होतै ।

( आदित्य चिट्ठि खोलिके मनेमन पढै छै आ पढिते पढिते बेहोस भ'जाई छै । )

                     #चिट्ठी

प्रिय आदित्य ...

                   प्राण प्रीतम आदित्य होई सके तऽ हमरा बिसरैके कोशिस करब किएक की हम आब दोसरके होब जारहल छी । हमर शादी किओ दोसर ब्यक्तिके संग तय भ'गेल । यी शादी करै लेल हम मंजुर नई रहि । किछु बाध्यता आ मजबुरीके कारण हमरा यी शादी करैके लेल राजी होब पडल । अहाँ हमरा बेवफा सम्झु आ जे । होई सके तऽ हमरा माफ करब । अगिला जन्ममे सिर्फ अहिके लेल बनिके आयब ।

                              --अहाँक अनुप्मा 

शिखा :- आदित्य ! आदित्य !  की भेल । स्वरलता काकी । काकी देखही आदित्यके की भ'गेलौ ।
स्वरलता :- की भेलै बौवा  की भेलै ? यी तऽ बेहोश स छै । पानि आनु बौवा पानि !

( शिखा दोडिके पानि आनिके आदित्यके चेहरा पऽ छिटै छै आ आदित्यके होस आवैत छै । शिखा आदित्यके हाथ सँ चिट्ठी ल'के पढैत छै आ सब बात आदित्यके माई स्वरलताके कहि दैत छै । तकराबाद आदित्यके आदित्यके माई आ ओकर संगी शिखा सम्झावैत कहै छै । )

स्वरलता :- देखही बौवा बेसी चिन्ता नई करही । एकटा रस्ता बन्द भ'गेला सऽ पुरा जीनगीके रस्ता नई बन्द होएत छै । आरो बाँकी बहुतो हजारो रस्ता छै । आई देखही तोरा एकदिस तोहर नव जीवन प्रतिक्षा करिरहल छौउ । बेसी टेन्सन नई लही । आब अपन नोकरीपर जेबाक लेल सोच । जे भ'गेलै ओकरा बिसरी जाउ । सम्झाउ शिखा बौवा !

शिखा :- देखूँ आदित्य जे होबाक छलै से भ'गेलै आब आगाके लेल सोचूँ । स्वरलता काकीके एक अहि सहारा छी । अहूँ अदि एनंग करऽ लागब तऽ काकी ते बेसहारा भ'जेतै ।

आदित्य :- जब अहाँसब कहै छी तऽ हम बिसरैके कोशिस करबै । लिअ शिखा चलूँ अहाँके घरतक हम पहुँचा दैत छी ।
शिखा :- नई  अहाँके अरामके जरुरी अछि , अहाँ अराम करु हम अपनेचलिजेबै ।

( आदित्य आराम करै छै आ शिखा अपन घरदिस प्रस्थान होई छै । रसेरस पर्दा खसैत छै आ अहिठाँ आबिक आठम् दृश्यके समाप्ति । )

💝प्रयास प्रेमी मैथिल ®
मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै       दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक
                    दहेज
             भाग :-  सात ( ७ )

समय :- भोरक' करिब १० बजे
दृश्य :- आदित्य बैठक घरमे बैसके किताब देखैत रहै छै । एतबहीमे मोबाईलके घण्टी बजै छै । 

मोबाईल :- ट्रिङ..ट्रिङ...ट्रिङ....

आदित्य :- हेल्लौ ! के बजै छी ?

मोबाईल :- हेल्लौ ! हम बजै छी आदित्य ! अनुप्मा ।

आदित्य :- अनुप्मा ! कहूँ की समाचार , ठिक छी ने ?

मोबाईल :- हँ हम ठिक छी । अहाँ ठिक छी ने ? 

आदित्य :- हँ हमहूँ ठिक छी । 

मोबाईल :- आदित्य हमरा अहाँ संगे किछु जरूरी बात करऽके अछि ।

आदित्य :- की बात कहऽ चाहै छी बाजु ने ?

मोबाईल :- नई आदित्य यी फोन पऽ नई कहऽ सकब बहुत लम्बा बात छै । अहाँ एक घण्टाके भितर राधाकृष्ण मन्दिर आबु ओहिठाँ भेटके कहब ।

आदित्य :- अच्छा ठिक छै हम आवै छी  आ अहूँ आबु । 

 ( आदित्य साईकिल निकालै छै आ चैल दैत छै अनुप्माके भेटैल' । एमहर अनुप्मा पहिले सँ राधाकृष्ण मन्दिरमे आबिके आदित्यके आवैके बाट निहारैत रहै छै  ताकि आदित्य पहुँची जाएत छै । )

अनुप्मा :- चलि एलौ ?

आदित्य :- हँ ! अहाँ नई देखैत छी जे हम एलु आ नई एलु ? कहूँ की बात कहऽ चाहै छी ?

 ( आदित्यके एतेक बात सुनिके अनुप्मा आदित्यके छातिमे सैटके सिहैक सिहैक कानें लागै छै । अनुप्माके अपन छातीमे सैटके कानैत देखके आदित्य अनुप्मा सँ पुछै छै । ) 

आदित्य :- की भेल अनुप्मा ? की बात छै ? कहूँ त ' सहि एना कानैत रहब तऽ हम कोना बुझब की भेलै से ?

अनुप्मा :- आदित्य यी हमर अहाँ संगके अन्तिम भेट अछि ।

आदित्य :- से किए ? कोनाके अन्तिम भेट ? अहाँके नई देखब तऽ हम अहाँ बेगर पानि बुनुके माछ जेका भ'जेब अनुप्मा ।

#अनुप्मा :- हमहूँ अहाँ बेगर एकपल नई रहिसकब आदित्य । मुदा की करब बाबु जीके अहिठाँ सँ ट्रान्सफर बिराटनगर भ'गेलै । आब हमर बाँकीके पढाई बिराटनगरेमे करऽ पडतै ।आब अहि कहूँ आदित्य हम की करि से ? 

( आदित्य किछुकाल सोचिक' बजैत छै । )

आदित्य :- धत पगली एतबेटा बात खातिर कानै छी ।अरे अनुप्मा अहाँ हमरा सँ आ हम अहाँ सँ कतबो दूर किएक नई भ'जेबै मुदा हम दुनू रहबै हरदम एकदोसरके साथमे । हम अहाँक' छी आ अहाँ हमर छी । अहाँ हमर दिलमे छी । हमरो अहाँ अपन धडकनमे बैसा लिअ । बाँकी बातचित मोबाईल फोनपर आ चिट्ठी सँ .... बाई..बाई...।

( एतेक कहिके दुनू एक दोसर सँ विदाई होएत छै , रसेरस पर्दा खसै छै आ अहिठाँ आबिक' दृश्य सातके समाप्ति । )
मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै       दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक
                    दहेज
             दृश्य :-  षष्टम् ( ६ )

समय :- दूपहरके करिब १बजे
दृश्य :- बल्लूके माई भिखनी देवीके जेल सँ छुटैके समय । बल्लूके माईके तबियत बिग्रल जेका बुझाएत छै ।

चौकिदार :- लिअ आई सँ अपने जेल सँ मुक्त भेलौ । अपनेके सजाय समाप्त भ'गेल ।

भिखनी :-  खो..खो...खो....। हे भगवान यी खोकी जान ल'के छोडत बुझाय ये ।

 बल्लू :- मा ... मा...

( चौकीदार बल्लू सँ पुछैत छथि )

चौकिदार :- यी अहाँक माई अछि ?

 बल्लू :- हँ , हमर माई अछि ।

चौकिदार :- माईके घर ल'जाईके निक सँ इलाज करब हुन्कर तबियत दिनोदिन बिग्रैत जारहल देखै छी ।

बल्लू :- जी सर होतै । चल माई चल घरे ।

( एक सप्ताह बाद )

( बल्लूके माई बहुत बेमार रहैत छै । में बल्लू माईके दबाई किनै लेल बजार जाएत रहै छै  । रस्तामे बल्लू देखै छै बैजु आ मंगलीके फुटपात पऽ बैसल आ जाईके भेटै छै ।)

बल्लू:- बैजु काका छहऽ हौ ?

बैजु :- के ? बल्लू

बल्लू :- हँ काका हम बल्लू । मर काका  यी की ? तू सब फुटपात छहऽ एना केना ?

बैजु :- सब तक्दीरके खेल अछि बौवा । बेटीके बियाहमे घर घरेरी धितो राखिके पाय लेनें छेलि से पाय फिर्ता करऽ नई सकलि अन्त्यमे जमिनजथा सेठ जपथ क'लेल्कै ।

बल्लू :- एकर मतलव तहूँ यी दहेजक मसिनमे पिसा गेलहऽ । काका यी तक्दीरके खेल नई अछि । हमर अहाँक समाजके कू-रिति , कू-पर्था आ कू-संस्कार अछि । जाधरि यी दहेज नामक कैंन्सरके
समाजसे उन्मुलन नई हायत ताधरि हमरा अहाँ सनके लाखो लोक घर सँ बेघर हेब आ बेटीसब मरत घर जरत ।यी केहेन संस्कार अछि । आखिर कबतक यी कू-पर्था । चलऽ हमरा संगे ।

बैजु :- कतऽ बौवा ?

बल्लू :- हमर घर काका आउर कतऽ जेभह ।

( बल्लू अपन माईके दबाई किनिके बैजु आ हुन्कर जीवनसंगिनी मंगलीके ल'के अपन घर चलि देलक । बजार सँ दबाई ल'के आबै छै ताबेतकमे एम्हर घरमे बल्लूके माई दर्द सँ छटपटाएत छटपटाएत अपन प्राण तियागी देनें रहै छै । बल्लू माईके मृतक शरिरके  देखिकऽ विभोर भ'के कानें लागै छै। बैजू दुनू ब्यक्ति बल्लूके सम्झावै छै ।)

बैजु :- देख बेटा नई कान्ही । यी त' प्रकृतीके नियम छियै जे एलै ये ओकरा एक दिन अही संसारके तियागीके जाईये पडतै । एकदिन हमरो तोरो यी मानव चोलाके तियाग करऽ पडतौ ।
(तकराबाद बल्लू अपन माईके मृतक शरीरके दाह संस्कारके काजमे लागि जाएत छै । धिरे धिरे पर्दा खसैत छै आ अहिठाम आबिक' छठम् दृश्यके समाप्ति होएत छै । )
मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै       दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक
                    दहेज
             दृश्य :-  पाँचम्

समय :- भोरक करिब ८ बजे
दृश्य :- मुनिम चौपटलाल चायके पिवैत हिसाबके खाता बही देखैत तही समयमे सेठ धनलालके आगमन ।

धनलाल :- की मुनिम जी सब हिसाबकिताब ठिक अछि की नई ।

चौपटलाल :-  सरकार सब ठिक छै । मुदा..

धनलाल :- मुदा की .. ?

चौपटलाल :- मालिक ऊ बैजूवाला खाताके म्यादो सँ बहुत बेसी भ'गेल अछि । मुदा ओ अखनधरि सुदब्याज किछु नहि बुझेनें छैक ।

धनलाल :- ए ! सहीमे मुनिम जी हम त' बिसरी गेल छलहूँ ।ओकर सुद ब्याज जोडिक कतेक हौएत छै ?
चौपटलाल :-  मालिक अखनधरिके ब्याजसहितके हिसाब ओकर जमिन जथाके बराबर भ'गेलै ये ।

धनलाल :- ओकरा एक सप्ताहके भित्तर पाय पठावैके समाद पठा दियो । देखूँ अपन काज भेलै भ'गेलै , लोकके किछु हौं नई मतलब । 

( मुनिम चौपटलाल कर्जाके हिसाब क'के बैजुके घरे जाएत छैक । बैजु दुवारपर बैसल रहैत छथि आ मुनिमके आवैत देखिक बैजु..)

बैजु :- मुनिम जी नमस्कार ! बैसु ।

चौपटलाल :- देखूँ बैजु बाबु हम अहाँलग बैसऽ लेल नई आयल छी। हम यी कहऽ आएल छी जे बैटीके विवाहके लेल ढौवा जे लेेनें छेलौं  तकर सुद ब्याज जोडिक अहाँके जमीनो सँ बेसी भ'चुकल ये आ मालिकके हुकुम अछि जे एक सप्ताहके भितर पाय बुझावैलऽ नहि त हम घर , जमिन सब जफत करब । हम एहे जानकारी कराब एलूँ अपनेके ।

बैजु :- हे मुनिम जी एना नै कहूँ , हम ब्यवस्थामे लागल छी । हमरा पायके ओरिआन हविते हम चुकादेब ।

चौपटलाल :- ४ साल भ'गेल अखनधरि ओरिआन नै भेल ये । ध्यान राखब एक सप्ताहके समय देल गेल अछि बाँकी एक सप्ताहके बादमे...।

( एक सप्ताह बित जाएत छै मुदा बैजु पाय बुझावै नई सकै छै फलस्वरुप धनलाल अपन किछु लोकके ल'के आवै छथि आ बैजुके घर खाली करऽ लेल कहैत छै  [ रिसाएल आवाजमे ] )

धनलाल :- बैजु ! घर खाली करु । पाय लेब बखतमे एक सालके भितरमे द'देब अखन चाइर चाइर साल भ'गेल आ बहाना देख्वै छी जे पायके जोगार नै भेलै । लाज होबाक चाही निर्लज कहींके ।

( बैजु कानैत कल्पैत धनलालके पायर पकैरके बिन्ती करैत छथि..)

बैजु :- मालिक दाया करु हमरा पऽ आ आउर किछु दिन समय दिअ हम अहाँके पाय पाय चुका देब ।

धनलाल :- पाय पाय चुका देब चाइर साल बित गेलै किछु ने करऽ सकले आब तू कतऽसे आन्बे ? चल घर खाली कर ।


( घर सँ सब किछु बाहार क'दैत छै आ बैजु दुनू ब्यक्ति कानैत घर सँ निकल पडैय छै । धिरे धिरे पर्दा खसैत छै । अहिठाँ आबिक' पाँचम् भागके समाप्ति ।
मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक
                    #दहेज
             दृश्य :-  चौथा

समय:- बेरियाके ४ बजे
दृश्य :- विधालयके छुट्टी होएत छै आ विधार्थी लोकिन अपन अपन घर जाएत रहैत अछि ताहि क्रममे अनुप्माके गज्जु नारायण (गज्जु) जिस्कावैत छै जकर कारण दूनोमे वादविवाद शुरु भ'जाई छै आ ताहि बिचमे आदित्यके प्रवेश ।

गज्जु :-  वाह ! यार की माल छै , हुस्न त' एकर बेमिसाल छै ।

अनुप्मा :- अहाँक' घरमे माय बहिन नई अछि की ?

गज्जु :- ओह डार्लिंग घरमे त' माँ , बहिन सब अछि मुदा एकटा घरबाली नई अछि । अहाँ हमर घरबाली बैन जाउ , कसम सँ खुश क'देब अहाँक हम ।

अनुप्मा :- मुँह सम्हारिके बाजही नहि त' यी जुत्तिके नम्बर ईस्टाम जेका छपा जेतौ गालपर ।

आदित्य :- ठिके त' कहै ये । अहाँक घरमे माँ , बहिन नई अछि की जे एना बाट चलैत एक सरिफ लडकीके जिस्कावै छी ?

गज्जु :- ऐ तु के छिही रे बिचमे बाजैवाला ? यी हमर आ ओकर बिचके मामला छियै , जो तू अपन रस्ता नाप ।

आदित्य :- अगर नई जेबै त तू की क'लेबेए ?

(अहि बताबतीमे गज्जु आ आदित्यके बिचमे झगडा शुरू भ'जाएत छै आ आदित्य गज्जुकज खुब पिटाई करैत छै । अन्त्यमे गज्जु आदित्यके गरिआबैत भागि जाएत छै )

 गज्जु :- सार तोरा देख लेबौ ! आ तोरा छौरी देख लिहिए , तोरा एकदिन एहेन मौडपर पुगा देबौ जे तू अपन जीनगी सँ नफरत करभिही ।

आदित्य :- जो जो बहुत देखली तोरा सन , बड बड घोडी भासल जाए नडघोडी पुछैए कतेक पानि !
 ( गज्जु संग झगरैमे आदित्यके माथामे चोट लागि जाएत छै आ खुन बहैत रहै छै , से देखिक अनुप्मा अपन सल (ओढनी )चिईरके बाईध दै छै । आदित्य एकटक मात्र अनुप्मा चेहरा निहारैत छै आ पुछै छै ।

आदित्य :- अहाँक नाम की अछि आ कतs ये अहाँक घर ?
अनुप्मा :- जी ! हमर नाम अनुप्मा छी आ हम अई क्लेजमे नव माने भर्खर आयल छी ।
आदित्य :- ए ! हमहूँ अही क्लेजमे पढै छी, वस अहाँस' एक स्टेप सिनियर छी हम । सच्चमे एकटा बात कहूँ ? 
अनुप्मा :- की बात ? कहूँ ने ।
आदित्य :- सच्चमे अहाँक चेहरा चानसन अईछ । अहाँ बड सुन्दर छी ।अहाँ त' चन्द्रमुखी छी । 


(गीतक शुरु होएत अछि ।
गोरी चन्द्रमुखी रुप अहाँके चमचम चमकैय
दैछी जखने मुस्कि,दिल ई धकधक धडकैय!

चालि अहाँके मतवाली,चलैछी धर्ती हिलाके
देखिते पिछा पडैय,सबटा छौडा मिथिलाके
गोर गोर पुरा बदन अहाँके गमगम गमकैय
 दैछी जखने मुस्कि••••
....... ......... .......
आँखी अहाँके मृग नैनी,गाल आम सेनुरिया
मोहनि सुरत स अहाँ,गिरबैछीयै बिजुरिया
रसगर ठोरस अहाँके मधुरस टपटप टपकैय
 दैछी जखने मुस्कि••••


मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक 
( दहेज )



दृष्य: तेसर
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समय : भोरक' १० बजे ।
दृष्य : बैजुके अहिठाम पण्डित अनौखीरामके आगमन ।

अनौखी : तकऽ छी यौ बैजु बाबु ?
बैजु : के ? पण्डित जी ! कहूँ की समाचार ?
अनौखी : अहाँके बचियाके बियाहक' बात हम ३ लाखमे फाईनल कsदेलुँ । लड्का वाला नैं मानैत छेल मुदा अहाँके बचियाके नीक स्वभावके कारण ३ लाखमे मानिगेल । आब अहाँ लोकिन पायके जोगार करु आ जतेक जल्दी हुवे ततेक जल्दी बियाहक दिन तय करू ।
बैजु : जी पण्डित जी होएतें । हम बहुत जल्दिए पायके जोगार कऽके अहाँके खबर पठादेब ।
आनौखी : लिअ हम अखन जल्दीमे छी , बाकी बात बादमे करब ।
बैजु : जी पण्डित जी होएतै ।

 ( तेकरबाद पायके जोगारके लेल बैजु सेठ धनलालके अहिठना जाएत छै । सेठ धनलाल अपन दलानमे बैसल रहैय छथि । )

बैजु : प्रणाम सेठ जी !
धनलाल : प्रणाम बैजु बाबु ! आइ बिहानें बिहान एमहर ! सब कुसल मंगल अछि नें ?
बैजु : जी सब कुसल मंगल अछि ।
धनलाल : तब कहूँ की काजसे एलौं ? अहाँ त' कहियो नै आवैत रहौं ।
बैजु : सरकार अपन बचिया सरिताके बियाहके बातचीत पक्का भ'गेलैय ।
धनलाल : ए , त' अहाँ पायके लेल एलियै यें !
बैजु : जी मालिक ।
धनलाल : पाय तँ हम देब मुदा ब्याज पुरा सेकडा ४ टाका लागत आ अहाँके जमिन राख पडत भर्ना तब देब हम पाय ।
बैजु : जी मालिक हमरा मंजुर अछि ।
धनलाल : मुनिम चौपटलाल !
चौपटलाल : जी हुजुर, सरकार कहल जाऊ की हुकुम ।
धनलाल : बैजु बाबुके कतेक पाय चाही तिजोरी सँ निकालीके कागजी करबायके साथ सहीछाप कऽके दऽदियौ ।
चौपटलाल : जी हुजुर हम अखन तुरन्त कऽदैत छी ।
चौपटलाल : आउ बैजु बाबु आउ । लिअ तखन अहाँ अहिठाम छाप लगादिअ तें थुक लगाके हे..हे..।

( बैजु सँ सदा कागजमे छाप लगाके पाय दैत अछि ।)

बैजु : भेल नें मुनिम जी आब ?
चौपटलाल : हँ. हँ. भ'गेल । हे. लिअ पाय थुक लगाके । हे.. हे..।

(तकरबाद बैजु घर जाएत छै आ बियाहके तैयारी करैय छथि । दू दिनके वाद पुरा आजा  वाजाके साथ बैजुके बेटी सरिताके बियाह समपन्न होएत छै । बराती बर कनियाँके लऽके विदाई होएत छै । )

पर्दा खसैत छै। तेसर दृष्यके समाप्ति ।

प्रयास प्रेमी मैथिल®

 " दहेज "( दृष्य -दोसर )

समय: बिहानके १० बजे ।
दृश्य: बैजुके बेटी सरिता बियाहक जोग भ'गेला अही विषयपर मंगली आ बैजु बातचित करैत रहैत छथि ततवेयमे पंडित अनौखीरामके प्रवेश ।

बैजु : प्रणाम पंडित जी !
अनौखीराम : प्रणाम ! जजमान प्रणाम !
बैजु : बिहानें बिहान केमहर चलिदेलौं पंडित जी ?
अनौखीराम : पुवैरिया टोलामे प्रसदिया अहिठना स' दल अछि तै हुनके ठिना जाएत रही मुदा अहाँ दुनू ब्यक्तिके देखलूँ बतियावैत त' सोचलियै भेट कऽली ।
बैजु : बड्ड नीक केलूं अहाँ मुदा हमरो अहाँ स' भेटऽके छेल एकटा काजसें !
अनौखीराम : कुन काज अछि जजमान कहूँ हम अखन दुवार पऽ आयल छी । हमरा ओमहर सऽ घुमैयमें २/४ दिन लागिजेत ।
बैजु : पंडित जी अपन बचिया सरिता बियाहक जोग भ'गेलै । अहाँ तँ सगरो पुजापाठमे जायत रहै छी । से नैं सरिताके लेल एकटा नीक घरबर खोजबाक अछि ।
अनौखीराम : से बात तऽ अहाँ सही कहलौं । हँ हमरा नजरमे एकटा लडका अछि  मुदा.....!
बैजु : मुदा की पंडित जी ?
अनौखीराम : बैजु बाबु अहाँके तँ सब बात मालुमें अइछ जे आइकल लडकाके बापके गृहलक्ष्मीके संग धनलक्ष्मी सेहो चाही । पाटी बड्ड नीक बेजोर अछि मुदा ओकर मागो ततवेय अछि ।
बैजु : कतेक छै ओकर डिमाण्ड पंडित जी ?
अनौखीराम : एहे ३/४ लाखके बीच ।
बैजु : जाऊ पंडित जी अहाँ बात करु हम पाय दैलऽ तैयार छी ।
अनौखीराम : आब अहाँ चिन्ता जुनि करु । आब यी पंडित अनौखीराम बात करऽ जारहल छै तें बुझ़ू बचियाके बियाह फिक्स भ'गेल । लिय अखन हम जाइ छी ।
बैजु : अच्छा हेतैं पंडित जी ।

 ( पंडित अनौखीराम ओहिठना सँ चलिदैय छै )
मंगली : आँइ यौ घरमे लाख रुपैयाँके जोगार नैं अइछ आ पंडित जीके ३/४ लाखपर बात करैय लेल कहिदेलौ ! कतऽ से लाबवैय एतेक पाय ?
बैजु : खेत भर्ना राखि देवै । अहाँ तँ देखवें केलौ भीखनीके पुतौहक दसा । की अपनो सरिताके ओहीनती देख चाहै छी ?
मंगली : लिय जै सँ नीक हुवें से काज करु ।

( दुनूं ब्यक्ति बरण्डा सँ उठिके घरके भितर जायत छै । )
 पर्दा खसैत अछि दोसर दृष्यके समाप्ति ।

प्रयास प्रेमी मैथिल®


मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक

दहेजनाटक


दृश्य: प्रथम ,
समय: बिहानक'

( कल लगक दृश्य , बलूके कनियाँ भाँडावर्तन माँझैत , किछुकाल वाद बलूके माँ भिखनीके एनाई आ बलूके कनियाँ माने अपन पुतौहके गरिएनाई शुरु )

‪‎भिखनी‬:- गै कूलक्षिनी , सुरुज उगिके कतऽस कतऽ गेलै आ तू अखन भर्खर हाँडी माँझ बैसलेए । भाइ बापके कपार परके बोझ रहिं । दहेजमे गछल पाय आ सामानसब अखनतक नें देलक । गुलटेनमाँके देखूँ सामिनसे घर भरि दलकै यें आ मोटरसाईकल सेहो देलकै । हमर बेटाके तँ कपार फुटल रहै जे अहि उसनहैर संग बियाह भेलै । हे भगवान ! भागबो नें करे छै ।

( एतेक बाजिके भिखनी बारीके काजमे जाई छै । एमहर बलूके कनियाँ ताराके सबदिनके हरहर खटखठ आ गरिएनाई सुनिके असहज भ'जाएत छै। अन्तमे कानैत तारा भाँडावर्तन मझनाई छोडिके घरके भितर चलि जाएत छै । किछुकाल भिखनीके अंघनामे प्रवेश ।)

भिखनी:- की करैं छह हे घरमें , घर खोल नें हे ? रे गुलटेन बौवा घरमे छिहि नें रे ?
गुलटेन‬:- हँ काकी हम घरे मे छियै । कहूँ कथी कहै छी ?
भिखनी:- बौवा एकबेर दौडिके हमरा अहिठना आ नें रौं ।
गुलटेन:- की भेल काकी, की भेल ?
भिखनी:- देखही ने बलूके कनियाँ घरमे ढुकिके ओमहरसे बिलैया लगा लेने छै खोल कहै छियै तँ नैं खोलिरहल छै ।

(अही बिचमे भिखनीके बेटा बलूके बिदेश सँ घर एनाई )

‪‎बलू‬:- की भेलै माँ ? की भेलै गुलटेन भाइ ?
गुलटेन:- की हायत ! हरदम काकी भौजी पs बरबराइत जे रहै छेल तैं...! भौजी यै , यै भौजी केवार खोलूँ ?

(अन्तमें बलू आ गुलटेन मिलिके केवार तोडिके घर भितरके दृश्य देखै छै तारा 'बलूके कनियाँ' फाँसी लागल । बलू छाती पिटपिट कान लागैत छै , गामक'लोग जम्मा भ'जाएत छै , पुलिस आवै छै आ छानबिनके बाद भिखनीके जेल होएत छै। बलू अपन पत्नीके फाँसीलागिके आत्महत्या केला दृश्य देखि कऽ. पागल भ'जाएत छै आ घर छोडिके जनेतनें बौवाबें लागल ।)
पर्दा खसैत अछि।
प्रथम दृश्यके अन्तय ।

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