maithilisahitya, मैथिली कव, मैथिली गजल, मैथिली गीत, मैथिली कथा, मैथिली साहित्य मैथिली चेतनामुलक नाटक "दहेज " भाग - ४ | MAITHILISAHITYA

फ़ॉलोअर

मैथिली साहित्य, मैथिली गजल, मैथिली कथा , मैथिली कविता, मैथिली गीत , कहमुकरी, चारपातिया

सामाचार

सामाचार

मैथिली चेतनामुलक नाटक "दहेज " भाग - ४

मिथिलामे आगीके धधरा जकाँ बढैत जारहल छै दहेज , जेकर कारण कतेकके आत्महत्या करऽ पडैय यें, कतेकके घरसे बेघर हुवँ पडैय छै तऽ किनको शादी हुवैय सँ पहिनें आत्महत्या करऽ लेल मजबुर कऽदैत छै यी दहेज । अही विषयबस्तुसबके समिटिके लिखल गेल मैथिली चेतनामुलक नाटक
                    #दहेज
             दृश्य :-  चौथा

समय:- बेरियाके ४ बजे
दृश्य :- विधालयके छुट्टी होएत छै आ विधार्थी लोकिन अपन अपन घर जाएत रहैत अछि ताहि क्रममे अनुप्माके गज्जु नारायण (गज्जु) जिस्कावैत छै जकर कारण दूनोमे वादविवाद शुरु भ'जाई छै आ ताहि बिचमे आदित्यके प्रवेश ।

गज्जु :-  वाह ! यार की माल छै , हुस्न त' एकर बेमिसाल छै ।

अनुप्मा :- अहाँक' घरमे माय बहिन नई अछि की ?

गज्जु :- ओह डार्लिंग घरमे त' माँ , बहिन सब अछि मुदा एकटा घरबाली नई अछि । अहाँ हमर घरबाली बैन जाउ , कसम सँ खुश क'देब अहाँक हम ।

अनुप्मा :- मुँह सम्हारिके बाजही नहि त' यी जुत्तिके नम्बर ईस्टाम जेका छपा जेतौ गालपर ।

आदित्य :- ठिके त' कहै ये । अहाँक घरमे माँ , बहिन नई अछि की जे एना बाट चलैत एक सरिफ लडकीके जिस्कावै छी ?

गज्जु :- ऐ तु के छिही रे बिचमे बाजैवाला ? यी हमर आ ओकर बिचके मामला छियै , जो तू अपन रस्ता नाप ।

आदित्य :- अगर नई जेबै त तू की क'लेबेए ?

(अहि बताबतीमे गज्जु आ आदित्यके बिचमे झगडा शुरू भ'जाएत छै आ आदित्य गज्जुकज खुब पिटाई करैत छै । अन्त्यमे गज्जु आदित्यके गरिआबैत भागि जाएत छै )

 गज्जु :- सार तोरा देख लेबौ ! आ तोरा छौरी देख लिहिए , तोरा एकदिन एहेन मौडपर पुगा देबौ जे तू अपन जीनगी सँ नफरत करभिही ।

आदित्य :- जो जो बहुत देखली तोरा सन , बड बड घोडी भासल जाए नडघोडी पुछैए कतेक पानि !
 ( गज्जु संग झगरैमे आदित्यके माथामे चोट लागि जाएत छै आ खुन बहैत रहै छै , से देखिक अनुप्मा अपन सल (ओढनी )चिईरके बाईध दै छै । आदित्य एकटक मात्र अनुप्मा चेहरा निहारैत छै आ पुछै छै ।

आदित्य :- अहाँक नाम की अछि आ कतs ये अहाँक घर ?
अनुप्मा :- जी ! हमर नाम अनुप्मा छी आ हम अई क्लेजमे नव माने भर्खर आयल छी ।
आदित्य :- ए ! हमहूँ अही क्लेजमे पढै छी, वस अहाँस' एक स्टेप सिनियर छी हम । सच्चमे एकटा बात कहूँ ? 
अनुप्मा :- की बात ? कहूँ ने ।
आदित्य :- सच्चमे अहाँक चेहरा चानसन अईछ । अहाँ बड सुन्दर छी ।अहाँ त' चन्द्रमुखी छी । 


(गीतक शुरु होएत अछि ।
गोरी चन्द्रमुखी रुप अहाँके चमचम चमकैय
दैछी जखने मुस्कि,दिल ई धकधक धडकैय!

चालि अहाँके मतवाली,चलैछी धर्ती हिलाके
देखिते पिछा पडैय,सबटा छौडा मिथिलाके
गोर गोर पुरा बदन अहाँके गमगम गमकैय
 दैछी जखने मुस्कि••••
....... ......... .......
आँखी अहाँके मृग नैनी,गाल आम सेनुरिया
मोहनि सुरत स अहाँ,गिरबैछीयै बिजुरिया
रसगर ठोरस अहाँके मधुरस टपटप टपकैय
 दैछी जखने मुस्कि••••






गीत समाप्ति संगे धिरे धिरे पर्दा खसैत अछि  अहिठाम चारिम दृश्यके समाप्ति होएत छै । )

3 टिप्‍पणियां:

| Copyright © 2016 डिजाईन प्रकाश मैथिल+९७४३३५०५३१४ >